बैतूल में अनूठी शादी:न पंडित, न फेरे वकील और शिक्षिका ने संविधान की शपथ लेकर ऐसे रचाया प्रेम विवाह
By, बैतूल वार्ता


बैतूल में अनूठी शादी:न पंडित, न फेरे वकील और शिक्षिका ने संविधान की शपथ लेकर ऐसे रचाया प्रेम विवाह
बैतूल।।
हम भारत के लोग भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथ-निरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई. (मिति मार्गशीर्ष शुक्ला आप्तमी, संवत् दो हज़ार छह विक्रमी) को एतद्द्वारा संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मर्पित करते हैं।
भारतीय संविधान की इस उद्देशिका का मंत्र और हाथों में संविधान की पुस्तिका रखकर एक वकील और शिक्षिका ने बैतूल में अपना अनूठा विवाह किया। वर और वधू पक्ष की सहमति से यह प्रेम विवाह सैकड़ों लोगो की मौजूदगी में हुआ। विवाह की रस्मों की खासियत यही रही की न भंवरे पड़ी गई, न अग्नि के फेरे हुए, न पंडित बैठे और न गठजोड़ हुआ। हुआ तो सिर्फ इतना की वर-वधु हाथों में संविधान पुस्तिका लेकर मंच पर पहुंचे और दोनों ने संविधान की उद्देशिका पढ़कर एक साथ जीवन बिताने का संकल्प दोहराया।
बैतूल में एक वकील और शिक्षिका के मंत्रोच्चार की जगह संविधान की उद्देशिका पढ़कर रचाए गए इस विवाह में दूल्हा-दुल्हन ने संविधान की पुस्तिका को हाथो में लेकर एक दूसरे का साथ जीवन भर निभाने की कसम खाई। खास बात यह रही कि अंतर्जातीय इस शादी में दोनों के प्रेम विवाह को वर और वधू पक्ष ने पूरी सहमति और अपनेपन से अपनाया
पेशे से वकील दर्शन बुंदेला खुले विचारों के युवक है। अक्सर सम सामयिक मुद्दों, गरीबों वंचितों के लिए मोर्चा निकालने वाले दर्शन शोषित, वंचितों के लिए लड़ते रहे हैं। अपनी वकालत की फीस से समझौता कर वे कई जरूरतमंदों के केश मुफ्त लड़ते है। अपने इसी जुखारूपन के चलते उनकी दोस्ती कॉलेज जीवन में राजश्री से हुई। अच्छी दोस्त और सामाजिक सरोकारों को पूरा करने में दोनों का साथ फिर प्यार में बदल गया। दोनों एक दूसरे को 12 साल से डेट कर रहे थे। कॉलेज के दिनों और मोर्चा निकालने के दौरान की यह दोस्ती अब एक शादी के बंधन में बंध गई है।
ऐसे रचाया विवाह
दर्शन और राजश्री ने अपने परिवारों को अपनी इच्छा बताई और एक साथ, एक बंधन में बंधने का फैसला सुना दिया। अंतर्जातीय प्रेम विवाह को दोनों परिवारों ने सहमति दी और दोनों एक दूजे के हो गए। इसके लिए दर्शन और राजश्री ने पहले रजिस्टर्ड मैरिज की और फिर रविवार रात संविधान की शपथ लेकर एक दूसरे का हाथ थाम लिया। इस दौरान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष से लेकर कई वकील, सामाजिक कार्यकर्ता, नाते, रिश्तेदार इस विवाह के साक्षी बने।
दर्शन जहां बैतूल के जिला न्यायालय में वकालत करते हैं। वहीं राजश्री हरदा जिले के एक्सीलेंस स्कूल में हायर सेकेंडरी कक्षाओं को पढ़ाने वाली शिक्षिका है। इसके पहले वे महिला एवम बाल विकास विभाग में पर्यवेक्षक थी। भूगोल विषय में गोल्ड मेडलिस्ट राजश्री एमए है। अहिरे परिवार में जन्मी राजश्री बैतूल के अंबेडकर वार्ड निवासी अनूसूचित जाति शिक्षक की बेटी है। जबकि दर्शन रजक समाज से जुड़े सेवानिवृत कलर्क लक्ष्मण बुंदेले के बड़े बेटे हैं।
क्रिएटिव इंविटेशन कार्ड देकर किया इनवाइट
इस विवाह की खास बात यह भी रही की विवाह के पहले भेजे गए आमंत्रण पत्र में भी संविधान का जिक्र किया गया। दर्शन ने मित्रों, रिश्तेदारों को भेजे निमंत्रण पत्र में लिखा की संविधान के आर्टिकल 21 के तहत वे अपने जीवन जीने के अधिकार के तहत शादी कर रहे हैं। इसलिए आप भी संविधान के आर्टिकल 19(i)(b) के तहत शांति से एकत्रित होने के अधिकार का उपयोग कर इस शादी में आकर उन्हें आशीर्वाद दें।
बच्चों को फैसला लेने का हक
दर्शन के पिता लक्ष्मण के मुताबिक बेटा आधुनिक ख्यालों और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर काम करता रहा है। इसलिए यह कभी सोचा ही नहीं की वह किस समाज की बेटी से विवाह कर रहा है। उसने जो फैसला किया है। वह बेहतर ही होगा।आखिर जीवन उनका है और उसे जीना भी अपनी मर्जी से है।ऐसे में उन्हें फैसले लेने का पूरा अधिकार है।
संविधान का अध्याय देता है पसंद का अधिकार
दर्शन के मुताबिक देश में जाति की जड़े फैल रही है। किस तरह चाहे कोई भी प्रदेश हो किस तरह जाति के आधार पर भेदभाव हो रहा है। यह लगातार बढ़ता जा रहा है। तब हमने फैसला किया कि हमारा संविधान देश के सभी नागरिकों को चाहे वह किसी भी जाति, किसी भी धर्म, किसी भी लिंग और किसी भी समुदाय के हो, जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किए जाने की बात करता है। संविधान का आर्टिकल 21 जो हमें राइट-टू-चूज का अधिकार देता है। उसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए आज इस प्रस्तावना को पढ़ते हुए हमने विवाह किया है और एक दूसरे को जीवन साथी बनाया है।
वहीं दुल्हन बनी राजश्री कहती है कि संविधान ने हमें मौलिक अधिकार दिए हैं। जिन्हें कोई नहीं छीन सकता। स्वतंत्रता का अधिकार, पसंद को चुनने का अधिकार बहुत महत्वपूर्ण है। उसी को उपयोग करते हुए आज हम परिणय सूत्र में बंधे हैं। देश में जाति आधार पर भेदभाव होते हैं। लोग इस चीज को समझते नहीं है कि यह भविष्य में कितनी मुसीबत लेकर आता है। यदि आप अपनी पसंद को चुनने का अधिकार देते हैं। तो इससे सभी का जीवन सुखमय होता है। इसी का उपयोग करते हुए हम इस बंधन में बंधे हैं। राजश्री का कहना है कि हम जब अपने पेरेंट्स की बात मानते हैं, तो पेरेंट भी बच्चों की बात को सुने समझे। हमेशा फैसला किसी एक का नहीं हो सकता। परिवार जब मिलकर फैसला लेता है, तो रिश्ते आगे बढ़ते है। इसलिए पेरेंट्स को बच्चों की और बच्चों को पेरेंट्स की बात सुननी चाहिए।
दाड़ी विवाद पर लड़ी लंबी लड़ाई
दर्शन उस समय चर्चाओं में आए थे। जब उन्होंने अपने छोटे भाई दीपक की प्रताड़ना की लंबी लड़ाई लड़ी। दरअसल तीन साल पहले 23 मार्च, 2020 में बैतूल पुलिस ने वकील दीपक बुंदेले को दाढ़ी होने के चलते मुस्लिम समझ कर पीटा था। बुंदेले ने इसकी शिकायत कई मंचों पर की थी। वे इसे लेकर हाईकोर्ट भी गए थे। एडवोकेट दीपक बुंदेले के मुताबिक उन्हें जब पीटा गया था तो उस वक्त वो इलाज के लिए हॉस्पिटल जा रहे थे। उन्होंने इस घटना के बाद पुलिसवालों के खिलाफ मामला दर्ज कराने की कोशिश की।
पुलिसवालों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने निराश होकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ सेक्शन 188 (पब्लिक सर्वेंट के आदेश की अवज्ञा करना), 353 (पब्लिक सर्वेंट को ड्यूटी करने से रोकने के लिए हमला या आपराधिक ताकत) और 294 (सार्वजनिक जगहों पर अश्लील हरकत या गाने के लिए सजा) के तहत केस दर्ज कर लिया था।इस मामले में दीपक बुंदेले को सेशन कोर्ट बैतूल से अग्रिम जमानत मिल गई थी।
दीपक बुंदेले ने भास्कर को बताया कि मैंने मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी लेकिन आयोग ने तुरंत कार्रवाई नहीं की। बाद में जब मीडिया में खबरें आने लगी तो आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया। राष्ट्रीय आयोग ने समाजसेवी हेनरी की शिकायत पर यह संज्ञान लिया था। यह मामला अब भी अदालतों में लंबित है। दर्शन ने इस मामले में खास भूमिका निभाई थी।साभार – दैनिक भास्कर