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भैंसदेही में जुआ के खिलाफ कार्रवाई या खानापूर्ति? 22 गिरफ्तार, लेकिन बड़े खिलाड़ियों पर सवाल बरकरार

By, वामन पोटे

भैंसदेही में जुआ के खिलाफ कार्रवाई या खानापूर्ति? 22 गिरफ्तार, लेकिन बड़े खिलाड़ियों पर सवाल बरकरार
बैतूल, 14 अगस्त। भैंसदेही थाना क्षेत्र में जुआ-सट्टे के खिलाफ पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने भले ही 22 जुआरियों को सलाखों तक पहुंचा दिया हो, लेकिन इस कार्रवाई ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो दिनों में तीन जुआ फड़ों से 22 लोगों की गिरफ्तारी और महज 23 हजार 960 रुपये की जब्ती के बाद अब सवाल यह है कि आखिर लंबे समय से जुआ-सट्टे के लिए बदनाम हो रहे क्षेत्र में पुलिस की नजर सिर्फ जुआ खेलने वालों तक ही क्यों पहुंच रही है? जुआ के फड़ संचालित कराने वाले कथित बड़े खिलाड़ियों तक कार्रवाई कब पहुंचेगी?
पुलिस ने 13 अगस्त को ग्राम कोथलकुंड में टोल के पास दो अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर 16 लोगों को जुआ खेलते पकड़ा। यहां से 18 हजार 770 रुपये बरामद किए गए। इसके अगले दिन सालईढाना में छह लोगों को सड़क किनारे बिजली के खंभे की रोशनी में जुआ खेलते पकड़ा गया और 5 हजार 190 रुपये जब्त किए गए। पुलिस ने दोनों घटनाओं को अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया है।
लेकिन कार्रवाई की तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। यदि पुलिस को मुखबिर के जरिए जुआ फड़ों की जानकारी मिल रही थी और इन स्थानों पर लगातार जुआ चल रहा था, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि ये अड्डे इतने दिनों से पुलिस की नजर से कैसे बचते रहे? क्या पुलिस को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं थी या फिर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही थी?
सबसे बड़ा सवाल जुआ खेलने वालों की गिरफ्तारी से आगे का है। जुआ फड़ पर बैठकर दांव लगाने वाले 22 लोगों पर तो कार्रवाई हो गई, लेकिन उन लोगों की तलाश कहां है जो कथित तौर पर इन अड्डों को संचालित कराते हैं? जुआरियों से पूछताछ के आधार पर फड़ संचालकों, कथित सरगनाओं और उन्हें संरक्षण देने वालों तक पुलिस पहुंची या नहीं, इस पर पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र जैन के निर्देश पर हुई कार्रवाई को लेकर यह भी चर्चा है कि कहीं यह कार्रवाई महज छोटे स्तर के जुआरियों तक सीमित होकर न रह जाए। यदि पुलिस वास्तव में जुआ-सट्टे के नेटवर्क को खत्म करना चाहती है तो उसे केवल मौके पर ताश खेलते मिले लोगों की गिरफ्तारी से आगे बढ़ना होगा। फड़ किसने लगाया, पैसा किसका लगा था, जुआ कौन संचालित कर रहा था और इस पूरे नेटवर्क को संरक्षण कौन दे रहा था—इन सवालों के जवाब तलाशना भी पुलिस की जिम्मेदारी है।
भैंसदेही में जुआ-सट्टे के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन कार्रवाई की पारदर्शिता और उसकी निष्पक्षता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। छोटी मछलियों की गिरफ्तारी से आंकड़े जरूर बढ़ सकते हैं, मगर जुआ के कथित बड़े मगरमच्छ पुलिस की पकड़ से बाहर रहे तो कार्रवाई की मंशा पर सवाल उठते रहेंगे।
पुलिस ने तीनों मामलों में जुआ अधिनियम की धारा 13 के तहत प्रकरण दर्ज किए हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस की जांच गिरफ्तार 22 आरोपियों पर खत्म होती है या फिर उनके पीछे सक्रिय जुआ नेटवर्क तक भी पहुंचती है। यही तय करेगा कि भैंसदेही में हुई कार्रवाई वास्तव में जुआ के खिलाफ अभियान है या फिर महज कार्रवाई का आंकड़ा बढ़ाने की कवायद।

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