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व्यापारी जीतेंगे और किसान हारेंगे **किसान पिस रहे, व्यापारी सुरक्षित! भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात के बाद जुर्माना घटाने की तैयारी जिले भर के किसानों में आक्रोश — बोले: नेताओं को व्यापारियों की चिंता, किसान बेबस**

By,वामन राव पोटे

व्यापारी जीतेंगे और किसान हारेंगे

**किसान पिस रहे, व्यापारी सुरक्षित!
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात के बाद जुर्माना घटाने की तैयारी
जिले भर के किसानों में आक्रोश — बोले: नेताओं को व्यापारियों की चिंता, किसान बेबस**
बैतूल02 जनवरी।।
कृषि उपज मंडी किसानों के हित के लिए बनी थी, लेकिन बैतूल में यह मंडी अब व्यापारियों की ढाल बनती जा रही है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि किसानों की तकलीफ, अव्यवस्था और शोषण पर कोई सुनवाई नहीं, जबकि व्यापारियों के जुर्माने घटाने के लिए पूरा तंत्र हरकत में आ गया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि मंडी के व्यापारी हाल ही में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात कर चुके हैं, और उसके ठीक बाद अब एसडीएम द्वारा लगाए गए 5.83 लाख रुपये के जुर्माने को 75 प्रतिशत तक कम करने की तैयारी की जा रही है। यह संयोग है या सत्ता-संरक्षण, इस सवाल ने जिले भर के किसानों को झकझोर कर रख दिया है।
नेताओं के दरबार में व्यापारी, कतार में खड़े किसान
जिले के किसानों का कहना है कि जब व्यापारी नेताओं से मिलते हैं तो प्रशासन नरम पड़ जाता है, लेकिन जब किसान अपनी पीड़ा लेकर आते हैं तो उन्हें घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है। मंडी परिसर में हजारों बोरे मक्का और अन्य उपज डंप है, रास्ते जाम हैं, नीलामी प्रभावित हो रही है, लेकिन मंडी प्रबंधन आंख मूंदे बैठा है।
एसडीएम डॉ. अभिजीत सिंह ने 29 दिसंबर को आकस्मिक निरीक्षण कर 12 व्यापारियों पर 11,300 बोरे उपज रखने पर 5.83 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। यह कार्रवाई किसानों को राहत देने वाली मानी जा रही थी, लेकिन तीन दिन बाद भी न नोटिस थमाए गए, न वसूली शुरू हुई। अब उल्टा जुर्माना घटाने की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है।
मंडी प्रबंधन की दोहरी नीति
सूत्र बताते हैं कि मंडी प्रबंधन सिर्फ शेड में रखे बोरों पर जुर्माना लगाने का तर्क गढ़ रहा है और शेड के बाहर मंडी परिसर में रखे हजारों बोरों को जुर्माने से मुक्त करने की तैयारी है। यदि ऐसा हुआ तो 5.83 लाख का जुर्माना घटकर महज 1.25 से 1.50 लाख रुपये रह जाएगा।
यह वही मंडी है जहां नियमों के मुताबिक 24 घंटे में उपज नहीं उठाने पर प्रति बोरा प्रतिदिन जुर्माना लगना चाहिए, लेकिन वर्षों से व्यापारियों पर यह नियम लागू ही नहीं किया गया। नतीजा यह है कि व्यापारी बेखौफ हैं और किसान बेबस।
किसानों का सवाल — कानून सिर्फ हमारे लिए?
किसानों का सीधा सवाल है कि
क्या कानून सिर्फ किसानों के लिए है?
क्या नेताओं से मुलाकात करना जुर्माने से बचने का लाइसेंस बन गया है?
क्या मंडी प्रशासन व्यापारियों का एजेंट बन चुका है?
किसानों का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण के चलते व्यापारी मनमानी कर रहे हैं, जबकि किसान अपनी ही उपज बेचने के लिए दर-दर भटक रहा है।
अब देखना यह है कि प्रशासन किसानों के हित में सख्ती दिखाता है या फिर एक बार फिर व्यापारी जीतेंगे और किसान हारेंगे।

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