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धरती आबा योजना में घटिया सामग्री देने की शिकायत, किसानों ने कलेक्टर से की जांच की मांग

By,वामन पोटे

धरती आबा योजना में घटिया सामग्री देने की शिकायत, किसानों ने कलेक्टर से की जांच की मांग
बैतूल 10 मार्च।।
मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में धरती आबा योजना के तहत किसानों को वितरित की जा रही सामग्री की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आठनेर विकासखंड के बैरमढाना गांव के किसानों ने मंगलवार को बैतूल पहुंचकर कलेक्टर से शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि योजना के अंतर्गत उन्हें निम्न स्तर की सामग्री दी जा रही है।
किसानों ने बताया कि उद्यानिकी विभाग द्वारा सब्जी उत्पादन, मसाले की खेती तथा कंद रूपी फसलों के लिए लगभग 60 हजार रुपये मूल्य की सामग्री 90 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें पाइप, स्प्रे पंप, बीज और कीटनाशक शामिल हैं, लेकिन जो सामग्री उन्हें दी जा रही है वह गुणवत्ता में बेहद खराब है।
शिकायत करने पहुंचे किसानों का कहना है कि योजना के तहत सामग्री की आपूर्ति के लिए किसानों से पहले कंपनी का चयन करवाया गया था। किसानों ने अपने स्तर पर कंपनी का चुनाव भी कर लिया था, लेकिन बाद में विभागीय अधिकारियों द्वारा दूसरी कंपनी का सामान मंगवाकर किसानों को दिया जा रहा है।
किसानों ने आरोप लगाया कि चयनित कंपनी की जगह दूसरी कंपनी के पाइप, स्प्रे पंप, बीज और कीटनाशक दिए जा रहे हैं, जो गुणवत्ता के लिहाज से कमजोर हैं। उनका कहना है कि यह सीधे तौर पर किसानों के साथ धोखाधड़ी है और इससे योजना का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
किसानों के अनुसार धरती आबा योजना के तहत आदिवासी विकासखंड  करीब 120 किसानों का चयन किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा पहले से ही सामग्री की खरीदी कर ट्रकों के माध्यम से चिचोली, आठनेर और भैंसदेही स्थित नर्सरियों में भंडारण कर लिया गया है और वहीं से किसानों को सामग्री वितरित की जा रही है।
किसानों ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों और संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस मामले में सुधार नहीं हुआ तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।इधर जिला फलों उद्यान अधिकारी राजकुमार कोरी ने बताया कि बैतूल जिले में योजना के तहत 120 किसानों का चयन किया गया है और अब उन्हें सामग्री प्रदान की जावेगी उन्होंने कहा सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामग्री प्रदान की जा रही है।

 

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