बैतूल कांग्रेस की गुटबाजी सड़क पर, पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे और जिला अध्यक्ष निलय डागा समेत दोनों गुटों पर एससी-एसटी एक्ट सहित केस
By, वामन पोटे
बैतूल कांग्रेस की गुटबाजी सड़क पर, पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे और जिला अध्यक्ष निलय डागा समेत दोनों गुटों पर एससी-एसटी एक्ट सहित केस
संगठन सृजन कार्यक्रम में हुए विवाद के बाद क्रॉस एफआईआर, वायरल वीडियो भी जांच के दायरे में
बैतूल, 21 जुलाई ।। मध्य प्रदेश के बैतूल में कांग्रेस की लंबे समय से चली आ रही अंदरूनी खींचतान अब पुलिस थाने तक पहुंच गई है। संगठन सृजन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान हुए विवाद के बाद पूर्व मंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे, जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक निलय डागा सहित दोनों गुटों के कई नेताओं और समर्थकों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने क्रॉस एफआईआर दर्ज की है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मारपीट, जातिसूचक अपमान, जान से मारने की धमकी और धक्का-मुक्की के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, विवाद 18 जुलाई को बैतूल शहर के जैन दादावाड़ी परिसर में आयोजित कांग्रेस के संगठन सृजन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ नेताओं के रवाना होने के बाद दो गुटों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गई।
पहले मामले में आमला निवासी और जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता विजय पारधी की शिकायत पर पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे, कांग्रेस नेता एवं अधिवक्ता नवनीत मालवीय, मनोज मालवे, सलमान खान सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कार्यक्रम के दौरान आरोपियों ने उन्हें घेरकर गाली-गलौज की, धक्का दिया, जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया और जान से मारने की धमकी दी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक रूप से उनकी सामाजिक पहचान को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की गई।
दूसरी ओर कांग्रेस नेता मनोज मालवे की शिकायत पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक निलय डागा, विजय पारधी, हर्षवर्धन धोटे, मोनू बड़ोनिया सहित अन्य के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत के अनुसार कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे के कथित अपमान को लेकर विवाद बढ़ा, जिसके बाद उनके साथ गला दबाने, लात-घूंसों से मारपीट करने, जातिसूचक गालियां देने और जान से मारने की धमकी देने की घटना हुई। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि घटना के तत्काल बाद मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने संगठन की छवि को देखते हुए पुलिस में तत्काल शिकायत दर्ज नहीं कराने और मामले को आपसी स्तर पर सुलझाने की सलाह दी थी।
कोतवाली पुलिस ने दोनों शिकायतों के आधार पर बीएनएस की धारा 296(बी), 115(2), 351(2), 3(5) सहित एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत अलग-अलग अपराध दर्ज किए हैं। पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
इस बीच घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है। पुलिस ने वीडियो को जांच का हिस्सा बनाया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वीडियो में कार्यक्रम के दौरान नेताओं के बीच तीखी बहस, धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी की स्थिति दिखाई दे रही है। जांच अधिकारी वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई देने वाले घटनाक्रम का मिलान प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से कर रहे हैं।
कोतवाली थाना प्रभारी देवकरण डहरिया ने बताया कि दोनों पक्षों की शिकायतों पर विधि सम्मत कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कर ली गई है। वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम बैतूल कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी के खुलकर सामने आने का संकेत है। संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम का विवाद और फिर दोनों पक्षों पर एससी-एसटी एक्ट सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज होना जिले की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।