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उज्जैन भूमि खरीद विवाद पर सियासी घमासान, मुख्यमंत्री मोहन यादव पर कांग्रेस के गंभीर आरोप, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोपों को बताया झूठ और भ्रामक

By, वामन पोटे

उज्जैन भूमि खरीद विवाद पर सियासी घमासान, मुख्यमंत्री मोहन यादव पर कांग्रेस के गंभीर आरोप
बैतूल भोपाल , 25 जून । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़े कथित भूमि खरीद मामलों को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर सरकारी विकास परियोजनाओं की जानकारी का लाभ उठाकर उज्जैन में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने का आरोप लगाया है और मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक साजिश और पिछड़े वर्ग के नेता को बदनाम करने का आरोप लगाया है।
विवाद की शुरुआत एक राष्ट्रीय अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित रिपोर्ट के बाद हुई, जिसमें दावा किया गया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिजनों और उनसे जुड़ी कंपनियों ने उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 168 एकड़ जमीन खरीदी। इन जमीनों का संबंध उन इलाकों से बताया गया है जहां भविष्य में बड़े विकास कार्य, सड़क परियोजनाएं और सिंहस्थ महाकुंभ से जुड़ी योजनाएं प्रस्तावित हैं।

कांग्रेस ने लगाए भ्रष्टाचार और हितों के टकराव के आरोप
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार द्वारा बड़े पैमाने पर जमीन की खरीदारी की गई, जिससे हितों के टकराव की स्थिति पैदा होती है।
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के परिवार ने 168 एकड़ में से 111 एकड़ भूमि ऐसे क्षेत्र में खरीदी है, जहां भविष्य में सिंहस्थ कुंभ और मास्टर प्लान से जुड़े विकास कार्य प्रस्तावित हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इन योजनाओं की जानकारी पहले से होने के कारण इस खरीदारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि उज्जैन केवल एक शहर नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में विकास योजनाओं से जुड़ी जमीनों में निवेश कर लाभ कमाने का प्रयास नैतिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से गंभीर विषय है।
500 करोड़ की जमीन एक रुपये में देने का भी आरोप
कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि उज्जैन में करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन एक ट्रस्ट को मात्र एक रुपये में आवंटित की गई। उन्होंने दावा किया कि उस ट्रस्ट से जुड़े व्यक्तियों का संबंध मुख्यमंत्री के करीबी लोगों से है।
पटवारी ने मुख्यमंत्री से कई सवाल पूछते हुए कहा कि सरकार को मास्टर प्लान में किए गए बदलाव सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या संबंधित किसानों को विकास परियोजनाओं की जानकारी पहले से थी और क्या मुख्यमंत्री स्वयं मामले की न्यायिक जांच के लिए आगे आएंगे।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद परिवार द्वारा खरीदी गई जमीनों के लिए धन कहां से आया और यदि रिपोर्ट पूरी तरह गलत है तो संबंधित पक्षों ने कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की।
अन्य विपक्षी नेताओं ने भी साधा निशाना
इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी नेताओं ने भी भाजपा सरकार को घेरा है। शिवसेना (उद्धव गुट) की नेता और पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि धार्मिक और आस्था से जुड़े क्षेत्रों में भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।
वहीं, स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री को आरोपों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आरोप निराधार हैं तो तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी मामले की जांच की मांग करते हुए केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही हैं तो जांच एजेंसियों को निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।

भाजपा ने आरोपों को बताया झूठ और भ्रामक

विपक्ष के आरोपों के जवाब में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह तथ्यहीन हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता को भ्रमित करने के लिए गलत जानकारी फैला रही है।
खंडेलवाल ने बताया कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए शपथ पत्र के अनुसार मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास लगभग 17 एकड़ भूमि थी और उसमें अब तक कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। इसी तरह उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम दर्ज भूमि में भी कोई बदलाव नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों का जिक्र रिपोर्ट में किया गया है, उनमें से एक कंपनी से मुख्यमंत्री वर्ष 2017 में ही अलग हो चुके थे। इसलिए बाद की गतिविधियों को उनसे जोड़ना उचित नहीं है।
भाजपा नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव यादव और उनकी पत्नी शालिनी यादव से जुड़ी जमीनें मास्टर प्लान क्षेत्र से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है।
भाजपा ने कांग्रेस पर लगाया जातीय राजनीति का आरोप
हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि जब भी प्रदेश में पिछड़े वर्ग से कोई नेता मुख्यमंत्री बनता है, तब विपक्ष उसके खिलाफ साजिश रचता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति आज भी जातीय सोच से प्रभावित है और वह पिछड़े वर्ग के नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर पा रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के जिन रिश्तेदारों का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है, उनका अपना स्वतंत्र अस्तित्व है और उनकी संपत्ति या कारोबारी गतिविधियों को सीधे मुख्यमंत्री से जोड़ना उचित नहीं है।

अखिलेश यादव ने कांग्रेस से अलग रुख अपनाया
इस पूरे विवाद में दिलचस्प स्थिति तब बनी जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कांग्रेस से अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव को बदनाम करने के लिए यह पूरा विवाद खड़ा किया गया है।
अखिलेश यादव ने कहा कि मोहन यादव लंबे समय से रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और उनकी कारोबारी पृष्ठभूमि किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के भीतर चल रही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण भी ऐसे आरोप सामने आ सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा अपने कुछ मुख्यमंत्रियों को बदलने की रणनीति पर काम कर रही है और यह विवाद उसी दिशा में एक प्रयास हो सकता है।
क्या है पूरा मामला
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिजनों और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने कुल 137 प्लॉट खरीदे। इन प्लॉटों का कुल क्षेत्रफल लगभग 168 एकड़ बताया गया है और उनकी अनुमानित कीमत करीब 45 करोड़ रुपये है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खरीदी गई अधिकांश जमीनें उन क्षेत्रों में स्थित हैं जहां भविष्य में सड़क, हाईवे और अन्य विकास परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। साथ ही, कुछ जमीनें उज्जैन के सिंहस्थ और मास्टर प्लान से जुड़े क्षेत्रों में भी बताई गई हैं।
हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक मुख्यमंत्री मोहन यादव या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस मामले में कोई जांच कराती है या नहीं और मुख्यमंत्री स्वयं इस विवाद पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं।

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