मंडी या वेयरहाउस? मक्का उठाव में लापरवाही पर प्रशासन सख्त, व्यापारियों पर कार्रवाई की चेतावनी
By,वामन पोटे
मंडी या वेयरहाउस? मक्का उठाव में लापरवाही पर प्रशासन सख्त, व्यापारियों पर कार्रवाई की चेतावनी

बैतूल, 18 अप्रैल — मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की कृषि उपज मंडी बडोरा इन दिनों अव्यवस्था का केंद्र बनी हुई है, जहां मक्का के उठाव में लापरवाही के कारण हालात मंडी से ज्यादा वेयरहाउस जैसे हो गए हैं। व्यापारियों द्वारा खरीदी गई मक्का की हजारों बोरियां कई महीनों से मंडी परिसर में पड़ी हैं, जिससे न केवल जगह की भारी कमी हो गई है, बल्कि किसानों को भी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के निर्देश पर अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) डॉ. अभिजीत सिंह ने व्यापारियों की बैठक लेकर उन्हें स्पष्ट चेतावनी दी है कि 20 अप्रैल 2026 की शाम तक हर हाल में मक्का का उठाव सुनिश्चित किया जाए। निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं करने वाले व्यापारियों के लाइसेंस निरस्त करने और उनके क्रय-विक्रय पर रोक लगाने की बात कही गई है।
एसडीएम ने बैठक में कहा कि मंडी परिसर में 24 घंटे के भीतर खरीदी गई उपज का उठाव सुनिश्चित करना मंडी प्रशासन और व्यापारियों की संयुक्त जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मंडी की वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, मंडी में इतनी अधिक मात्रा में मक्का के बोरे जमा हो चुके हैं कि किसानों के लिए अपनी उपज खाली करने तक की जगह नहीं बची है। स्थिति यह है कि एक शेड को खाली कराए जाने के बाद व्यापारियों ने मक्का को दूसरे शेड में भर दिया, जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है।
इस अव्यवस्था का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। दूर-दराज के गांवों से अपनी उपज लेकर आने वाले किसानों को न तो समय पर नीलामी मिल रही है और न ही उचित स्थान। कई किसान घंटों नहीं बल्कि कई दिनों तक मंडी परिसर या उसके बाहर अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ही मक्का की रखवाली करने को मजबूर हैं।
मंडी प्रबंधन द्वारा शुक्रवार और शनिवार को मक्का की नीलामी बंद रखने के निर्णय ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। गुरुवार शाम को ही दर्जनों किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंच गए थे, लेकिन उन्हें नीलामी बंद होने की जानकारी नहीं थी। मंडी परिसर में जगह नहीं होने के कारण उनके वाहनों को बाहर ही खड़ा कर दिया गया।
स्थिति और जटिल इसलिए हो गई क्योंकि रविवार को साप्ताहिक अवकाश और सोमवार को भगवान परशुराम जयंती के कारण मंडी बंद रहेगी। ऐसे में किसानों को अब मंगलवार तक अपनी उपज बेचने का इंतजार करना पड़ेगा।
किसानों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि मंडी प्रशासन समय पर व्यापारियों से माल उठवा लेता और नियमों का पालन करवाता, तो उन्हें इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। कई किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी ट्रॉलियों को मंडी के अंदर प्रवेश तक नहीं दिया जा रहा है, जिससे उन्हें खुले में अपनी उपज की सुरक्षा करनी पड़ रही है।
मंडी सचिव सुरेश कुमार परते को इस पूरे मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि निर्धारित समय में उठाव नहीं हुआ तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ शासन को हुए नुकसान की भरपाई उनके वेतन से की जाएगी।
व्यापारियों ने भी मंडी सचिव को लिखित में दिया है कि जब तक पुराना स्टॉक नहीं उठाया जाता, तब तक नई नीलामी संभव नहीं है। हालांकि, इस निर्णय से किसानों की समस्याएं और बढ़ गई हैं।
प्रशासन की इस सख्ती के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तय समयसीमा के भीतर मक्का का उठाव हो पाएगा और मंडी की व्यवस्था पटरी पर लौटेगी, या फिर किसानों को इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल, मंडी में पसरी अव्यवस्था ने यह साफ संकेत दे दिया है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और विकराल हो सकती है।