एकलव्य हॉस्टल के छात्र 35 किमी पैदल कलेक्टर से मिलने निकले, रास्ते में रोका गया: बंद कमरे में गूंजी बच्चों की शिकायतें, सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर उठे गंभीर सवाल
By,वामन पोटे
एकलव्य हॉस्टल के छात्र 35 किमी पैदल कलेक्टर से मिलने निकले, रास्ते में रोका गया: बंद कमरे में गूंजी बच्चों की शिकायतें, सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर उठे गंभीर सवाल
बैतूल, 17 सितंबर ।।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी एकलव्य मॉडल रेसीडेंशियल स्कूल योजना पर बुधवार को बैतूल में बड़ा सवाल खड़ा हो गया। शाहपुर के एकलव्य छात्रावास की दुर्दशा से तंग आकर 500 से ज्यादा छात्र-छात्राएं 35 किलोमीटर पैदल चलकर बैतूल कलेक्टर से मिलने निकल पड़े। जैसे ही यह खबर प्रशासन तक पहुंची, हड़कंप मच गया।
प्रशासन की नींद टूटी, बरेठा घाट पर रोका गया जत्था
सुबह-सुबह जब बच्चों का यह काफिला बरेठा घाट तक पहुंचा तो पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रोकने की कोशिश की। अधिकारी बार-बार समझाते रहे, पर बच्चे जिद पर अड़े रहे। हालात बिगड़ते देख कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी को खुद शाहपुर दौड़ना पड़ा। उन्होंने वाहनों की व्यवस्था कर बच्चों को छात्रावास वापस भिजवाया।
डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में कलेक्टर से दो-टूक
छात्रावास लौटने के बाद कलेक्टर ने करीब डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में छात्रों की शिकायतें सुनीं। छात्रों ने खुलकर कहा—
खाने की गुणवत्ता बेहद खराब है।
मेडिकल सुविधाएं न के बराबर हैं।
भवन जर्जर है, मरम्मत अधूरी है।
प्रिंसिपल, नर्स और काउंसलर का रवैया बेहद गैरजिम्मेदाराना है।
कलेक्टर ने सभी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए और जिम्मेदारों से जवाब-तलब करने की चेतावनी दी।
निरीक्षण में दिखी अव्यवस्था, कलेक्टर भड़के

कलेक्टर की मौजूदगी की खबर मिलते ही शाहपुर एसडीएम, तहसीलदार और एसडीओपी भी मौके पर पहुंचे। कलेक्टर ने छात्रावास का निरीक्षण किया और अव्यवस्थाएं देख कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने साफ कहा कि बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर दाग
एकलव्य विद्यालय आदिवासी बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं देने की केंद्र सरकार की योजना का अहम हिस्सा हैं। लेकिन शाहपुर छात्रावास में उजागर हुई गड़बड़ियां इस पूरी योजना पर बड़ा सवालिया निशान लगा रही हैं।
अभिभावकों की नाराजगी, सुधार की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोग और अभिभावक भी आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि यह लापरवाही बच्चों के भविष्य से सीधा खिलवाड़ है। यदि प्रशासन ने तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए, तो बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों खतरे में पड़ सकती हैं।
अब देखना यह है कि कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बाद कितनी जल्दी व्यवस्था सुधरती है और क्या वाकई सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जमीनी हकीकत में अपनी साख बचा पाएगी।
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