चुनावी रणनीति में 100 की रफ्तार में भाजपा तो, कांग्रेस जनाधार विहीन नेताओं के भरोसे क्या 40 साल का मिथक तोड़ पाएंगे विधायक निलय डागा
By, वामन पोटे बैतूल वार्ता
चुनावी रणनीति में 100 की रफ्तार में भाजपा तो, कांग्रेस जनाधार विहीन नेताओं के भरोसे
क्या 40 साल का मिथक तोड़ पाएंगे विधायक निलय डागा

साइलेंट रणनीति बनाने में जुटे पूर्व विधायक हेमंत खंडेलवाल,
बैतूल।।वैसे भी यदि बैतूल विधान सभा का पिछले 40 साल का रिकार्ड उठाकर देखा जाए तो सिटिंग एम एल ए, को लगातार दूसरी बार टिकट तो मिला लेकिन वो जीत हासिल नहीं कर सका है। ये बात अलग है कि अगले चुनावों में उसने जीत हासिल कर ली हो। अगर बैतूल विधान सभा का राजनीतिक रिकार्ड उठाकर देखा जाए तो कोई भी विधायक लगातार जीत हासिल नहीं कर पाया है। वर्ष 2018 के चुनाव में यह मिथक साफ तौर पर देखने को तब मिला जब अपनी विधायकी में तत्कालीन विधायक हेमंत खंडेलवाल ने बैतूल विधान सभा मे वे सभी जरूरी काम कराए थे जो आम जनता की जरूरतों से सीधे तौर पर जुड़े थे। इनमें शहर और वार्डों की सड़कें, किसानों के लिए सिंचाई के संसाधन जैसे काम शामिल थे। वे भी अपनी जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त होकर दिमाग की जगह दिल से चुनाव लड़ गये जिसका नतीजा यह निकला कि 2018 के चुनावों में वे 40 साल से चली आ रही मिथक का शिकार हो गये।अब देखना यह है कि , युवा विधायक निलय डागा क्या इस मिथक को तोड़ने में कामयाब होते हैं या फिर पूर्व विधायक हेमंत खंडेलवाल इस मिथक को कामयाब रखते हुए दोबारा विधायकी हासिल करने में कामयाब होते हैं।
राजनीति के चतुर खिलाड़ी और भाजपा के दिग्गज नेता हेमन्त खंडेलवाल भले ही 2018 का विधान सभा चुनाव हार गए हो पर प्रदेश सरकार में आज भी हेमंत खंडेलवाल की तूती बोलती है चुनाव हारने के बाद भी राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी का आज भी कद जस का तस है ।भले ही कांग्रेस के पास राजनीति में सलाह देने के लिए बड़ी फौज हो पर हेमंत के आगे ये सब बौने ही साबित होते है । यदि कांग्रेस के सलाहकारों पर चिंतन , मनन करें तो इन सलाहकारों में आज वो चेहरे नदारद दिखेंगे जिनके दम पर कभी जिले में कांग्रेस का एक वर्चस्व नजर आता था। कुल मिला कर ये साफ है कि कांग्रेस के सलाहकार मंडल में जनाधार वाला एक भी नेता दूर दूर तक नजर नही आ रहा है।2023 के विधान सभा चुनाव को अब 7 माह से भी कम समय बचा है ।हेमंत खंडेलवाल ने अपनी चुनावी ब्यूह रचना रचकर काम शुरू कर दिया है। ये नहीं भूला जा सकता कि, दूध का जला अब छाछ भी फूक कर पी रहा है ।हालांकि हेमन्त की रणनीति का ब्लू प्रिंट क्या है, मैदानी स्तर पर इस प्रिंट का किस तरह इस्तेमाल होगा ये तो केवल रणनीतिकार के जेहन में ही दफन है। राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि यह रणनीति चुनाव के वक्त ही एक के बाद एक एक्सपोज़ होती नजर आएगी। ये कहना गलत होगा कि ऊंट सिर्फ एक ही करवट बैठेगा।
बैतूल विधान सभा को लेकर राजनीतिक पंडित भी अपने अपने तर्क दे रहे है ।भले ही 2018 के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस 22 हजार वोट से अपनी जीत दर्ज कर भाजपा से यह सीट छीनकर युवा नेता निलय विनोद डागा विधायक बने परन्तु अब हालात बदल गए है ।कांग्रेस के पूर्व विधायक स्व- विनोद डागा भी तीन बार विधायक का चुनाव लड़े पर जीते एक ही बार इधर कांग्रेस में आज भी गुटबाजी चरम पर है और बैतूल जिले कई गुटों में विभक्त यह कांग्रेस अपनो को ही निपटाने में लगी है ।वही भाजपा में बूथ मैनेजमेंट से लेकर अब वोटर लिस्ट के आधे पन्ना प्रभारी भी तैयार कर लिए गए है ।इधर भाजपा के चतुर खिलाड़ी हेमंत खंडेलवाल अब हर चाल में चुनावी मैनेजमेंट को ध्यान में रखकर चल रहे है भले ही बीते चुनाव में अपने ही खोटे सिपाहीयो ने दगा किया हो पर अब सब की पहचान हो गई है और राजनीति का यह चतुर खिलाड़ी बैतूल से लेकर भोपाल और दिल्ली तक अपनी बात मनवाने में महारथ हासिल कर चुका है
सामाजिक ताना बाना बुन रहे दोनों दल , डॉक्टर साबले के बाद कोई भी समाज का सर्वमान्य नेता नही बन सका
चुनावी वैतरणी में हर समाज को भाजपा कांग्रेस दोनों ही दल खूब तवज्जो दे रहे पर जिससे सामाजिक तौर पर खूब लाभ दिया जा रहा है क्या वो उस समाज मे सर्वमान्य है यह बात आज खूब गांव गांव चल रही है ।यदि इस मामले में स्व डॉक्टर अशोक साबले की बात करे तो वे अपने समाज मे सर्वमान्य नेता बनकर उभरे थे आखिर डॉक्टर की वह कला आज तक किसी भी राजनेता ने हासिल नही की डॉक्टर ने समाज मे विवाह संबंध,सहित गांव गरीब को दिल से जोड़कर अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा हासिल की थी पुनर्विवाह जैसे सामाजिक कार्य से लेकर कई ऐसे मामले थे जो आज भी समाज मे उन्हें याद करते है ।