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सरकार पर कर्ज का बढ़ता बोझ , कर्ज की रफ्तार,विकास या वित्तीय संकट की आहट ?

By,वामन पोटे

कर्ज की रफ्तार,विकास या वित्तीय संकट की आहट ?

सरकार पर कर्ज का बढ़ता बोझ 
भोपाल 1अप्रैल।। मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था एक ऐसे मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है, जहां विकास की रफ्तार और कर्ज का बोझ आमने-सामने दिखाई दे रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार द्वारा 21 बार में 91,500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया जाना इस बात का संकेत है कि सरकार की वित्तीय जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश पर कुल कर्ज बढ़कर 5.28 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।
सरकार का तर्क है कि यह कर्ज विकास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए लिया जा रहा है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि उधारी राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) की निर्धारित सीमा के भीतर है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह संतुलन लंबे समय तक टिक पाएगा?
आंकड़ों पर नजर डालें तो चिंता और गहरी होती है। राज्य की कुल आय जहां लगभग 1.77 लाख करोड़ रुपये है, वहीं बजट 4.38 लाख करोड़ रुपये का है। यानी आय और खर्च के बीच बड़ा अंतर कर्ज से भरा जा रहा है। यही कारण है कि हर साल कर्ज लेने की आवृत्ति और मात्रा दोनों बढ़ रही हैं। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में जहां 12 बार कर्ज लिया गया था, वहीं इस साल यह संख्या बढ़कर 21 तक पहुंच गई।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि राज्य सरकार को करीब 37 हजार करोड़ रुपये केवल ब्याज चुकाने में खर्च करने पड़ रहे हैं। यह राशि कई प्रमुख विकास योजनाओं के बजट से भी अधिक है। यानी जितना पैसा विकास में जाना चाहिए, उसका बड़ा हिस्सा कर्ज की किस्तों में समाहित हो रहा है।
नीति आयोग की फिस्कल हेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट और कैग की टिप्पणियां भी राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता जाहिर कर चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कर्ज का उपयोग उत्पादक निवेश में नहीं हुआ, तो यह भविष्य में गंभीर आर्थिक दबाव का कारण बन सकता है।
पिछले दो दशकों में कर्ज का बढ़ना भी एक बड़ा संकेत है। वर्ष 2003 में जहां यह आंकड़ा मात्र 23 हजार करोड़ रुपये था, वहीं अब यह 5.28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों का विस्तार नहीं, बल्कि वित्तीय संरचना में बढ़ते दबाव का संकेत भी है।
आने वाले समय में इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ सकता है। संभावनाएं हैं कि सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए टैक्स में वृद्धि करनी पड़े या फिर खर्चों में कटौती करनी पड़े। इससे सामाजिक योजनाओं, सब्सिडी और बुनियादी सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अगर कर्ज का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो राज्य की क्रेडिट रेटिंग पर भी असर पड़ सकता है, जिससे भविष्य में कर्ज लेना और महंगा हो जाएगा। यह एक ऐसा चक्र बन सकता है, जिसमें कर्ज चुकाने के लिए और अधिक कर्ज लेना पड़े।
हालांकि सरकार विकास और कल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन बनाने की बात कर रही है, लेकिन आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि यह संतुलन धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह कर्ज विकास का इंजन बनेगा या फिर आने वाले वर्षों में आर्थिक संकट की नींव तैयार करेगा? फिलहाल, मध्य प्रदेश की वित्तीय सेहत पर बढ़ता कर्ज एक गंभीर चेतावनी की तरह सामने खड़ा है।
वित्तीय वर्ष 25-26 में लिया कर्ज एक नजर में

तारीख- कर्ज (राशि करोड़ में)
7 मई 2025– 5000
4 जून 2025 — 4500
8 जुलाई 2025 — 4800
30 जुलाई 2025 — 4300
5 अगस्त 2025 –4000
26 अगस्त 2025 — 4800
9 सितंबर 2025 — 4000
23 सितंबर 2025 — 3000
30 सितंबर 2025 — 3000
28 अक्टूबर 2025 — 5200
11 नवंबर 2025 — 4000
2 दिसंबर 2025 — 3000
30 दिसंबर2025 — 3500
7 जनवरी 2026– 4000
3 फरवरी 2026 — 5300
10 फरवरी 2026 — 5000
17 फरवरी 2026 — 5600
3 मार्च 2026 — 6300
10 मार्च 2026 — 5600
17 मार्च 2026 — 4100
27 मार्च 2026 — 2500

कुल — 91 हजार 500 करोड़ रुपये

सात वर्ष में ऐसे बढ़ता गया कर्ज

वर्ष– कर्ज (लाख करोड़ में)
2019- 20- 2,01,989.28
2020- 21– 2,53,335.60
2021– 22– 2,95,532.91
2022- 23– 3,31,651.07
2023-24– 3,75,578.52
2024-25– 4,36,978.52
2025-26 — 5,28,478.52

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