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बैतूल के मोहन नागर को पद्मश्री: जिले के लिए गौरव का क्षण

By,वामन पोटे

बैतूल के मोहन नागर को पद्मश्री: जिले के लिए गौरव का क्षण
बैतूल।। साल 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा के साथ ही मध्यप्रदेश और विशेष रूप से बैतूल जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है। मप्र जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता मोहन नागर को पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित किया गया है। राजधानी भोपाल पहुंचे नागर ने कहा कि यह उनके लिए नहीं बल्कि पूरे बैतूल जिले के लिए गर्व का पल है कि भारत सरकार के सम्मान में जिले का नाम शामिल हुआ है।
मोहन नागर ने बताया कि उन्होंने बैतूल जिले में पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन को लेकर व्यापक अभियान चलाया है। जिले की 75 पहाड़ियों को हरा-भरा बनाने का लक्ष्य रखा गया था, जिनमें से अब तक 16 पहाड़ियों पर हरियाली लौट चुकी है। वाचा गांव में सामूहिक प्रयासों से समाज के लिए किए गए कार्य पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिस समय उन्हें पद्मश्री की सूचना मिली, उस समय वे नदियों के घाटों की स्वच्छता अभियान में लगे हुए थे।
उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ वर्ष से वे मध्यप्रदेश की पंचायतों में जल संरक्षण पर लगातार कार्य कर रहे हैं। बैतूल जिले में शिक्षा और जल संरक्षण का कार्य उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण रहा, क्योंकि वहां पानी ठहरता नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने सैकड़ों गांवों तक पैदल पहुंचकर लोगों को जोड़ा और समाज के सहयोग से कठिन लक्ष्यों को हासिल किया।
इसी कड़ी में मध्यप्रदेश की चार हस्तियों को इस वर्ष पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। भोपाल के वरिष्ठ लेखक और पत्रकार कैलाश चंद्र पंत को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में, सागर के भगवानदास रैकवार को खेल और पारंपरिक मार्शल आर्ट संरक्षण के लिए, मोहन नागर को समाज सेवा के लिए तथा भोपाल के पुरातत्वविद् नारायण व्यास को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।
कैलाश चंद्र पंत के घर पर पुरस्कार की घोषणा के बाद परिवार में उत्सव का माहौल रहा और मिठाइयां बांटी गईं। वहीं भगवानदास रैकवार ने दशकों से युवाओं को राई नृत्य कला और बुंदेली युद्ध कला सिखाकर इन परंपराओं को जीवित रखने में अहम भूमिका निभाई है। नारायण व्यास ने भारतीय सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और अनुसंधान में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
मोहन नागर की उपलब्धि को लेकर बैतूल जिले में विशेष उत्साह है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इसे जिले की मेहनत और सामूहिक प्रयासों की जीत बताया है। यह सम्मान न केवल मोहन नागर के कार्यों की पहचान है, बल्कि पूरे बैतूल के लिए प्रेरणा और गौरव का विषय भी है।

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