बैतूल की बडोरा कृषि उपज मंडी बनी किसानों की मुसीबत: लोचन मंडी के नाम से सुर्खियों में, 90% किसान हो रहे दूर
By,वामन पोटे
बैतूल की बडोरा कृषि उपज मंडी बनी किसानों की मुसीबत:
लोचन मंडी के नाम से सुर्खियों में, 90% किसान हो रहे दूर
बैतूल 26 नवंबर।।।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के विधानसभा क्षेत्र स्थित बडोरा कृषि उपज मंडी इन दिनों किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। सुविधाओं की कमी, हम्मालों की मनमानी, और मंडी में व्याप्त अव्यवस्था अब किसानों के सब्र का बांध तोड़ रही है। हालात इतने खराब हैं कि जिले के अधिकांश किसान अब हरदा जिले की खिड़किया मंडी में अपनी उपज बेचने को मजबूर हो गए हैं।
किसानों का आरोप है कि बडोरा मंडी पर गांव-गांव घूमकर खरीदी करने वाले व्यापारियों का कब्जा है, और मंडी में किसानों की सुनवाई बिल्कुल नहीं होती। किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नीलामी के बाद हम्मालों की दादागिरी सबसे बड़ी समस्या बन गई है। हम्माल बिना अतिरिक्त पैसे लिए नपाई का काम शुरू ही नहीं करते, जिसे किसान स्थानीय भाषा में ‘लोचन’ कहते हैं। इसी वजह से मंडी का नाम किसानों के बीच ‘लोचन मंडी’ पड़ गया है।
किसानों के अनुसार सिर्फ हम्माल ही नहीं, बल्कि तुलैया और व्यापारियों के मुनीम भी मनमानी कर रहे हैं। तुलाई करने वाला तुलैया अतिरिक्त पैसे लिए बिना काम आगे नहीं बढ़ाता, और व्यापारी का मुनीम भी पैसे लिए बिना तौल पर्ची पर हस्ताक्षर तक नहीं करता। ऐसी स्थिति में किसान अपनी मेहनत की उपज बेचने के लिए दिनभर परेशान होते रहते हैं।
किसानों का कहना है कि पूरी मंडी व्यवस्था कुछ चुनिंदा व्यापारियों और कर्मचारियों के इशारों पर चल रही है, जबकि किसानों की समस्याएँ कोई सुनने वाला नहीं है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और स्थानीय विधायक होने के बावजूद मंडी की दशा नहीं सुधरना ग्रामीणों में रोष का विषय बना हुआ है।
अव्यवस्था और वसूली के माहौल से तंग आकर करीब 90 प्रतिशत किसान अब बडोरा मंडी से दूरी बनाते जा रहे हैं और दूसरी मंडियों का रुख कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में बडोरा मंडी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।
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