गांव की मिट्टी से वर्ल्ड कप तक : बैतूल की दुर्गा की अद्भुत उड़ान
बैतूल 14 सितम्बर ।। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील के छोटे से गांव राक्सी के गौलीढाना की दुर्गा येवले(यादव ) ने दिखा दिया कि जज्बा और मेहनत हो तो कोई कमी मंज़िल रोक नहीं सकती। दृष्टिहीन दुर्गा अब भारतीय महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम के साथ 2025 के टी-20 वर्ल्ड कप में देश का परचम लहराएंगी।
गांव से छात्रावास तक का सफर

1 फरवरी 2003 को जन्मी दुर्गा ने प्राथमिक शिक्षा गौलीढाना के सरकारी स्कूल में पूरी की। शिक्षक नत्थू वडुकले और पिता झब्बू येवले के मार्गदर्शन से वह बैतूल छात्रावास पहुंचीं। 9वीं-10वीं की पढ़ाई पाढर ब्लाइंड स्कूल में करने के बाद इंदौर के महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ छात्रावास में दाख़िला लिया।
क्रिकेट का जुनून
नवंबर 2022 में छात्रावास में ब्लाइंड क्रिकेट का कैंप हुआ। क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड इन मध्यप्रदेश के अध्यक्ष सोनू गोलकर ने दुर्गा की प्रतिभा को पहचान कर जिला स्तरीय टीम में चुना।
दिसंबर 2022 में इंदौर ज़िले के लिए खेले मैचों ने उन्हें प्रदेश टीम तक पहुंचाया। जनवरी 2023 में बेंगलुरु में पहला नैशनल, 2024 में कर्नाटक के हुबली और 2025 में केरल में राष्ट्रीय टूर्नामेंट में उनका शानदार प्रदर्शन रहा। वेस्ट जोनल टीम में बेहतरीन स्कोर के आधार पर अब उनका चयन भारतीय टीम के पहले महिला टी-20 ब्लाइंड वर्ल्ड कप के लिए हुआ।
ऐतिहासिक वर्ल्ड कप
यह टूर्नामेंट 11 से 25 नवंबर 2025 तक भारत में होगा। सात देशों—भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, नेपाल, श्रीलंका और अमेरिका—की टीमें 21 लीग मैच, दो सेमीफाइनल और फाइनल खेलेंगी।
पहले पाकिस्तान के मैच काठमांडू (नेपाल) में कराने की योजना थी, लेकिन वहां हिंसक प्रदर्शनों के चलते भारतीय दृष्टिबाधित क्रिकेट संघ (CABI) ने वेन्यू बदलने का फैसला लिया है। पाकिस्तान के मैचों के लिए नया न्यूट्रल वेन्यू जल्द तय किया जाएगा।
भारतीय टीम की ताकत
भारत पिछली बार 2023 के IBSA वर्ल्ड गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुका है। इस बार भी भारत मेजबान और मजबूत दावेदार है। 56 खिलाड़ियों में से चुने गए 16 सदस्यीय स्क्वाड में कर्नाटक की दीपिका टीसी कप्तान और महाराष्ट्र की गंगा एस कदम उपकप्तान हैं। मध्यप्रदेश से दुर्गा के साथ सुषमा पटेल और सुनीता सराठे भी शामिल हैं।
गांव की शान
दुर्गा की उपलब्धि ने माता-पिता झब्बू येवले, शिक्षकों और पूरे बैतूल जिले का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। गांववाले कहते हैं—“दुर्गा ने साबित किया कि हिम्मत और मेहनत से कोई भी कमी इंसान को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।”
राक्सी की मिट्टी से उठी यह होनहार बेटी अब विश्व कप के मंच पर भारत का तिरंगा फहराने को तैयार है।
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