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⭐ “शिप्रा तट पर  सामूहिक विवाह: मुख्यमंत्री के सुपुत्र ने भी ग्रहस्थ जीवन में प्रवेश किया, 22 जोड़े वैदिक मंत्रों के साथ बने जीवनसंगिनी” ⭐

By,वामन पोटे

“शिप्रा तट पर  सामूहिक विवाह: मुख्यमंत्री के सुपुत्र ने भी ग्रहस्थ जीवन में प्रवेश किया, 22 जोड़े वैदिक मंत्रों के साथ बने जीवनसंगिनी”

उज्जैन, 30 नवंबर।
पूण्य सलिला मां शिप्रा के पावन तट पर रविवार को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर एक अद्भुत और भव्य सामूहिक विवाह समारोह आयोजित हुआ। सनातन संस्कृति की पवित्र परंपराओं, वैदिक मंत्रोच्चार और संतजनों के आशीर्वाद से सम्पन्न इस महाआयोजन में कुल 22 जोड़े पवित्र वैवाहिक बंधन में बंधे।
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सुपुत्र डॉ. अभिमन्यु यादव भी डॉ. इशिता पटेल यादव के साथ परिणय सूत्र में बंधे। इससे समारोह का गौरव और भी बढ़ गया। मंच से उपस्थित सभी संतों और गणमान्यों ने नवयुगल सहित सभी 22 जोड़ों को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विवाह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भारतीय जीवन संस्कृति का महत्वपूर्ण संस्कार है, जो दो नहीं बल्कि दो कुलों को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह जैसी परंपराएं सामाजिक समरसता को मजबूत बनाती हैं और आडंबरों व फिजूलखर्ची को कम करने का प्रेरक माध्यम हैं।
समारोह में राज्यपाल श्री मंगू भाई पटेल, कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत, केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा व राजेंद्र शुक्ल सहित अनेक वरिष्ठ नेता और संतजनों ने शिरकत की।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत हरिगिरी महाराज, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री और योगगुरु बाबा रामदेव समेत कई संतों ने प्रत्येक नवविवाहित जोड़े को एक-एक लाख रुपये देने की घोषणा की। संतजनों ने इस आयोजन को “सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति का अनुपम उदाहरण” बताया।
विवाह समारोह में कन्याओं को कन्यादान उपहार सामग्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव के परिवार द्वारा प्रदान की गई। सामान्य, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और जनजाति—सभी वर्गों के वर-वधु शामिल होकर इस आयोजन को सामाजिक समानता का सुंदर संदेश देते दिखे।
कार्यक्रम के दौरान “ऐरी सखी मंगल गाओ री” जैसे मधुर गीतों की गुंज, शिप्रा तट की पवित्रता, वैदिक मंत्रोच्चार और वरमाला के शुभ क्षणों ने वातावरण को उल्लास और मंगल भावनाओं से भर दिया। पूरा आयोजन आनंद, आशीर्वाद और आध्यात्मिकता से ओतप्रोत रहा।

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