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“नन्ही आवाज़ का बड़ा विरोध” स्कूल वैन नहीं आई तो कक्षा पाँच की बच्ची ने बैठकर रोक दिया रास्ता बैतूल में आरटीई छात्रा का मासूम गुस्सा बना चर्चा का विषय

By,वामन पोटे

“नन्ही आवाज़ का बड़ा विरोध”
स्कूल वैन नहीं आई तो कक्षा पाँच की बच्ची ने बैठकर रोक दिया रास्ता
बैतूल में आरटीई छात्रा का मासूम गुस्सा बना चर्चा का विषय
बैतूल 20 दिसंबर ।।
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने राहगीरों को चौंका दिया और समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया। चिचोली क्षेत्र में पढ़ने वाली कक्षा पाँच की एक नन्ही छात्रा ने स्कूल वैन नहीं आने पर सड़क पर बैठकर जाम लगा दिया। यह कोई शरारत नहीं थी, बल्कि एक मासूम मन का ऐसा विरोध था, जिसमें पढ़ाई छूटने का डर और अपमान की पीड़ा साफ झलक रही थी।
गांव चुनाहजूरी निवासी सुरभि यादव एक निजी स्कूल में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत पढ़ रही है। बीते कुछ वर्षों से वह स्कूल वैन से ही स्कूल आती-जाती थी, लेकिन परिजनों द्वारा पिछले दो वर्षों से वैन शुल्क जमा नहीं किए जाने के कारण स्कूल प्रबंधन ने परिवहन सुविधा बंद कर दी।
शनिवार सुबह जब तय समय पर स्कूल वैन सुरभि को लेने नहीं पहुंची, तो बच्ची टूट गई। गुस्से और बेबसी के बीच उसने वही किया, जो शायद कोई बड़ा भी सोचने से पहले डर जाए—वह सड़क के बीचों-बीच बैठ गई और वैन को आगे बढ़ने से रोक दिया।
कुछ ही देर में सड़क पर वाहनों की कतारें लग गईं, यातायात प्रभावित हुआ और लोग हैरानी से उस नन्ही बच्ची को देखते रह गए, जो अपनी पढ़ाई के अधिकार के लिए खामोशी से लड़ रही थी।
सूचना मिलते ही चिचोली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने बच्ची को प्यार से समझाया, लोगों को शांत किया और हालात को संभाला। काफी मशक्कत के बाद सुरभि सड़क से उठी और यातायात फिर से सामान्य हो सका।
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या आरटीई के तहत पढ़ने वाले बच्चों से जुड़ी सुविधाओं में संवेदनशीलता नहीं होनी चाहिए?
क्या आर्थिक तंगी की सजा बच्चों को मिलनी चाहिए?
और क्या शिक्षा व्यवस्था बच्चों पर बढ़ते मानसिक दबाव को नजरअंदाज कर रही है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना एक मासूम की मजबूरी और जागरूकता दोनों का प्रतीक है। वहीं, स्कूल प्रबंधन का तर्क है कि वैन सेवा शुल्क आधारित है, और लंबे समय से भुगतान न होने के कारण सेवा बंद करना मजबूरी थी।
लेकिन सवाल अब भी कायम है—
क्या पढ़ाई तक पहुंचने के रास्ते इतने मुश्किल होने चाहिए कि एक बच्ची को सड़क पर बैठकर विरोध करना पड़े?

 

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