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लोचन मंडी बडोरा कृषि उपज मंडी में बिचौलियों का दबदबा: किसानों को न्याय दिलाने BJP प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल से बढ़ी उम्मीद

By,वामन पोटे

लोचन मंडी  (2)
बडोरा कृषि उपज मंडी में बिचौलियों का दबदबा:
किसानों को न्याय दिलाने BJP प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल से बढ़ी उम्मीद
बैतूल 28 नवंबर।।।
बैतूल जिले की बडोरा कृषि उपज मंडी किसानों के लिए सुविधाओं का केंद्र बनने के बजाय अब उनकी सबसे बड़ी परेशानी बनती जा रही है। मंडी में बिचौलियों का इस कदर दबदबा बढ़ गया है कि गांव–गांव से आने वाले लगभग 90% किसान अब इस मंडी से दूरी बनाने लगे हैं। कम दाम, कटौती वाली तौल और बड़े व्यापारियों से मिलीभगत ने मंडी की साख पूरी तरह गिरा दी है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि मंडी में खुलेआम चल रहा बिचौलियों का खेल उनकी मेहनत की कमाई को निगल रहा है। बिचौलिया गिरोह न केवल नीलामी  के दौरान हेराफेरी करता है, बल्कि बड़े व्यापारियों से सांठगांठ कर किसानों की उपज की बोली भी कम लगवाता है। किसान जैसे ही अपनी उपज बेचने पहुंचते हैं, ये बिचौलिए सिर खुजलाकर या इशारों में कम दाम की बोली लगाने का संकेत दे देते हैं। इससे किसानों को उनकी साफ-सुथरी और उच्च गुणवत्ता वाली उपज के भी उचित दाम नहीं मिल पाते।
मंडी की अव्यवस्थित व्यवस्था, नियंत्रणहीन व्यवहार और पारदर्शिता की कमी से किसान लगातार निराश हो रहे हैं। कई किसानों ने आरोप लगाया कि मंडी प्रशासन की उदासीनता से बिचौलियों का हठ और बढ़ गया है। इस पूरी स्थिति ने बडोरा मंडी को ‘लोचन मंडी’ के रूप में बदनाम कर दिया है, जहाँ किसान शोषण का शिकार बन रहे हैं।
अब किसानों की उम्मीदें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की ओर बढ़ गई हैं। किसान मांग कर रहे हैं कि वे हस्तक्षेप कर मंडी की व्यवस्था को सुधारें तथा बिचौलियों पर प्रभावी कार्रवाई करवाएं। किसान मानते हैं कि यदि प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व गंभीरता से कदम उठाए तो मंडी फिर से पारदर्शी, सुरक्षित और किसान हितैषी बन सकती है।
किसानों की यह पुकार अब एक निर्णायक सुधार की ओर संकेत कर रही है—और उम्मीद है कि जल्द ही बडोरा कृषि उपज मंडी अपनी पुरानी विश्वसनीयता वापस हासिल करेगी।
मंडी सचिव व्यापारियों के पक्ष में, जुर्माना लगाने से बचते हुए

नियम के अनुसार 24 घंटे में बोरे नहीं उठाने पर प्रति बोरा प्रति दिन 10 रुपए जुर्माना लगना चाहिए, लेकिन बैतूल मंडी में 40–50 हजार बोरे पड़े होने के बावजूद एक भी व्यापारी पर कार्रवाई नहीं की गई।
जब मंडी सचिव सुरेश कुमार परते से पूछा गया कि जुर्माना क्यों नहीं, तो उन्होंने कहा—
“जुर्माना लगाया तो व्यापारी पैसा किसानों से ही वसूलेंगे और दाम 30–40 रुपए क्विंटल कम कर देंगे। इससे किसानों का नुकसान होगा।”
उनकी यह दलील व्यापारियों की सुरक्षा कवच बन गई है। परिणाम—व्यापारी और बेखौफ, किसान और परेशान।

कलेक्टर का निरीक्षण, नाराजगी और चेतावनी

कलेक्टर सूर्यवंशी मंडी पहुंचे। उन्होंने जहां-तहां पड़े बोरे, खुले में किसानों की उपज और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लाइन देखकर नाराजगी जताई। उन्होंने व्यापारियों को अधिक ट्रक लगाकर पहले शेड के आसपास और फिर पूरे परिसर से मक्का उठाने के निर्देश दिए। साथ ही वाहन प्रवेश-निकास की व्यवस्था दुरुस्त करने के आदेश भी दिए।
फिर भी शाम तक न तो ट्रकों की संख्या बढ़ी और न ही बोरे हटे। कलेक्टर के निर्देश हवा में उड़ते दिखे।

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