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अधीक्षक बनाता कौन है ? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के इलाके में उठे बड़े सवाल ! बैतूल में जनजातीय कन्या छात्रावास का बड़ा मामला—500 छात्राओं का हंगामा, खाने में इल्ली…

By,वामन पोटे

अधीक्षक बनाता कौन है ? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के इलाके में उठे बड़े सवाल !
बैतूल में जनजातीय कन्या छात्रावास का बड़ा मामला—500 छात्राओं का हंगामा, खाने में इल्ली… अधीक्षक कौन बनाता है ? बड़ा सवाल !
बैतूल।। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल की विधान सभा में संचालित जनजातीय कन्या छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
सोमवार सुबह जिला मुख्यालय के कन्या परिसर की 500 से ज्यादा छात्राएं स्कूल यूनिफॉर्म में ही कलेक्ट्रेट पहुंच गईं। गेट पर बैठकर छात्राओं ने खाने में इल्ली मिलने, घटिया क्वालिटी, कर्मचारियों की भारी कमी और अधीक्षक के गलत व्यवहार की खुलकर शिकायत की।
जैसे ही मामला अधिकारियों तक पहुंचा— पूरा कलेक्ट्रेट सकते में आ गया।
SDM अभिजीत सिंह भागते हुए मौके पर पहुंचे, छात्राओं की व्यथा सुनी और तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

पद बिक रहे हैं?—सबसे बड़ा खुलासा!

छात्राओं की शिकायतों के बीच एक और बड़ा मुद्दा सामने आया—
क्या छात्रावासों में अधीक्षक बनने के पद बिकते हैं?
सूत्र बताते हैं कि जिले में  ट्राइबल छात्रावासों में अधीक्षक नियुक्ति के लिए मोटी रकम की वसूली होती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह चर्चा ईमानदार छवि वाले विधायक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के क्षेत्र में भी जोर पकड़ रही है।
विधान सभा में स्थित इन महंगे छात्रावासों में आखिर किसने सेंध लगाई?
कौन तय करता है कि कौन बनेगा अधीक्षक?
कौन लेता है पैसा?
उंगलियां सीधे जनजातीय विभाग के गलियारों की ओर उठ रही हैं।

छात्राओं की पीड़ा—“भोजन में इल्ली, 500 छात्राएं… और रसोइए सिर्फ 5”

छात्राओं ने SDM को बताया—

खाने में बार-बार इल्ली मिलती है।

खाना बनाने वाले मात्र 5 लोग, उन्हें भी 2 घंटे में 500 छात्राओं का भोजन तैयार करने का दबाव।

सुविधाओं का अभाव, टीचर तक नहीं।

अधीक्षक का व्यवहार खराब।

समस्याएं महीनों से चल रही हैं, कोई सुनवाई नहीं।

मामला गंभीर देखकर SDM ने तहसीलदार पूनम साहू को तत्काल छात्रावास भेजा और गुणवत्ता जांच की रिपोर्ट मांगी।
जांच दल के पहुंचने तक भोजन की क्वालिटी “अचानक सुधर” गई—अधिकारियों ने खुद छात्राओं के साथ बैठकर खाना खाया। ऊपरी तौर पर संतोषजनक बताया।
लेकिन छात्राओं ने साफ कहा—
“जब अधिकारी आते हैं तभी खाना अच्छा मिलता है, बाकी दिन हालत खराब रहती है।”

यह पहला मामला नहीं — शाहपुर की गूंज अभी थमी नहीं

बीते महीने शाहपुर एकलव्य छात्रावास के छात्र खराब भोजन से त्रस्त होकर 36 किलोमीटर पैदल चलकर बैतूल पहुंचे थे।
उसमें प्राचार्य को हटाया गया, दो कर्मचारियों को हटाया गया।
अब उस केस की जांच भोपाल और दिल्ली स्तर पर चल रही है।
अब बैतूल का यह ताजा मामला फिर वही सवाल दोहरा रहा है—
👉 ट्राइबल छात्रावासों में सुधार क्यों नहीं हो रहा?
👉 छात्र-छात्राएं बार-बार विरोध करने को क्यों मजबूर हैं?
👉 क्या विभागीय व्यवस्था पूरी तरह भ्रष्ट हो चुकी है?
👉 अगर विधायक ईमानदार हैं तो फिर छात्रावासों में भ्रष्ट नियुक्तियां कौन कर रहा है?

सबसे बड़ा सवाल—अधीक्षक कौन बनाता है?

यही बात पूरे जिले में चर्चा का केंद्र बनी है।
जनजातीय विभाग के गलियारे इस सवाल से गूंज रहे हैं—
✔ क्या अधीक्षक की कुर्सी बोली लगाकर मिलती है?
✔ क्या राजनीतिक दबाव कहीं और से आ रहा है?
✔ या फिर विभागीय अधिकारियों की तिकड़मी चाल का खेल है?
ईमानदार विधायक की छवि के बावजूद यह कैसे हो रहा है—यह सवाल ही पूरे घटनाक्रम की जड़ बन गया है।

प्रशासन का आश्वासन—अब होगी सख्त कार्रवाई

SDM ने साफ कहा कि भोजन व्यवस्था और स्टाफ की कमी दूर की जाएगी।
जिला प्रशासन ने सुधार का भरोसा दिया है, लेकिन छात्राओं की शिकायतें बता रही हैं कि समस्या सिर्फ भोजन तक सीमित नहीं—
यह पूरी व्यवस्था की गड़बड़ी की कहानी है।

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