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1 लाख रूपये की रिश्वत लेते सहायक समिति प्रबंधक व साथी पकड़ाया, लोकायुक्त की कार्रवाई

By,वामन राव पोटे

1 लाख रूपये की रिश्वत लेते सहायक समिति प्रबंधक व साथी पकड़ाया, लोकायुक्त की कार्रवाई

मध्यप्रदेमें रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। लगभग हर दूसरे दिन कहीं न कहीं लोकायुक्त टीम रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ रही है लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोर बाज आते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मध्यप्रदेश के सागर का है जहां सहायक समिति प्रबंधक व उसके एक साथी को 1 लाख रूपये की रिश्वत लेते लोकायुक्त की टीम ने रंगेहाथों पकड़ा है।

सहायक समिति प्रबंधक ने मांगी 2 लाख रिश्वत

सागर जिले के पड़रई बुजुर्ग गांव के सरपंच दिनेश सिंह की शिकायत पर सागर लोकायुक्त की टीम ने ये कार्रवाई की है। फरियादी सरपंच दिनेश सिंह ने बताया कि किसानों की करीब 371 क्विंटल मूंग की तुलाई हो चुकी थी जिलके बाद जब उस मूंग को शिविका वेयर हाउस भेजा गया तो संचालक दिव्यांश तिवारी ने खराब ग्रेडिंग बताकर मूंग रखने से मना कर दिया। इसके बाद किसानों ने सहायक प्रबंधक संतोष चौबे से संपर्क किया तो उसने मूंग की ग्रेडिंग रिपोर्ट सही करने और वेयर हाउस में रखवाने के एवज में 2 लाख रूपये रिश्वत की मांग की।

लोकायुक्त ने रंगेहाथों पकड़ा

सहायक समिति प्रबंधक संतोष चौबे के द्वारा 2 लाख रूपये की रिश्वत मांगे जाने के बाद सरपंच दिनेश सिंह ने सागर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की। लोकायुक्त टीम ने शिकायत की जांच की और शिकायत सही पाए जाने पर गुरूवार 28 अगस्त को रिश्वत के 1 लाख रूपये लेकर फरियादी दिनेश सिंह को रिश्वतखोर संतोष चौबे के पास भेजा। संतोष चौबे ने जरूआ वेयर हाउस केसली में रिश्वत देने के लिए सरपंच दिनेश सिंह को बुलाया और रिश्वत के रूपये लेकर अपने साथी अजय सिंह घोषी को दे दिए तभी लोकायुक्त की टीम ने दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया। इस मामले में लोकायुक्त ने शिविका वेयर हाउस संचालक दिव्यांश तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है।

एमपी में बीआरसी 30000 की रिश्वत लेते पकड़ाया, लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई

मध्यप्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। लगभग हर दूसरे दिन कहीं न कहीं लोकायुक्त टीम रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ रही है लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोर बाज आते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मध्यप्रदेश के इंदौर का है जहां एक बीआरसी को लोकायुक्त की टीम ने रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा है।

स्कूल की मान्यता के नवीनीकरण के लिए मांगी रिश्वत

आवेदक रामविलास गुर्जर संचालक द सेंट पीटर्स कॉन्वेंट हायर सेकंडरी स्कूल, नगीन नगर ने इंदौर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी कि स्कूल की मान्यता के नवीनीकरण के बदले नीरज गर्ग, खंड श्रोत समन्वयक (BRC) इंदौर शहर – 1, शिक्षा विभाग ने उससे 80 हजार रूपये रिश्वत की मांग की है। लोकायुक्त ने शिकायत की जांच की और शिकायत सही पाए जाने पर मंगलवार (26 अगस्त) को रिश्वतखोर BRC नीरज गर्ग को कालानी चौराहे पर 30 हजार रूपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा है।

एक दिन पहले दिए 50 हजार रूपये

आवेदक रामविलास गुर्जर के मुताबिक एक दिन पहले 25 अगस्त को वो रिश्वतखोर बीआरसी नीरज गर्ग के कहने पर 50 हजार रूपये की राशि पड़ोस के ओएसिस स्कूल के कर्मचारी कमल सिंह वीरजी को दे चुका है। बाकी के 30 हजार रूपये की रिश्वत देने के लिए उसे रिश्वतखोर बीआरसी नीरज गर्ग ने कालानी चौराहे पर शाम 6 बजे बुलाया था। वहीं पर लोकायुक्त ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया और रिश्वतखोर बीआरसी को रंगेहाथों पकड़ लिया। आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण की धारा 7 के अंतर्गत कार्यवाही की गई है।

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