छोटा महादेव भोपाली में उमड़ा आस्था का सैलाब: एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, पहाड़ी दरार के कारण गुफा प्रवेश बंद
By,वामन पोटे
छोटा महादेव भोपाली में उमड़ा आस्था का सैलाब: एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, पहाड़ी दरार के कारण गुफा प्रवेश बंद

बैतूल 15 फरवरी ।। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जिला मुख्यालय बैतूल से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल छोटा महादेव भोपाली में इस वर्ष आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। अनुमान के मुताबिक एक लाख से अधिक श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए यहां पहुंचे। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।
मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा महाराष्ट्र, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम (होशंगाबाद) और आसपास के आदिवासी अंचलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे। कई श्रद्धालु रात में ही पहुंच गए थे, जबकि हजारों लोग सुबह से पैदल और वाहनों से मंदिर की ओर बढ़ते रहे। प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे, जिससे दर्शन की व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके।
देनवा नदी में स्नान के बाद किए दर्शन
छोटा महादेव में दर्शन की परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं ने सबसे पहले पवित्र देनवा नदी में स्नान किया। ठंडे पानी के बावजूद श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। नदी में स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने नदी तट पर पूजा-अर्चना की और फिर पहाड़ी पर स्थित मंदिर की ओर प्रस्थान किया।
श्रद्धालुओं का मानना है कि देनवा नदी में स्नान करने के बाद भगवान शिव के दर्शन करने से सभी पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कई श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचे और भगवान शिव की भक्ति में लीन नजर आए। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित हर वर्ग के लोग इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए।
पहाड़ी में दरार के कारण गुफा प्रवेश पर रोक
छोटा महादेव की सबसे बड़ी विशेषता पहाड़ी के भीतर स्थित प्राकृतिक गुफा और उसमें स्थापित स्वयंभू शिवलिंग है। लेकिन पहाड़ी में आई बड़ी दरार के कारण लगातार तीसरे वर्ष श्रद्धालुओं के गुफा में प्रवेश पर रोक लगाई गई है। यह दरार पहली बार वर्ष 2014 में दिखाई दी थी, जो समय के साथ और चौड़ी हो गई है।
भूवैज्ञानिकों के अनुसार यह क्षेत्र चूना-पत्थर की चट्टानों से बना है, जो बारिश और प्राकृतिक क्षरण के कारण कमजोर हो सकती हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने गुफा में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रखा है।
एलईडी स्क्रीन से हो रहे भगवान शिव के दर्शन
गुफा में प्रवेश प्रतिबंधित होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई। प्रशासन ने गुफा के अंदर प्राकृतिक शिवलिंग के सामने विशेष कैमरे लगाए हैं। इन कैमरों की लाइव तस्वीरें पहाड़ी के नीचे बड़ी एलईडी स्क्रीन पर दिखाई जा रही हैं।
श्रद्धालु एलईडी स्क्रीन के माध्यम से भगवान शिव के दर्शन कर रहे हैं और वहीं खड़े होकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। जैसे ही स्क्रीन पर शिवलिंग के दर्शन होते हैं, पूरा परिसर “बम-बम भोले” और “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठता है। श्रद्धालुओं ने इसे प्रशासन की सराहनीय पहल बताया।
अंबा माई मंदिर और अन्य स्थलों पर भी पूजा
मुख्य गुफा के अलावा श्रद्धालुओं ने अंबा माई मंदिर और पहाड़ी की सीढ़ियों के पास स्थित शिवलिंग पर भी पूजा-अर्चना की। कई श्रद्धालुओं ने नारियल, बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित कर भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना की।
मंदिर परिसर में दस दिवसीय मेला भी प्रारंभ हो गया है, जिसमें दूर-दूर से व्यापारी और श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मेले में धार्मिक सामग्री, प्रसाद, खिलौने और पारंपरिक वस्तुओं की दुकानें लगी हैं।
सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। पुलिस बल, राजस्व विभाग और जनपद पंचायत के अधिकारी लगातार व्यवस्था पर नजर रखे हुए थे। पार्किंग, पेयजल, चिकित्सा और यातायात की विशेष व्यवस्था की गई थी।
जनपद सीईओ तीजा पवार ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पहाड़ी की दरार को देखते हुए गुफा में प्रवेश प्रतिबंधित रखा गया है, लेकिन श्रद्धालुओं को एलईडी स्क्रीन के माध्यम से दर्शन की सुविधा दी गई है।
धार्मिक मान्यता और ऐतिहासिक महत्व
छोटा महादेव भोपाली को लेकर धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव ने भस्मासुर से बचने के लिए इसी गुफा में शरण ली थी। यहां स्थित प्राकृतिक शिवलिंग अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी माना जाता है। पत्थरों पर नंदी के खुरों के निशान भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं।
महाशिवरात्रि पर यहां हर साल विशाल मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस वर्ष भी एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस धार्मिक स्थल की महत्ता को और अधिक प्रमाणित किया है।
आस्था, श्रद्धा और भक्ति के इस अद्भुत संगम ने छोटा महादेव भोपाली को एक बार फिर शिवभक्तों के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बना दिया।
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