फिर आदिवासी की भूमि पर नियम विरुद्ध तरीके से नामांतरण का आरोप पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से की शिकायत, कार्रवाई की मांग
By, बैतूल वार्ता
आदिवासी की भूमि पर नियम विरुद्ध तरीके से नामांतरण का आरोप
पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से की शिकायत, कार्रवाई की मांग
बैतूल। आदिवासी की भूमि पर गैर आदिवासियों द्वारा अवैध अतिक्रमण कर नियम विरुद्ध तरीके से नामांतरण करने के मामले में पीड़ित आदिवासी ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है। शिकायतकर्ता बलवंतसिंह ने एसपी को सौंपे शिकायत आवेदन में बताया कि बलवंत सिंह पिता मेहगीलाल माता श्रीमती सदिया बाई जाति गोंड (आदिवासी) के नाम पर जमीन थी, जिसमें से एक हजार वर्गफुट की बात हुई थी, पीड़ित के अनुसार उनकी मां पढ़ी-लिखी नहीं होने की वजह से जयंत फाले ने 1.125 हेक्टेयर अपने नाम करवा ली। परिवार के किसी भी सदस्य को रजिस्ट्री के समय नहीं बुलाया ना ही साथ में कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति था। जिसके उसने एक लाख रूपये दिये। जब अन्य लोगो को जमीन बेची और वो लोग सीमांकन के लिए खेत में आये तब पता चला कि उसने 1.125 हेक्टेयर जमीन अपने नाम करवा ली। ग्राम हसलपुर तह आमला जिला बैतूल के परिवार की पुश्तैनी भूमि खसरा नं. 39 कुल रकबा 1.125 हेक्ट, स्थित ग्राम हसलपुर तह. आमला जिला बैतूल को फर्जी तरीके से विक्रय कर नामान्तरण भी कर दिया है। शिकायतकर्ता ने बताया कि जयंत पिता रामचन्द्र फाले रोहित नारे पिता सुखदेव नारे, मनोहर पवार पिता सुन्दरलाल पवार सुनील कुमार पुण्डे, आदि लोगो द्वारा डरा धमकाकर कब्जा लेने का प्रयास किया जा रहा है, घर आकर बार-बार परेशान करते हुए जेल में बंद करवाने की धमकी दी जा रही है। पटवारी, आर.आई. द्वारा भी यही धमकी दी जाती है। शिकायतकर्ता ने एसपी से उचित जांच कर न्याय की गुहार लगाई है।
— आदिवासी की जमीन पर कब्जा करने के मामले में यह प्रावधान–
शिकायत आवेदन में उल्लेख किया गया कि आदिवासी की भूमि को अन्य लोगो को विक्रय करना एवं उस पर अवैध अतिक्रमण कर कब्जा करना गैर कानूनी है। म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (6) (एक) के तहत ऐसे क्षेत्रो में आदिम जनजाति के किसी भूमि स्वामी का अधिकार किसी ऐसे व्यक्ति जो कि उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किये गये क्षेत्र में कि ऐसे जनजाति का न हो तो दुबारा विक्रय या परिणाम स्वरूप न तो अंतरित किया जायेगा और ना ही अन्तरणीय होगा उपबंधित है। आदिवासियों, अनुसूचित जनजाति की जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर मकान या दुकान अन्य कोई भी कार्य किया गया हो तो अनुसूचित जनजाति / जाति उत्पीडन निवारण अधिनियम 1989 के दायरे में आता है, जो कि एस.सी./एस.टी./एट्रोसिटी एक्ट के मुकदमा दर्ज कराई जाये व जांच कर इस प्रकरण से सम्बंधित को नामजद आरोपी बनाते हुए सजा सुनाई जाए। आवेदक ने उक्त विषय पर गंभीरता पूर्वक संज्ञान में लेते हुए कार्यवाही कर पुश्तैनी जमीन वापस भिलाई जाने का आग्रह किया।
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