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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की 200 सड़कें पीडब्ल्यूडी ने नहीं लीं;मप्र रूरल रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी  द्वारा गांवों में बनाई ये सड़कें अब मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड का हिस्सा

By, बैतूल वार्ता

सिस्टम की मनमर्जी:  प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की 200 सड़कें पीडब्ल्यूडी ने नहीं लीं;मप्र रूरल रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी  द्वारा गांवों में बनाई ये सड़कें अब मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड का हिस्सा

बैतूल ।।।।बैतूल सहित प्रदेश के सभी जिलों में बनी   प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के पहले चरण में जो  सड़कें बनीं थीं, अब उनका विस्तार हो चुका है और वे अब जिलों की मुख्य सड़कों से जुड़ चुकी हैं, लेकिन इनकी मरम्मत नहीं हो पा रही है। मरम्मत कौन करेगा, इसका जवाब दो विभागों की मनमर्जी में उलझ गया है। दरअसल, योजना के 2000 किमी लंबी 200 से ज्यादा सड़कें हैं, जिनका निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के पहले चरण में हुआ था। इसमें 100% पैसा केंद्र ने दिया था। दूसरे और तीसरे चरण में इन्हीं सड़कों से कुछ और गांव व नई सड़कें जुड़ गईं। इसलिए पहले चरण वाली सड़कें मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड (एमडीआर) का हिस्सा बन गईं।

मप्र रूरल रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी (आरआरडीए) ने एमडीआर घोषित हो चुकी सड़कों को सरेंडर करते हुए राज्य शासन को सौंप दिया। प्रदेश में एमडीआर की मरम्मत का जिम्मा अब लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के पास है, लेकिन, अभी तक पीडब्ल्यूडी ने इन सड़कों को अधिग्रहण ही नहीं किया। 2015 से पहले बनीं ये सड़कें अब मरम्मत न होने के चलते खराब हो चुकी हैं।

उज्जैन में सबसे ज्यादा 24 तो मंडला में 18 सड़कें उधड़ीं

एमपीआरआरडीए ने हाल ही में ऐसी सड़कों की एक निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कराई है, जिसमें 900 किलोमीटर लंबी 143 सड़कों का जर्जर होना पाया गया है। इनमें सर्वाधिक 24 सड़कें उज्जैन जिले की हैं।

पीडब्ल्यूडी को मरम्मत करानी चाहिए

“पीएमजीएसवाय के तहत बनी ऐसी सड़कें जो अब मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड में तब्दील हो चुकी हैं, उनकी मरम्मत एमपीआरआरडीए नहीं कर सकता, इसलिए हमने इन्हें शासन को हैंडओवर कर दिया है। कायदे से अब इनकी मरम्मत पीडब्ल्यूडी को करना चाहिए, लेकिन उन्होंने अभी तक इन्हें अपनाया नहीं हैं।”
– तन्वी सुंद्रियाल, सीईओ, एमपीआरआरडीए

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