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“आभासी आकर्षण से सावधान रहें, जीवन का वास्तविक लक्ष्य पहचानें”: सुधांशु जी महाराज

By,वामन पोटे

“आभासी आकर्षण से सावधान रहें, जीवन का वास्तविक लक्ष्य पहचानें”: सुधांशु जी महाराज

“डिजिटल भ्रम से बाहर निकलें, वास्तविक जीवन को अपनाएं”:
बैतूलवार्ता 11 अप्रैल।। मध्यप्रदेश के बैतूल में आयोजित विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को प्रातः सत्र में आध्यात्मिक चिंतक और वक्ता सुधांशु जी महाराज ने युवाओं और विद्यार्थियों को जीवन के वास्तविक उद्देश्य, अनुशासन और आत्मविकास के महत्वपूर्ण सूत्र प्रदान किए। पुलिस ग्राउंड में आयोजित इस भव्य सत्संग में शहर के विभिन्न विद्यालयों—मानसरोवर द स्कूल, आर.डी. पब्लिक स्कूल, सतपुड़ा वैली पब्लिक स्कूल, विनायकम स्कूल तथा भारत भारती विद्यालय—के हजारों छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। पूरे पंडाल में भक्ति, ज्ञान और प्रेरणा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
अपने प्रेरक उद्बोधन में महाराजश्री ने वर्तमान समय में युवाओं के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौती—डिजिटल भ्रम—पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज का युवा सोशल मीडिया और रील्स की दुनिया में इस कदर उलझता जा रहा है कि वह अपने वास्तविक जीवन के लक्ष्यों से भटक रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “रील की दुनिया आकर्षक अवश्य है, लेकिन यह क्षणिक है, स्थायी नहीं। जीवन की सच्ची सफलता और आत्मसंतोष केवल वास्तविक जीवन में ही प्राप्त होता है।” उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आभासी दुनिया से बाहर निकलकर अपने जीवन के उद्देश्य को पहचानें और उसे पाने के लिए ईमानदारी एवं समर्पण के साथ प्रयास करें।
समय प्रबंधन और अनुशासन के महत्व को रेखांकित करते हुए महाराजश्री ने कहा कि समय ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। “वक्त के पास इतना वक्त नहीं होता कि वह दोबारा अवसर दे सके,” इस कथन के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों को हर क्षण का सदुपयोग करने की प्रेरणा दी। उन्होंने नियमित दिनचर्या अपनाने, जल्दी सोने और प्रातःकाल जल्दी उठने की आदत विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनुशासन ही सफलता का प्रथम सोपान है और जो विद्यार्थी अपने समय को व्यवस्थित कर लेते हैं, वे जीवन में अवश्य सफल होते हैं।
पढ़ाई के प्रभावी तरीकों पर प्रकाश डालते हुए महाराजश्री ने “रजिस्टर, स्टोर और रिकॉल” का सरल सूत्र समझाया। उन्होंने बताया कि केवल पढ़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे समझकर स्मरण रखना और समय-समय पर दोहराना ही वास्तविक ज्ञान की पहचान है। इस पद्धति से विद्यार्थी अपनी स्मरण शक्ति को सुदृढ़ कर सकते हैं और परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
स्वास्थ्य और जीवनशैली के संदर्भ में उन्होंने कहा कि “स्वस्थ शरीर ही सच्चा सौंदर्य है।” उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से कार्डियो एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग और योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह दी। उन्होंने गहरी श्वास लेने के अभ्यास को मानसिक शांति और दीर्घायु का आधार बताया। साथ ही, उन्होंने मोबाइल और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह देते हुए कहा कि यह न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि मानसिक एकाग्रता को भी प्रभावित करता है।
युवा अवस्था के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महाराजश्री ने कहा कि यह समय जीवन के सपनों को साकार करने का स्वर्णिम अवसर होता है। यदि इस समय को भटकाव और क्षणिक आकर्षणों में व्यर्थ गंवा दिया जाए, तो भविष्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को “ड्रीम बुक” बनाने की सलाह दी, जिसमें वे अपने लक्ष्य स्पष्ट रूप से लिखें और उन्हें प्राप्त करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का साहस रखना चाहिए। “इतनी मेहनत करें कि आपकी सफलता स्वयं आपकी पहचान बन जाए,” उन्होंने प्रेरणादायक स्वर में कहा।
सत्संग के दौरान पूरा वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। “जय हनुमान ज्ञान गुण सागर” जैसे भजनों और जयकारों से पंडाल गूंज उठा। इस अवसर पर इटारसी से आए वरिष्ठ भागवत कथावाचक पंडित रामेश्वर प्रसाद शर्मा ने मंच से महाराजश्री का पुष्पहार से स्वागत एवं अभिनंदन किया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने जीवन, करियर और आत्मविकास से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका महाराजश्री ने सरल, व्यावहारिक और सारगर्भित उत्तर देकर समाधान किया। उनके विचारों से विद्यार्थियों में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का संचार हुआ।
सत्संग का यह सत्र न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि युवाओं के लिए जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शन भी सिद्ध हुआ, जिसने उन्हें अपने लक्ष्य की ओर दृढ़ता से आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की।

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