आत्महत्या पर प्रधानमंत्री के ‘चुटकुले’ पर नाराज़गी जताते हुए कहा- हम एक समाज बीमार हो गए हैं
By,betulvarta
आत्महत्या पर प्रधानमंत्री के ‘चुटकुले’ पर नाराज़गी जताते हुए कहा- हम एक समाज बीमार हो गए हैं
अप्रैल 2023 |
गुरुवार को एक समाचार चैनल की पोजीशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक चुटकुला सुनाने की बात कहते हुए एक महिला की आत्महत्या करने का प्रसंग बताया था। विपक्षी नेताओं समेत कई लोगों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा आत्महत्या के बारे में चुटकुला सुनाना हमेशा नहीं कहता।

26 अप्रैल 2023 को रिपब्लिक समिट में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी। (फोटो साभार: पीआईबी)
नई दिल्ली: 26 अप्रैल को एक मीडिया कार्यक्रम में आत्महत्या से एक महिला की मौत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘चुटकुले’ ने सोशल मीडिया पर लांग कर दिया है। कई लोगों ने कहा कि एक प्रधान मंत्री द्वारा आत्महत्या के बारे में एक चुटकुला सुनाना बेहद अनिच्छुक है।
रिपोर्ट के अनुसार, मीडिया मीट में मोदी ने दर्शकों के सामने हिंदी में बात की और उनके भाषण से संबंधित टेलीविजन चैनल पर सीधा प्रसारण किया।
मोदी ने अपने बयान में कहा था, ‘बचपन में हम एक चुटकुला नंबर पर थे। मैं आपको बताता हूं। एक प्रोफेसर और उनकी बेटी ने हैक्साइड कर ली। उसने एक चिट छोड़ी, ‘मैं जिंदगी से थक चुकी हूं और जीना नहीं चाहती। इसलिए मैं कांकरिया तालाब में कूदकर मर जाऊंगी। सुबह उसने देखा कि उसकी बेटी घर पर नहीं है। देखने पर उसे पत्र मिला। पिता बहुत नाराज थे। ‘मैं एक प्रोफेसर हूँ।’ इतने सालों तक मैंने मेहनत की है और अब भी उसने ‘कांकरिया’ की स्पेलिंग गलत लिखी है।’
इस बिंदु पर दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठती हैं। मोदी भी हंसते नजर आ रहे हैं।
फिर उन्होंने कहा, ‘मुझे खुशी है कि अर्नब (गोस्वामी, रिपब्लिक टीवी के प्रमुख) ने शानदार हिंदी बोलना शुरू कर दिया है।’ इसके बाद और तालियां बजीं।
मोदी ने कहा, ‘मैंने यह नहीं सुना कि उन्होंने क्या कहा लेकिन मैं इस बात पर ध्यान दे रहा था कि उनकी हिंदी सही है या नहीं। हो सकता है कि आपने हिंदी ठीक से सीखी हो क्योंकि आप मुंबई में रह रहे हैं।’
यह स्पष्ट नहीं है कि गोस्वामी की हिंदी की आकांक्षा करने के लिए यह ‘चुटकुला’ क्यों जरूरी था।
उल्लेखनीय है कि किसी देश में पिछले कुछ समय में आत्महत्या के मामलों में कोई दोष देखा गया है। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो रिकॉर्ड के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2021 में भारत में 1,64,033 लोगों ने आत्महत्या की। इसका मतलब यह है कि हर दिन 450 लोगों की मौत हो रही है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि थी।

इंडियन जर्नल ऑफ साइकेट्री में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, एनसी आरबी के अस्तित्व में आने के बाद से यह अब तक का सबसे ज्यादा रिकॉर्ड है।
आत्महत्या से मरने वालों में से एक तिहाई (34.5%) से अधिक 18-30 वर्ष की आयु वर्ग के थे। अन्य 31% की आयु 30-45 वर्ष के बीच थी – इस प्रकार यह रहस्य है कि जिन लोगों को भारत के ‘जनसांख्यिकीय’ के रूप में संदर्भित किया जाता है, वे आत्महत्या से मर रहे हैं।
द लिव लव लाफ फाउंडेशन द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया कि मानसिक स्वास्थ्य प्राथमिकता के रूप में नहीं आता है और लोग आत्महत्या को एक गंभीर रूप से नहीं मानते हैं।
वोटो (क्वार्ट्ज) के रिपोर्ट के अनुसार, भारत के आठ शहरों के 3,556 लोगों ने एक सर्वेक्षण में आश्चर्यजनक रूप से 47 प्रतिशत लोगों को मानसिक बीमारी से ग्रस्त लोगों के प्रति अत्यधिक आलोचनात्मक होने के रूप में देखा जा सकता है।
हाल की रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि कैसे युवा भारतीयों के बीच अकादमिक संकट व्याप्त है, जो विशिष्ट विवरण तक मौजूदा जातिगत भेदभाव, बढ़ती बेरोजगारी और वित्तीय संघर्ष जैसे कारणों के कारण है, जिससे छात्र पहले से कहीं अधिक अलग-अलग महसूस कर रहे हैं।
आशंका ने कहा
इस बीच, विरोधी नेताओं और कई अन्य लोगों ने मोदी की टिप्पणी के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्विटर पर कहा कि आत्महत्या के कारण हजारों परिवार अपने बच्चों को खो देते हैं और प्रधानमंत्री को उनका मजाक नहीं बनाना चाहिए।
कांग्रेस नेता फनी गांधी वाड्रा ट्विटर पर टिप्पणी करने वालों में सबसे आगे थे। उन्होंने कहा कि भारत का उच्च आत्महत्या दर एक त्रासदी है, मजाक नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘अवसाद और आत्महत्या, खासकर युवाओं में कोई हंसी का विषय नहीं है। एनसी आरबी के आंकड़ों के अनुसार, 2021 में 1,64,033 भारतीयों ने आत्महत्या की। उनमें से एक बड़ी संख्या 30 वर्ष से कम आयु के थे। यह एक ट्रैजेडी है न कि मजाक।’
उन्होंने आगे कहा कि प्रधान मंत्री और उनके मजाक पर दिल खोलकर हंसने वालों को खुद को बेहतर और शिक्षित करना चाहिए। इस संवेदनशीलता से मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के उपहास के बजाय जागरूकता की आवश्यकता है।
वहीं, राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने मोदी के बताए बाद में तालियों की गड़गड़ाहट का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, ‘ग्रुणता तो उभरती है जब देश के प्रधानमंत्री ‘आत्महत्या’ जैसी संवेदनशील संवेदनशीलता पर चुटकुला सुनाते हैं लेकिन उससे भी ज्यादा सिनिस्टर है जोक्स के बाद की तालियां और अट्टाहास। हम बहुत ही बीमार समाज हो गए हैं…..जय हिंद।’
बीजेपी सांसद क्यूट चतुर्वेदी ने एनसी आरबी का 2021 का पात्र साझा किया, जिसमें आत्महत्या होने वाली मौत के मामले में भारत की संख्या प्रतिबिंबित हुई है।
उन्होंने कहा, ‘हमें एक देश के रूप में अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के प्रति अधिक संवेदनशीलता होने की आवश्यकता है क्योंकि आप परिवर्तन का नेतृत्व कर रहे हैं न कि उनका दुर्दशा का मजाक उड़ा रहे हैं।’
आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट किया, ‘हमारे प्रधानमंत्री द्वारा मानव जीवन के प्रति अस्पष्टता की धारणाएं हैं, उन्हें आत्महत्या पर मजाक की जरूरत है! यह सोच है कि जब यह अप्रभावित पीएम एक लड़की की आत्महत्या पर भद्दा और क्रूर मजाक करता है, तो देश से हंसने की उम्मीद करता है!’
समाजवादी पार्टी के गौरव प्रकाश ने द क्विंट की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ‘हर नौ मिनट में भारत में एक महिला अपनी जान ले लेती है।’
कई पत्रकारों ने भी इस कथित जोक्स की आलोचना की है। अभिषेक बक्शी ने ट्वीट किया, ‘आत्महत्या के बारे में एक चुटकुला। शाबाश नरेंद्र मोदी! असंवेदनशीलता का कोई भी पहलू आपके भोग से अनुपयोगी नहीं होना चाहिए।’
स्वाति चतुर्वेदी ने लिखा, ‘आत्महत्या मजाक का विषय है? मोदी ने खुद को पीछे छोड़ दिया।’
आत्महत्या पर प्रधानमंत्री के ‘चुटकुले’ पर नाराज़गी, आशंका ने कहा- हम एक बीमार समाज बन गए हैं सबसे पहले द वायर पर दिखाई दिए – हिंदी .
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