शासन ने 3 वर्षों से मातोश्री वृद्धाश्रम को नहीं दिया अनुदान वृद्ध आश्रम संचालक ने समाजसेवियों से लगाई मदद की गुहार
By, बैतूल वार्ता
शासन ने 3 वर्षों से मातोश्री वृद्धाश्रम को नहीं दिया अनुदान
वृद्ध आश्रम संचालक ने समाजसेवियों से लगाई मदद की गुहार
बुजुर्ग राम की अंत्येष्टि में सहयोग के लिए वृद्ध आश्रम संचालक ने माना समाजसेवियों का आभार
बैतूल। मातोश्री वृद्धाश्रम को लगभग 3 वर्षों से शासन द्वारा अनुदान नहीं दिया गया। ऐसी स्थिति में विशाल सतपुड़ा उत्थान समिति मातोश्री वृद्धाश्रम के मनोज बिष्ट ने समाजसेवियों से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने बताया कि विगत दिनों आश्रम के वृद्ध राम का निधन हो गया था। इसके बाद स्प्रेडिंग इस्माइल ग्रुप के अक्षय तातेड़, संदीप कौशिक, निक्की राजपूत, प्रदीप तिलनते, हिमांशु दुबे ,बिट्टू राजपूत द्वारा शव वाहन की व्यवस्था की गई। वहीं हेल्प केयर यूथ क्लब के निसार खान व अन्य साथियों द्वारा लकड़ी की व्यवस्था की गई। कब्रिस्तान कमेटी के सेवक तैयब खान ने अपनी निगरानी में समस्त व्यवस्था समय पर मोक्ष धाम में उपस्थित रहकर संपन्न कराई। समाजसेवियों के सहयोग से बुजुर्ग राम का अंतिम संस्कार 26 नवंबर को सुबह 11:30 बजे संपन्न किया गया। मुखाग्नि मुक्ति शर्मा द्वारा दी गई। सभी ने बुजुर्ग राम की आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना की। श्री बिष्ट ने बताया कि राम दादा का अंतिम संस्कार समाजसेवियों के तत्कालीन विशेष योगदान से संभव हो सका। बैतूल में पूर्व की भांति हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल भी कायम हुई। इस सेवा कार्य में स्प्रेडिंग इस्माइल ग्रुप से सुनील प्रजापति मोनू यादव मनीष मालवीय हेल्प केयर यूथ क्लब टीम से निसार खान चिंटू खान मुस्कान सोनी विमल मालवीय कब्रस्तान कमेटी के सेवक तैयब खान मातोश्री परिवार सेवक एवं वरिष्ठजनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
–कौन थे राम दादा–
मनोज बिष्ट ने बताया कि दिसंबर 2021 की कड़कड़ाती ठंड में एक वृद्ध बैतूल की सड़कों पर बीमार हालत में स्प्रेडिंग स्मेल ग्रुप को मिला था। जिसका प्राथमिक उपचार कर मातोश्री वृद्धाश्रम में पहुंचाया गया। दादा बोलते नहीं थे सिर्फ इशारे में बात करते थे। इनकी उम्र 84 वर्ष थी मातोश्री परिवार द्वारा इनका नाम राम रखा गया। साफ-सफाई पसंद मातोश्री वृद्धाश्रम में वे सभी के प्यारे रहे। उन्होंने लगभग 1 वर्ष आश्रम में बिताया 25 नवंबर रात्रि 9:00 बजे उनका आकस्मिक निधन हो गया। शासन से अनुदान नहीं मिलने के चलते उन्होंने बुजुर्ग की अंत्येष्टि के समाजसेवियों से मदद की गुहार लगाई।
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