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सतपुड़ा की वादियों में बदलेगी किस्मत की तस्वीर: कुकरू बनेगा मध्यप्रदेश का नया पर्यटन हब, मुख्यमंत्री ने खोला विकास का खजाना

By, वामन पोटे

सतपुड़ा की वादियों में बदलेगी किस्मत की तस्वीर: कुकरू बनेगा मध्यप्रदेश का नया पर्यटन हब, मुख्यमंत्री ने खोला विकास का खजाना
बैतूल, 28 जून // सतपुड़ा की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच बसा बैतूल जिले का शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर कुकरू अब केवल एक हिल स्टेशन नहीं रहेगा। आने वाले वर्षों में यह मध्यप्रदेश के सबसे बड़े पर्यटन केंद्रों में शामिल होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को कुकरू प्रवास के दौरान पर्यटन, कृषि, रोजगार, सड़क, जल संरक्षण और जनजातीय विकास से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी घोषणाएं करते हुए इस क्षेत्र की तस्वीर बदलने का रोडमैप सामने रखा।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से कुकरू, चिखलदरा, मुक्तागिरी और मेलघाट को जोड़ते हुए एकीकृत पर्यटन सर्किट विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो पर्यटन विकास के लिए बजट में और वृद्धि भी की जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध कुकरू प्रदेश की अमूल्य धरोहर है और इसे राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास करेगी।
सतपुड़ा की वादियों में मिलेगा रोमांच का नया अनुभव
मुख्यमंत्री ने पर्यटन विकास की कार्ययोजना का प्रेजेंटेशन देखने के बाद अधिकारियों को निर्देश दिए कि कुकरू को केवल दर्शनीय स्थल नहीं, बल्कि एडवेंचर टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि यहां ईको टूरिज्म, सनराइज और सनसेट व्यू पॉइंट, आधुनिक ईको रिसॉर्ट, ट्रैकिंग ट्रेल, नेचर वॉक और विभिन्न एडवेंचर स्पोर्ट्स विकसित किए जाएंगे, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक लंबे समय तक यहां ठहर सकें।
सरकार का लक्ष्य है कि पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आय भी बढ़े और क्षेत्र का समग्र आर्थिक विकास हो।
जनजातीय परिवारों के घर बनेंगे पर्यटकों की पहली पसंद
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुकरू के विकास का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय जनजातीय समुदाय को मिलेगा।
उन्होंने घोषणा की कि गांवों में होमस्टे विकसित किए जाएंगे, जिनका संचालन मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम की तर्ज पर होगा। इनकी ऑनलाइन बुकिंग भी मध्यप्रदेश पर्यटन के माध्यम से कराई जाएगी।
इस पहल से पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, भोजन और जीवनशैली का अनुभव मिलेगा, जबकि ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार का नया स्रोत उपलब्ध होगा।
‘कुकरू नेचुरल’ ब्रांड से देशभर में पहुंचेगा जंगल का स्वाद
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुकरू केवल अपनी कॉफी के लिए ही नहीं, बल्कि कोदो-कुटकी, शहद, आंवला, हर्रा, बहेड़ा, सफेद मूसली, भिलवा और अन्य वन उत्पादों के लिए भी जाना जाता है।
इन उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए “कुकरू नेचुरल” नाम से विशेष ब्रांड विकसित किया जाएगा। स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को इसके उत्पादन और पैकेजिंग से जोड़ा जाएगा, जबकि वन विभाग शहरों में बिक्री केंद्र स्थापित करेगा।
सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार मिलेगा और महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
मावा और रबड़ी को मिलेगी नई पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुकरू क्षेत्र के दुग्ध उत्पाद पहले से ही अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा रबड़ी, मावा, दही सहित अन्य दुग्ध उत्पादों के स्थायी विक्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय पशुपालकों और महिलाओं को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।
युवाओं को मिलेगा रोजगार का नया रास्ता
पर्यटन विकास के साथ रोजगार सृजन को जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय युवाओं को नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के माध्यम से टूरिस्ट गाइड, होटल मैनेजमेंट और ड्राइविंग सहित विभिन्न क्षेत्रों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य है कि पर्यटन बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर भी स्थानीय युवाओं को ही प्राप्त हों।
कॉफी बनेगी किसानों की नई पहचान
मुख्यमंत्री ने कुकरू के ऐतिहासिक कॉफी बागान का निरीक्षण भी किया।
अधिकारियों ने उन्हें बताया कि वर्ष 1944 में ब्रिटिश महिला फ्लोरेंस हेंड्रिक्स ने यहां कॉफी बागान की स्थापना की थी, जो आज लगभग 40 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुकरू का मौसम कॉफी उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल है और यहां के किसानों को बड़े पैमाने पर कॉफी खेती से जोड़ने की आवश्यकता है।
उन्होंने घोषणा की कि रोबस्टा और अरेबिका कॉफी की खेती, प्रोसेसिंग और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक करोड़ रुपये की परियोजना स्थापित की जाएगी। कॉफी बोर्ड और वन विभाग किसानों को तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराएंगे।
कॉफी प्रोसेसिंग कर रही निजी कंपनी के प्रतिनिधियों से भी मुख्यमंत्री ने चर्चा कर विपणन और उत्पादन विस्तार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
पानी और पशुपालन पर भी रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन विकास के साथ आधारभूत सुविधाओं का विस्तार भी आवश्यक है।
उन्होंने कुकरू में पांच करोड़ रुपये की लागत से तालाब निर्माण की घोषणा की, जिससे जल संरक्षण के साथ पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। ग्राम कसई में भी तालाब निर्माण के लिए सर्वे कराया जाएगा।
इसके अलावा पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराने और पशु शेड निर्माण की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

सड़कों और भवनों के लिए करोड़ों की घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने स्थानीय ग्रामीणों की मांग पर कई आधारभूत विकास कार्यों की घोषणा की।
इनमें आयुष वेलनेस सेंटर की स्थापना, जामुखेड़ा में 70 लाख रुपये की सड़क, लोकलदरी में 40 लाख रुपये की पुलिया, कसई से भोडियाकुंड तक 85 लाख रुपये की सड़क, कसई फाटा से भोडियाकुंड तक 65 लाख रुपये की सड़क तथा जामुखेड़ा से इमलीढाना तक 65 लाख रुपये की सड़क शामिल है।
साथ ही ग्राम खामला में 1.20 करोड़ रुपये की लागत से बालिका छात्रावास और ग्राम कसई में 25 लाख रुपये की लागत से उचित मूल्य दुकान का निर्माण भी कराया जाएगा।
जब मुख्यमंत्री ने खुद चलाया हल
सरकारी कार्यक्रमों के बीच मुख्यमंत्री का सबसे भावनात्मक क्षण तब देखने को मिला, जब वे किसान सहादेव गायनी के खेत पहुंचे।
उन्होंने स्वयं हल चलाकर मक्का की बुवाई की और किसानों के साथ खेती-किसानी पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की समृद्धि का आधार किसान हैं और सरकार खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
इस दौरान गांव के 21 वर्षीय युवक हेमंत गायनी ने पारंपरिक लाठी कला का प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री उसकी प्रतिभा से इतने प्रभावित हुए कि स्वयं भी लाठी घुमाकर उसका उत्साहवर्धन किया।
महिलाओं की सफलता की कहानी सुनकर हुए भावुक
जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से बातचीत की।
महिलाओं ने बताया कि आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उनकी आय में कई गुना वृद्धि हुई है।
कृषि सखी के रूप में कार्य कर रहीं नीता धाड़से ने जैविक खेती से हो रहे लाभ बताए, जबकि मैना दामजे ने बताया कि पहले वे सीमित स्तर पर मावा और रबड़ी बनाती थीं, लेकिन अब उनका व्यवसाय काफी बढ़ चुका है।
अर्चना विनोद ने बताया कि उनके समूह को 72 लाख रुपये का ऋण मिला है, जिससे महिलाएं डेयरी, कृषि और अन्य व्यवसायों में आगे बढ़ रही हैं।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था ही विकसित मध्यप्रदेश की नींव बनेगी।
प्राकृतिक खेती अपनाने का दिया संदेश
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती कर रहे किसान शेषराव बरसाकर से भी चर्चा की।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें।
उन्होंने कहा कि आम जैसे फलदार पौधों के साथ कॉफी की खेती कर किसान अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं।
बैतूल दर्शन’ पुस्तिका का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘बैतूल दर्शन’ पर्यटन पुस्तिका का विमोचन किया, जिसमें जिले के प्रमुख धार्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों की विस्तृत जानकारी दी गई है।
इसके अलावा उन्होंने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और नागरिकों को हेलमेट वितरित किए तथा विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग से चयनित 45 वनरक्षकों को नियुक्ति पत्र भी सौंपे।
रुद्राक्ष का पौधा लगाया, बुच पॉइंट से निहारी वादियां
मुख्यमंत्री ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत कुकरू रेस्ट हाउस परिसर में रुद्राक्ष का पौधा लगाया।
इसके बाद उन्होंने प्रसिद्ध बुच पॉइंट का भ्रमण कर सतपुड़ा की पर्वत श्रृंखलाओं, हरियाली और सूर्योदय स्थल का अवलोकन किया।
उन्होंने कहा कि कुकरू की वादियां मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत अनुभव कराती हैं तथा इन्हें संरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।
‘मन की बात’ का भी किया श्रवण
कुकरू प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” का भी जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों के साथ सामूहिक श्रवण किया।
पर्यटन के साथ विकास का नया अध्याय
मुख्यमंत्री के एक दिवसीय दौरे ने स्पष्ट संकेत दिया कि सरकार कुकरू को केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि पर्यटन, कृषि, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय विकास के एकीकृत मॉडल के रूप में विकसित करना चाहती है।
यदि घोषित योजनाएं तय समय पर धरातल पर उतरती हैं, तो सतपुड़ा की गोद में बसा यह शांत पहाड़ी क्षेत्र आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है। साथ ही हजारों स्थानीय परिवारों के लिए रोजगार, स्वरोजगार और बेहतर जीवन की नई संभावनाओं के द्वार भी खुलेंगे।

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