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चार दशक पुराने सिंधिया संपत्ति विवाद का होगा पटाक्षेप, 8 जुलाई को कोर्ट में समझौते को मिलेगी मंजूरी

By, वामन पोटे

चार दशक पुराने सिंधिया संपत्ति विवाद का होगा पटाक्षेप, 8 जुलाई को कोर्ट में समझौते को मिलेगी मंजूरी
ग्वालियर, 6 जुलाई ।। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीन बुआओं के बीच सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को लेकर चार दशक से चला आ रहा विवाद अब समाप्ति की ओर बढ़ गया है। दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनने के बाद 8 जुलाई को ग्वालियर जिला न्यायालय में समझौते को औपचारिक रूप दिया जाएगा। इस दौरान सभी पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के समक्ष अपनी सहमति दर्ज कराएंगे।
न्यायालय के निर्देश पर तैयार किए गए राजीनामे का आवेदन पहले ही जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है। पिछली सुनवाई में अदालत ने दोनों पक्षों को आपसी समझौते के आधार पर विवाद समाप्त करने और निर्धारित अवधि के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि तय समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं होने की स्थिति में संबंधित याचिका को दोबारा बहाल किया जा सकता है।
संपत्ति विवाद की शुरुआत वर्ष 1988-89 में हुई थी, जब दिवंगत माधवराव सिंधिया और उनकी तीन बहनों—वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे तथा ऊषा राजे—के बीच पैतृक संपत्ति के अधिकार को लेकर मतभेद सामने आए थे। वर्ष 2001 में विमान दुर्घटना में माधवराव सिंधिया के निधन के बाद भी विवाद समाप्त नहीं हुआ।
बाद में वर्ष 2010 में राजमाता विजयाराजे सिंधिया की तीनों बेटियों ने ग्वालियर जिला न्यायालय में दावा दायर कर कहा कि ग्वालियर रियासत के अंतिम महाराज जीवाजीराव सिंधिया की पैतृक संपत्ति में बेटियों का भी समान वैधानिक अधिकार है और उन्हें उनका हिस्सा मिलना चाहिए। इसके जवाब में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपने अधिकारों को लेकर अलग वाद दायर किया। दोनों प्रकरण लंबे समय तक जिला न्यायालय में विचाराधीन रहे और बाद में वर्ष 2017 में मामला उच्च न्यायालय पहुंचा, जहां इसे सिविल रिवीजन के रूप में दर्ज किया गया।
करीब 16 वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि 8 जुलाई को अदालत में औपचारिक स्वीकृति मिलने के साथ ही देश के सबसे चर्चित पारिवारिक संपत्ति विवादों में से एक का पटाक्षेप हो जाएगा।
सिंधिया राजघराने की संपत्ति देश के कई राज्यों में फैली हुई है। इनमें ग्वालियर स्थित लगभग 12.40 लाख वर्गफीट क्षेत्र में फैला जयविलास पैलेस सबसे प्रमुख है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 10 हजार करोड़ रुपये बताई जाती है। इसके अलावा शिवपुरी के माधव विलास पैलेस, हैप्पी विलास और जॉर्ज कैसल, उज्जैन का कालियादेह पैलेस, दिल्ली का ग्वालियर हाउस, राजपुर रोड स्थित संपत्तियां, पुणे का पद्म विलास पैलेस, वाराणसी का सिंधिया घाट, गोवा का विठोबा मंदिर तथा आजादी के समय सिंधिया परिवार की 100 से अधिक कंपनियों के शेयर भी इस विवादित संपत्ति का हिस्सा रहे हैं।
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