जनभागीदारी से ही संभव है सिकल सेल का उन्मूलन, 2047 तक भारत को रोगमुक्त बनाने का लक्ष्य: राज्यपाल मंगुभाई पटेल
By,वामन पोटे
जनभागीदारी से ही संभव है सिकल सेल का उन्मूलन, 2047 तक भारत को रोगमुक्त बनाने का लक्ष्य: राज्यपाल मंगुभाई पटेल
बैतूल, 20 मई ।। मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवांशिक बीमारी का जड़ से उन्मूलन तभी संभव है, जब इसे केवल सरकारी कार्यक्रम न मानकर जनआंदोलन बनाया जाए। उन्होंने कहा कि समय पर जांच, उचित उपचार और व्यापक जनजागरूकता के माध्यम से इस बीमारी को नियंत्रित करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को इससे सुरक्षित रखा जा सकता है।
राज्यपाल बुधवार को बैतूल जिले के भीमपुर में आयोजित राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन-2047 कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सिकल सेल एवं थैलेसीमिया जांच के लिए अत्याधुनिक मशीन का शुभारंभ किया और कहा कि इससे जनजातीय अंचलों में रहने वाले लोगों को स्थानीय स्तर पर त्वरित जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में सिकल सेल रोग माता-पिता से बच्चों तक पहुंच जाता है, लेकिन विवाह पूर्व स्वास्थ्य जांच, समय पर स्क्रीनिंग और चिकित्सकीय परामर्श से इसके प्रसार को रोका जा सकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि विवाह से पहले युवक-युवती के स्वास्थ्य कार्ड का मिलान अवश्य करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी में सिकल सेल डिजीज न हो।
राज्यपाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को सिकल सेल मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर व्यापक स्तर पर कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देशभर में अब तक सात करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
उन्होंने बैतूल जिले में चल रहे अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यह जिला सिकल सेल उन्मूलन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। कार्यक्रम में दी गई जानकारी के अनुसार जिले में अब तक 8 लाख 62 हजार 332 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें 1,681 सिकल सेल डिजीज मरीज और 7,162 सिकल सेल कैरियर की पहचान हुई है। इसके अलावा 24,993 गर्भवती महिलाओं की भी जांच की गई है।
राज्यपाल ने सिकल सेल से प्रभावित मरीजों से नियमित उपचार कराने और संतुलित जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी में उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही तैलीय और बाहर के भोजन से बचने, पौष्टिक आहार लेने, नियमित व्यायाम करने और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सलाह दी।
उन्होंने क्षय रोग (टीबी) से पीड़ित मरीजों को भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नियमित उपचार लेने के लिए प्रेरित किया। राज्यपाल ने कहा कि “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबके प्रयास” के मंत्र के साथ सिकल सेल उन्मूलन का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री डीडी उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया सिकल सेल मिशन-2047 देश को इस बीमारी से मुक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि भीमपुर में स्थापित जांच मशीन जनजातीय और वंचित समुदायों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह जनजागरूकता और सामुदायिक सहभागिता का अभियान है। गांव-गांव तक जागरूकता पहुंचाकर आने वाली पीढ़ियों को इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित किया जा सकता है।
राज्यपाल ने कार्यक्रम के दौरान जनजातीय विकास, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में संचालित योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से बैगा, सहरिया और भारिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत लगभग 80 करोड़ रुपये की लागत से जनजातीय गांवों में बुनियादी सुविधाओं और अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत बैतूल जिले में लगभग 80 हजार पक्के घर बनाए जा चुके हैं। राज्यपाल ने कहा कि जब वे हितग्राहियों से मिलते हैं तो वे भावुक होकर बताते हैं कि अब उनका पक्के मकान का सपना पूरा हो गया है।
महिला सशक्तिकरण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि जिले की 32,677 महिलाओं को “लखपति दीदी” की श्रेणी में लाया गया है। मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत 1,28,314 बालिकाओं को लाभ मिला है और लगभग 32.29 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत 2,68,801 महिलाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है।
राज्यपाल ने अभिभावकों से विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा पर ध्यान देने का आग्रह करते हुए कहा कि शिक्षा ही प्रगति और सफलता का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक बेटियों को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने दैनिक भोजन में मोटे अनाज (मिलेट्स) के उपयोग को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरित किए और उनसे संवाद भी किया। उन्होंने सिकल मित्र प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड और जेनेटिक कार्ड प्रदान किए। टीबी मरीज को पोषण किट दी गई तथा महिला स्व-सहायता समूह को छह लाख रुपये की सीसीएल राशि का चेक सौंपा गया।
शिक्षा और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया। सीबीएसई कक्षा 12वीं में 94 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाली छात्रा सेजल उईके को प्रमाण पत्र दिया गया। राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी शिवानी उईके और अंतरराष्ट्रीय कराटे खिलाड़ी कल्याणी कोड़पे को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने महिलाओं, किशोरी बालिकाओं और गर्भवती माताओं में एनीमिया नियंत्रण के लिए “मिशन रानी” अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान के तहत हीमोग्लोबिन जांच के साथ-साथ विटामिन बी-12 की कमी, सिकल सेल रोग और थैलेसीमिया की पहचान कर समुचित उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
कार्यक्रम में सिकल सेल एनीमिया पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री और जनप्रतिनिधियों ने राज्यपाल को भरेवा कला की कलाकृति भेंट की।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति रही। अंत में कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने आभार व्यक्त किया।