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अमृत मंथन: जनता पूछ रही है— “क्या बैतूल में अपराधियों की सरकार चल रही है ?” भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के गृह जिले में आखिर कानून व्यवस्था लचर क्यों ? शांति का टापू बैतूल… अब अपराधियों का आरामगाह! खाकी की वर्दी में लग रहे कई पैबंद, नशे ने बिगाड़ा हालात, युवा पीढ़ी गुस्सैल

By,वामन पोटे

अमृत मंथन:
जनता पूछ रही है—
“क्या बैतूल में अपराधियों की सरकार चल रही है ?”
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के गृह जिले में आखिर कानून व्यवस्था लचर क्यों ?
शांति का टापू बैतूल… अब अपराधियों का आरामगाह!
खाकी की वर्दी में लग रहे कई पैबंद, नशे ने बिगाड़ा हालात, युवा पीढ़ी गुस्सैल

बैतूल।। कभी शांत, सभ्य और सुरक्षित माने जाने वाले बैतूल को आज अपराध के तापमान की लपटें झुलसा रही हैं। “शांति का टापू” कहे जाने वाले इस जिले में पिछले कुछ दिनों की चार घटनाएं ही बता रही हैं कि कानून व्यवस्था पूरी तरह ICU में है। पुलिस की कार्रवाई सांप निकलने के बाद लकीर पीटने जैसी, अपराधियों के हौसले आसमान पर और जनता का भरोसा जमीन पर… यही बैतूल का वर्तमान सच है।
सवाल बड़ा है—केंद्रीय राज्यमंत्री, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सहित जिले के 5 भाजपा विधायकों की मौजूदगी के बावजूद जिले में अपराधियों को इतनी खुली छूट कैसे? राजनीतिक रसूख की चमक तो है, लेकिन कानून का डर कहीं गुम हो गया है।

चार घटनाएं, एक सच्चाई — कानून व्यवस्था फेल!

1. किराना व्यापारी को बेसबॉल बैट से बेहोश होने तक पीटा

पान की दुकान पर खड़े व्यापारी पर 4–5 बदमाश टूट पड़े। बेसबॉल बैट से इतनी मार कि वह वहीं गिरकर बेहोश हो गया। पुलिस बाद में पहुंची—जैसे हर बार।

2. जानी ढाबा के पास चाकूबाजी—2 घायल, 1 गंभीर हालत में भोपाल रेफर

दिनदहाड़े चाकू चलने की घटना ने साबित कर दिया कि बदमाशों में पुलिस का खौफ बिल्कुल खत्म हो चुका है।

3. पाढर में ढाबा संचालक, पत्नी, साला व पूर्व सरपंच पर हमला

बिल को लेकर बहस और फिर रॉड, होस पाइप और जलती लकड़ी से हमला!
आरोपी अभी भी फरार। इस घटना पर आदिवासी समाज ने 3 घंटे चक्काजाम कर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

4. सदर क्षेत्र में फर्शी विवाद—होस पाइप से बेरहमी से पिटाई, वीडियो वायरल

5 हजार रुपये जमानत के नाम पर ऐंठे और पैसे मांगने पर युवक को बेदम कर दिया। दोनों आरोपी फरार।
इन चार घटनाओं ने साफ कर दिया है—बैतूल में कानून व्यवस्था सिर्फ कागजों में बची है, जमीन पर नहीं।

नशा ही जड़ बना विवादों का… अपराध की खाद बन रहा नशा

जिले में खुला नशे का व्यापार कानून व्यवस्था की सबसे बड़ी दुश्मन बन चुका है।
हर ढाबे, हर चौराहे, हर गली में अवैध शराब, नशे का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
सबको पता है—पुलिस को भी।
लेकिन कार्रवाई?
यदा-कदा, दिखावटी, और अक्सर देर से।

युवा पीढ़ी गुस्सैल… हथियारों और नशे के सहारे बढ़ रहा क्राइम

बैतूल की युवा पीढ़ी तेजी से हिंसक और गुस्सैल होती जा रही है।
छोटी-छोटी बातों पर झगड़े, चाकू, रॉड, शराब और नशे का उपयोग…
सोशल मीडिया की “हीरोइज्म” और गैंग बनाने की मानसिकता अपराध की गति को और बढ़ा रही है।

खाकी की वर्दी में कई पैबंद—अंदरूनी सिस्टम बीमार

5–10 साल से एक ही थाने में जमे निचले स्तर के कर्मचारी

हर नई वारदात पर सिर्फ दारोगा बदलने की रस्म

अवैध धंधों पर पुलिस–आबकारी की कथित मिलीभगत

अफसरों पर राजनैतिक दबाव
इन सबने पुलिस की कार्यशैली को खोखला कर दिया है।

खाकी की वर्दी अब जवाबदेही से ज्यादा बोझ लगने लगी है।

जनप्रतिनिधियों की चुप्पी—सबसे बड़ा सवाल

केंद्रीय राज्यमंत्री
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष
भाजपा विधायक
इतने बड़े “पॉलिटिकल पावर हब” के बावजूद
कानून व्यवस्था इतनी बदहाल क्यों?
जनता पूछ रही है—
“क्या बैतूल में अपराधियों की सरकार चल रही है?”

अब जरूरत है—गंभीरता की, ईमानदारी की, और पुलिस सुधार की

नशा और हथियार का नेटवर्क तोड़ने की

थानों में जमे कर्मचारियों का बड़े पैमाने पर तबादला

आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी

अपराधियों में पुलिस का खौफ वापस लाने की

जनप्रतिनिधियों द्वारा पुलिस प्रशासन पर सख्ती की

बैतूल को बचाना है—
तो कानून व्यवस्था को ऑक्सीजन देना जरूरी है।
शांति का टापू अब अपराध की आग में न झुलसे…
इसके लिए सरकार, पुलिस और समाज सभी को जागना होगा।

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