कैबिनेट के 6 बड़े फैसले — जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी ,अधूरे कामों को पूरा करने सहित स्वच्छ पानी पहुंचाने से जुड़ी सुविधाओं पर
By,वामन पोटे
कैबिनेट के 6 बड़े फैसले: जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी, इंटरनेशनल एयरपोर्ट का तोहफा; कनेक्टिविटी पर जोर
मोदी कैबिनेट ने मंगलवार को 8.8 लाख करोड़ रुपये के 6 बड़े फैसले लिए। इनमें जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी, मदुरै एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय दर्जा देना।
मोदी कैबिनेट ने मंगलवार को 6 बड़े फैसले किए हैं
नई दिल्ली 11 मार्च।। हर घर नल जल पहुंचाने के लिए शुरू किए गए जल जीवन मिशन को केंद्र सरकार ने अब 2028 तक विस्तार दे दिया है। इसके साथ ही मिशन को 1.51 लाख करोड़ रुपये की और केंद्रीय मदद भी जारी की गई है। बढ़ी हुई इस अवधि के दौरान मिशन के देशभर के अधूरे कामों को पूरा करने सहित स्वच्छ पानी पहुंचाने से जुड़ी सुविधाओं पर फोकस किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुआई में मंगलवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में जल जीवन मिशन की अवधि को वर्ष 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दी गई। इसके साथ मिशन का कुल बजट भी बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसमें 3.59 लाख करोड़ की केंद्रीय मदद भी शामिल है।
वर्ष 2019-20 में मिशन के लिए केंद्र ने 2.08 लाख करोड़ की मदद जारी की थी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए बताया है कि जल जीवन मिशन के इस नए चरण का फोकस सेवाओं को दुरुस्त करने पर होगा। इस बीच अधूरे कामों को भी पूरा किया जाएगा।
साथ ही पीने के पानी के गवर्नेंस व ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की सप्लाई को सुनिश्चित करने के लिए एक इंस्टीट्यूशनल इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा। वैष्णव में बताया कि इस दौरान ‘सुजलम भारत’ व ‘जल अर्पण’ जैसी पहल भी शुरू की जाएंगी। सुजलम भारत के तहत सभी गांवों को एक विशिष्ट सुजल गांव पहचान प्रदान की जाएगी, जिसमें स्त्रोत से लेकर नल तक संपूर्ण पेयजल सिस्टम की डिजिटल मैंपिंग की जाएगी।
वहीं, जल अर्पण के जरिए इन योजनाओं को ग्राम पंचायतों व समितियों को हस्तांतरित किया जाएगा। मिशन के तहत अब तक 12.56 करोड़ से अधिक घरों तक नल से जल पहुंचाने का भी दावा किया गया। पीएम ने इस मिशन का 2019 में शुभारंभ किया था। मंत्रालय ने मिशन को पूरा करने के लिए समय बढ़ाने के लिए साथ ही करीब 2.80 लाख करोड़ रुपये की और मांग की थी।
दिवाला कानून और कंपनी अधिनियम में संशोधन को मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिवाला कानून और कंपनी अधिनियम में संशोधन को भी मंजूरी दे दी। सूत्रों ने कहा कि मंत्रिमंडल ने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता सहिंता (आईबीसी) और कंपनी अधिनियम, 2013 में विभिन्न संशोधनों को मंजूरी दे दी है। इन दोनों कानूनों को कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय लागू करता है।
पिछले साल अगस्त में मंत्रालय ने लोकसभा में आईबीसी में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश किया था। इस विधेयक में कई बदलाव प्रस्तावित किए गए थे, जिनका उद्देश्य दिवाला मामलों की प्रक्रिया को तेज करना और आवेदन स्वीकार करने में लगने वाला समय को कम करना है।
जेवर हवाई अड्डे के लिए सड़क संपर्क विकसित करने को 3,630 करोड़ की संशोधित लागत मंजूर
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए सड़क संपर्क विकसित करने के लिए 3,630.77 करोड़ रुपये की संशोधित लागत को भी मंजूरी दी। प्रस्तावित 31.42 किलोमीटर लंबा कोरिडोर दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से हवाई अड्डे तक सीधा और हाई स्पीड संपर्क प्रदान करेगा।
इससे एनसीआर में आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ावा मिलेगा। हवाई अड्डे को डीसीसीए से एरोड्रोम लाइसेंस प्राप्त हुआ है और इसके जल्द ही संचालन शुरू करने की उम्मीद है। प्रस्तावित कॉरिडोर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) को पार करेगा, जिससे बहु-मॉडल परिवहन संभव होगा।
इस परियोजना का लगभग 11 किलोमीटर हिस्सा एक एलिवेटेड हाईवे के रूप में विकसित किया जाना है, जो डीएनडी-बल्लभगढ़ बाईपास और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बीच ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी का एक अहम हिस्सा है, जोकि इसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा।
प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर की अतिरिक्त लागत 689.24 करोड़ रुपये है और हरियाणा सरकार ने इसके लिए 450 करोड़ रुपये वहन करने पर सहमति व्यक्त की है। इसके अलावा कैबिनेट ने तमिलनाडु में मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी।
मध्य प्रदेश में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बदनावर-तिमरवानी खंड को फोर लेन बनाने को स्वीकृति
कैबिनेट ने मध्य प्रदेश में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के एक खंड को फोर चार लेन बनाने को मंजूरी दी। हाइब्रिड एन्युटी मोड वाली इस परियोजना पर 3,839.42 करोड़ खर्च होंगे। एनएच–752 डी का बदनावर-पेटलवाड़-थंडला-तिमरवानी खंड फोर लेन बनेगा। इसकी कुल लंबाई 80.45 किलोमीटर है।
यह परियोजना 24 महीने में पूरी होगी। मंजूर किए गए कारिडोर से उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर तिमरवानी इंटरचेंज तक कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी। प्रस्तावित फोर लेन परियोजना वाले कारिडोर का मुख्य उद्देश्य यात्रा की दक्षता में सुधार करना और यात्रा के समय को लगभग एक घंटे कम करना है। यह परियोजना क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देगी, जिससे मध्य प्रदेश के धार और झाबुआ जिलों के समग्र आर्थिक विकास में योगदान बढ़ेगा।
बंगाल और झारखंड को जोड़ने वाली दो मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को भी मंजूरी
पूर्वी भारत में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया। मंत्रिमंडल ने बंगाल और झारखंड को जोड़ने वाली दो महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। करीब 4,474 करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं के पूरा होने पर रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 192 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
इससे रेलवे यातायात क्षमता बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा। केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने बताया कि दोनों परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य है। स्वीकृत परियोजनाओं में सैंथिया-पाकुड़ और संतरागाछी-खड़गपुर रेलखंड के बीच चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। दोनों रेलखंड पूर्वी भारत के व्यस्त मार्गों में गिने जाते हैं।
यहां पहले से ही ट्रेनों का दबाव अधिक है। नई लाइनों के बनने से ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी और भीड़भाड़ कम होगी। इनके जरिए बंगाल-झारखंड के पांच जिलों में बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होगी। करीब 5,652 गांवों को सीधा लाभ मिलेगा, जिनकी कुल आबादी लगभग 1.47 करोड़ है। रेल मंत्रालय के अनुसार इन लाइनों के बनने से पर्यटन क्षेत्र को फायदा होगा।
बोलपुर-शांतिनिकेतन, नंदिकेश्वरी मंदिर, तारापीठ, पटाचित्र ग्राम, धडिका वन, भीमबंध वन्यजीव अभ्यारण्य और रामेश्वर कुंड जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा। इससे इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। उधर, मोदी ने एक्स पर कहा कि ये परियोजनाएं पूर्वी भारत में रेल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देंगी, दक्षता में सुधार करेंगी और माल ढुलाई में भी सहायता करेंगी।
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