मां ने गिरवी रखे गहने, वहीं से चमकी किस्मत: विश्व विजेता बनी बैतूल की दुर्गा येवले
बैतूल।। ब्लाइंड टी-20 क्रिकेट विश्व कप जीतने वाली भारतीय महिला टीम की विकेट कीपर बल्लेबाज दुर्गा येवले का शुक्रवार को बैतूल पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। भैंसदेही ब्लॉक के राक्सी गांव की साधारण किसान परिवार में जन्मीं दुर्गा ने संघर्षों के बीच पढ़ाई और खेल दोनों में अपनी राह बनाई।
दुर्गा ने शुरुआती शिक्षा गांव में पूरी की और फिर बैतूल तथा पाढर के ब्लाइंड स्कूल में पढ़ाई जारी रखी। आगे की उच्च शिक्षा के लिए माता-पिता ने उन्हें इंदौर भेजने का फैसला लिया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद मां ने अपने जेवर तक गिरवी रखकर बेटी के सपनों को उड़ान दी। दुर्गा बताती हैं कि इंदौर पहुंचना ही उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। वर्ष 2021 में आयोजित कैंप में उनका चयन जिला स्तरीय टीम के लिए हुआ और यहीं से उनकी क्रिकेट यात्रा शुरू हो गई। जिला स्तर से वे नेशनल स्तर तक पहुंचीं और फिर विश्व कप टीम का हिस्सा बनीं।
दुर्गा के अनुसार, टीम में विकेटकीपर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। “मुझे बी1 और बी2 प्लेयर्स को लगातार बताना होता है कि गेंद किस दिशा में जा रही है। विकेटकीपिंग में मैं अच्छा प्रदर्शन कर रही थी, इसलिए कई मैचों में मेरी बैटिंग की बारी ही नहीं आई,” उन्होंने कहा।
विश्व कप के दौरान भारतीय टीम ने सातों मैच जीतकर खिताब हासिल किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को याद करते हुए दुर्गा ने कहा कि उन्हें ऐसा लगा मानो वे अपने पिता से मिल रही हों।
दुर्गा अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के त्याग और समर्थन को देती हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर पढ़ने आई थीं, लेकिन पढ़ाई के साथ क्रिकेट ने उन्हें नए सपने दे दिए। आज उनकी उपलब्धि से पूरा बैतूल गर्व महसूस कर रहा है।
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