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देश मे एक हजार दाल मिल प्रारम्भ होंगी शिवराज सिंह चौहान खेतों से उठी आवाज़, दिल्ली तक गूंजा आत्मनिर्भर दलहन भारत

By,वामन पोटे

देश मे एक हजार दाल मिल प्रारम्भ होंगी
शिवराज सिंह चौहान
खेतों से उठी आवाज़, दिल्ली तक गूंजा आत्मनिर्भर दलहन भारत

सीहोर 7 फरवरी।।सीहोर जिले के अमलाहा स्थित इकार्डा परिसर में आज ऐसा दृश्य देखने को मिला, जो भारतीय कृषि के इतिहास में नई दिशा देने वाला सिद्ध हो सकता है। देश के नौ राज्यों के कृषि मंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, वैज्ञानिक, नीति विशेषज्ञ और प्रगतिशील किसान एक मंच पर जुटे। यह सम्मेलन किसी कंक्रीट के सभागार में नहीं, बल्कि खेतों के बीच आयोजित हुआ-जहाँ मिट्टी की खुशबू, फसलों की हरियाली और किसानों की उम्मीदें मौजूद थीं। यही कारण था कि इसे केवल सम्मेलन नहीं, बल्कि भविष्य की कृषि नीति का मंथन कहा गया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ सीएम ने आधुनिक प्रयोगशालाओं और दलहन मिशन पोर्टल का शुभारंभ भी किया।

सम्मेलन की सबसे बड़ी घोषणा रही-‘बीज ग्राम’ योजना।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विदेशों से दाल मंगाना गर्व नहीं, चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब समय आ गया है कि भारत दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि दुनिया का नेतृत्व करने वाला देश बने। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने 27 देशों से समझौते किए, लेकिन किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन इसी सोच का परिणाम है।  शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब किसानों को उन्नत बीजों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। गांव-गांव में बीज उत्पादन होगा, जिससे लागत घटेगी और गुणवत्ता बढ़ेगी। बीज से लेकर बाजार तक सरकार किसानों की चिंता करेगी। इसके साथ ही आदर्श खेती करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 10 हजार रुपये की सहायता देने का भी ऐलान किया गया, जिससे किसानों में नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि देशभर में 1000 नई दाल मिलें स्थापित की जाएंगी, जिनमें से 55 मध्य प्रदेश में लगेंगी। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि तुअर 8000 रुपए प्रति क्विंटल, उड़द 7800 रुपए, चना 5875 रुपए और मसूर 7000 रुपए प्रति क्विंटल खरीदी जाएगी। “बीज से लेकर बाजार तक” किसानों की चिंता सरकार करेगी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन के बाद सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ मंथन कर दलहन उत्पादन बढ़ाने का राष्ट्रीय रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस मिशन के तहत मध्य प्रदेश को 354 करोड़ रुपए की राशि दी जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि असली आनंद खेत, किसान और मिट्टी से जुड़कर काम करने में है, और सरकार किसानों की आय बढ़ाने तथा देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

कृषि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा भारत : मुख्यमंत्री

अमलाहा में आयोजित दलहन क्षेत्र के राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय परंपरा में अन्न और दाल का विशेष महत्व है। हमारी थाली में परोसा गया अन्न ही हमारे लिए देवतुल्य है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री का अभिनंदन करते हुए कहा कि किसान, युवा, गरीब और नारी सशक्तिकरण के लिए निरंतर योजनाएं चलाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की कृषि परंपरा प्राचीन और समृद्ध रही है। प्रदेश में स्थापित अनुसंधान केंद्र किसानों के हित में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनें, क्योंकि देश में मांग के अनुपात में उत्पादन अभी भी चुनौती बना हुआ है। डॉ. यादव ने कहा कि दलहन-तिलहन मिशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश सरकार दो कदम आगे रहकर कार्य करेगी। उन्होंने बताया कि भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को डेढ़ हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि सीधे खातों में पहुंचाई गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गर्व के साथ कहा कि मध्य प्रदेश आज भी देश में दलहन उत्पादन में नंबर वन है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि क्षेत्रफल में कमी एक गंभीर चिंता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार, केंद्र से दो कदम आगे रहकर दलहन-तिलहन मिशन को सफल बनाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि सिंचाई क्षेत्र को 7.5 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 44 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाया गया है, जिससे किसानों की जिंदगी बदली है।

प्रयोगशाला से खेत तक की दूरी खत्म

अमलाहा में प्लांट जीनोमिक्स, टिश्यू कल्चर, प्लांट ब्रीडिंग और प्लांट पैथोलॉजी जैसी अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का लोकार्पण किया गया। केंद्रीय और राज्य अतिथियों ने प्रशासनिक भवन और किसान प्रशिक्षण केंद्र का भी उद्घाटन किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि इन प्रयोगशालाओं में मौसम और रोग प्रतिरोधी बीजों पर अनुसंधान होगा, जिससे दलहन की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आय सुरक्षित होगी। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले 5 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया और उन्नत बीज किट प्रदान की गई। साथ ही पल्सेस मिशन पोर्टल लॉन्च किया गया, जिससे डिजिटल माध्यम से किसानों को तकनीकी जानकारी, योजनाएं और सहायता उपलब्ध होगी। तकनीकी सत्रों में रोग प्रबंधन, बीज संवर्धन और यंत्रीकरण पर गहन चर्चा हुई।

अमलाहा से उठा भविष्य का उजास

सम्मेलन के समापन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अन्न और दाल भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। उन्होंने अन्य राज्यों के मंत्रियों से आग्रह किया कि वे मध्य प्रदेश की कृषि उपलब्धियों को देखें और साझा प्रयास करें। अमलाहा की धरती से उठा यह संकल्प केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, विज्ञान की शक्ति और नीति की प्रतिबद्धता से भारत को दलहन आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम है।

 

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