खड़े हनुमान प्रतिमा को लेकर भ्रम दूर, विशेषज्ञों की राय के बाद ही होगा कोई निर्णय
उज्जैन, 9 सितंबर । मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में सराफा और छत्री चौक के बीच स्थित प्राचीन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने या विस्थापित किए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरों को प्रशासन ने भ्रामक बताया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा को हटाने के लिए अब तक न तो किसी मशीन का इस्तेमाल किया गया है और न ही किसी मानवीय प्रयास से उसे विस्थापित करने की कार्रवाई की गई है।
प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, खड़े हनुमान जी की प्रतिमा के संबंध में विशेषज्ञों की वैज्ञानिक और तकनीकी राय प्राप्त किए बिना कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। प्रतिमा की वर्तमान संरचनात्मक स्थिति का विशेषज्ञों द्वारा वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा। परीक्षण और विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया को लेकर कोई निर्णय लिया जाएगा।
प्रशासन ने कहा कि सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन शहर में आंतरिक मार्गों के चौड़ीकरण सहित कई विकास कार्य प्रस्तावित हैं। शहर की यातायात व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ ही धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
प्रशासन के मुताबिक खड़े हनुमान जी की प्रतिमा श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से जुड़ी हुई है। इसलिए प्रतिमा की संरचनात्मक स्थिति और सुरक्षा का वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी है। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की भावनाओं, प्रतिमा की सुरक्षा और उज्जैन की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए ही आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में श्रद्धालुओं और नागरिकों की भावनाओं का पूरा सम्मान किया जाएगा। संबंधित पक्षों से संवाद किए बिना कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। विशेषज्ञों, संत समाज, श्रद्धालुओं और नागरिकों से विचार-विमर्श कर ऐसा समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा, जिससे विकास कार्यों के साथ धार्मिक आस्था और विरासत का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।
सोशल मीडिया पर प्रतिमा को हटाए जाने की खबरें प्रसारित होने के बाद श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी थी। प्रशासन के स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल प्रतिमा को हटाने अथवा विस्थापित करने की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
प्रशासन ने नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करें और इस संबंध में प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी को ही प्रमाणिक मानें।
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