देशभर में स्लीपर बसों पर बड़ी कार्रवाई: मानवाधिकार आयोग ने सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली सभी बसें तुरंत सड़कों से हटाने का आदेश दिया
By,वामन पोटे
देशभर में स्लीपर बसों पर बड़ी कार्रवाई: मानवाधिकार आयोग ने सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली सभी बसें तुरंत सड़कों से हटाने का आदेश दिया
देशभर में लगातार हो रहे स्लीपर बस हादसों और बढ़ती जनहानि को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि वे सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली स्लीपर बसों को तुरंत सड़कों से हटाएं। आगामी दिनों में देश में स्लीपर बसों की संख्या या तो काफी घटेगी या फिर सिर्फ वे ही बसें चल सकेंगी जो तय मानकों का पूरी तरह पालन करती होंगी।
NHRC के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि स्लीपर बसों में ओवरलोडिंग, खराब रखरखाव, तेज गति और निगरानी की कमी के कारण होने वाली दुर्घटनाएं सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद–21 यानी जीवन के अधिकार का उल्लंघन हैं। आयोग ने 2024-25 के दौरान स्लीपर कोच बसों के लिए कई सुरक्षा निर्देश जारी किए थे, जिनमें सीट बेल्ट और CCTV अनिवार्य करना, ड्राइवरों की ट्रेनिंग, और ओवरलोडिंग पर सख्त मॉनिटरिंग शामिल है। इसके बावजूद राज्यों में लापरवाही बनी रहने के कारण आयोग को कठोर निर्देश जारी करने पड़े।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा 2024 में लागू किए गए AIS-118 सुरक्षा मानकों को भी कई बस ऑपरेटर लागू नहीं कर रहे थे। 2025 में अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत स्लीपर बस हादसों में हो चुकी है, जिसके बाद NHRC ने राज्यों को नियमों का सख्त पालन कराने का जिम्मा सौंपा है।
हाल के दो बड़े हादसों ने बढ़ाई चिंता
5 नवंबर 2025 को तेलंगाना के चेवेल्ला में स्लीपर बस हादसे में 19 लोगों की मौत हुई। राज्य मानवाधिकार आयोग ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए NHAI, RTC और पुलिस सहित छह विभागों से रिपोर्ट तलब की और सभी रूटों पर सेफ्टी ऑडिट के आदेश दिए।
इसके पहले 28 अक्टूबर 2025 को राजस्थान के मनोहरपुर में स्लीपर बस में लगी आग से 8 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में पाया गया कि बस सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरती थी। इसके बाद राज्य मानवाधिकार आयोग ने कंडम बसों की तत्काल जब्ती, CNG किट और फायर सेफ्टी की जांच व रूट परमिशन की कठोर जांच के निर्देश दिए।
NHRC का यह आदेश अब देशभर में स्लीपर बस सेवाओं पर बड़ा असर डालने वाला है। सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को अब त्वरित कार्रवाई करना अनिवार्य होगा।
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