परफॉर्मेंस पर कलेक्टरों की कुर्सी निर्भर: सीएम मोहन यादव का सख्त संदेश, देर से ऑफिस पहुंचे तो लागू हो सकता है 6 दिन का कार्य सप्ताह
By, वामन पोटे
परफॉर्मेंस पर कलेक्टरों की कुर्सी निर्भर: सीएम मोहन यादव का सख्त संदेश, देर से ऑफिस पहुंचे तो लागू हो सकता है 6 दिन का कार्य सप्ताह
भोपाल, 12 मार्च।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को जिला कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने प्रशासनिक कार्यप्रणाली, जनकल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन, गेहूं उपार्जन व्यवस्था और कार्यालयीन अनुशासन को लेकर कलेक्टरों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि जिलों में ठोस परिणाम देने वाले अधिकारी ही अपने पदों पर बने रहेंगे, जबकि लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि सभी योजनाओं का लाभ समय पर जनता तक पहुंचे और प्रशासन पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करे। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि जिले में चल रही सभी प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा करें तथा उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
सीएम यादव ने खाड़ी देशों में वर्तमान में बनी अप्रत्याशित परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कलेक्टरों को निर्देश दिए कि जिन जिलों के विद्यार्थी या नागरिक इन देशों में रह रहे हैं, उनके परिवारों से लगातार संपर्क बनाए रखा जाए। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन और वल्लभ भवन मंत्रालय में कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रदेशवासियों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। कलेक्टरों से कहा गया कि जिला स्तर पर ऐसे परिवारों के साथ समन्वय बनाकर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने “संकल्प से समाधान” अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत अब तक लगभग 40 लाख आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। उन्होंने निर्देश दिए कि 16 मार्च तक सभी जिलों में शिविर आयोजित कर शेष लंबित आवेदनों का निराकरण किया जाए, ताकि आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो सके।
कार्यालयीन अनुशासन को लेकर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अधिकारी और कर्मचारी समय पर कार्यालय पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि हाल ही में मंत्रालय में आकस्मिक निरीक्षण कराया गया था, जिसमें उपस्थिति व्यवस्था की समीक्षा की गई। इसी प्रकार के निरीक्षण अब जिला स्तर पर भी कलेक्टरों द्वारा नियमित रूप से किए जाएं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय पर कार्यालय पहुंचने की व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो प्रदेश में सप्ताह में छह दिन कार्य करने की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने गेहूं उपार्जन व्यवस्था को लेकर भी कलेक्टरों को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपार्जन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। कलेक्टरों को निर्देश दिया गया कि पंजीकृत किसानों के सत्यापन की प्रक्रिया समय पर पूरी की जाए और उपार्जन केंद्रों पर बारदानों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही किसानों को भुगतान भी समय पर किया जाए।
सरकार द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभागों में गेहूं उपार्जन 16 मार्च से 5 मई तक किया जाएगा, जबकि जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, चंबल और सागर संभागों में यह प्रक्रिया 23 मार्च से 12 मई तक चलेगी।
बैठक में मुख्यमंत्री ने शैक्षणिक संस्थानों के निरीक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में स्कूल और कॉलेज स्तर पर परीक्षाएं चल रही हैं, इसलिए कलेक्टर समय-समय पर विद्यालयों, महाविद्यालयों, छात्रावासों और विश्वविद्यालय परिसरों का आकस्मिक निरीक्षण करें। इससे परीक्षा व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित होगी और आगामी शैक्षणिक सत्र की तैयारियों में भी कोई बाधा नहीं आएगी।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और गलत सूचनाओं को लेकर भी कलेक्टरों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी सामने आने पर जिला प्रशासन तत्काल तथ्यात्मक जानकारी जारी कर उसका खंडन करे, ताकि लोगों में भ्रम की स्थिति न बने।
बैठक में कुछ जिलों में लंबित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) सेटअप को भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आलीराजपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्ना, बालाघाट और भोपाल जिलों में वीसी सेटअप का कार्य शीघ्र पूर्ण किया जाए। इससे जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच पंचायत स्तर तक सीधे संवाद की व्यवस्था मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाए जाने की जानकारी देते हुए कहा कि जिलों में आयोजित होने वाले पारंपरिक मेलों में कृषि, पशुपालन और नवाचार से जुड़ी प्रदर्शनियां लगाई जाएं। इसके माध्यम से किसानों को नई तकनीकों और सफल प्रयोगों की जानकारी दी जा सकेगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे की अवधारणा को भी प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। कलेक्टरों को जनता की समस्याओं के समाधान में संवेदनशीलता और तत्परता के साथ काम करना चाहिए, तभी शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंच सकेगा।
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