Madhya Pradesh Latest News

धान की फसल को तबाह कर सकता है भूरा माहू, किसान ऐसे करें बचाव

By, वामन पोटे

धान की फसल को तबाह कर सकता है भूरा माहू, किसान ऐसे करें बचाव

शहडोल में दिखने लगा भूरा माहू, जानें धान की फसल को बचाने के आसान टिप्स और भूरा माहू से जुड़ी सारी जानाकारी.

शहडोल :धान की फसल में कहीं बालियां आने की शुरुआत हो रही है, कहीं बालियां आ चुकी हैं. अच्छी बारिश हुई है, जो धान की फसल के लिए भी शानदार रही लेकिन इस बीच धान की खेती करने वाले किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है. क्योंकि मौसम खुलने के बाद थोड़ी सी धूप निकलने से ही फसलों पर कीड़ों का भी आतंक शुरू हो चुका है, उन्हीं में से एक है भूरा माहू, जो शुरुआत में ही पकड़ में आ जाने पर आसानी से कंट्रोल हो जाता है, और अगर नजरअंदाज किया तो ये आपकी फसल को बहुत नुकसान भी पहुंचा सकता है.

क्या है आखिर भूरा माहू?

कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति बताते हैं, ” भूरा माहू जिसे ब्राउन प्लांट हूपर बीपीएच के नाम से जाना जाता है उसे ज्यादातर किसान शहडोल की लोकल भाषा में ‘भूरा माहू’ कहते हैं. इसी नाम से ये प्रचलित है, आप देखेंगे कि धान के पौधे में नीचे का जो हिस्सा होता है, जहां से कल्ले निकलते हैं, वहां पर छोटे-छोटे मक्खी की तरह ये होते हैं और ये पौधे के रस को चूसने का काम करते हैं. यही पौधे के रस को चूसने के बाद उस पौधे को पूरी तरह से सुखा देते हैं, जिससे धान की फसल दाने आने से पहले मैच्योर होने से पहले ही सूख जाती है.”

शहडोल में दिखने लगा भूरा माहू

फसलों की निगरानी कर रहे अमर सिंह से हमारी बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि दिन हो या रात धान की फसल के चार महीने वो यहीं पर निवास करते हैं, हमने पूछा कि आखिर ऐसा क्यों करते हैं? तो उन्होंने बताया कि फसल को बचाने खासकर आवारा मवेशियों से बचाने के लिए और फसलों की देखरेख के लिए वो यहीं पर रहते हैं, वो बताते हैं कि इन दिनों फसल में एक कीड़ा देखने को मिल रहा है, हालांकि उन्होंने उसका इलाज भी कर दिया है. और उसका असर भी दिखने लगा है फसल अब ज्यादा प्रभावित नहीं हो रही है लेकिन वो कहते हैं कि शहडोल जिले में अब कुछ किसानों से भी सुनने को आ रहा है कि भूरा माहू की शुरुआत हो रही है.

किस मौसम में लगता है ये कीड़ा

कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति बताते हैं, ” शहडोल जिले में इन दिनों मौसम खुला हुआ है, तेज धूप हो रही है, तापमान में भी वृद्धि देखने को मिल रही है, आर्द्रता भी 60 से 80 के बीच तक पहुंच चुकी है, और यही वो मौसम होता है, जिसमें धान की फसल में बीपीएच ब्राउन प्लांट हूपर (भूरा माहू) तेजी से फैलता है. यही वो समय भी होता है जब सतत फसलों की निगरानी करनी होती है और इसके शुरुआती अटैक को देखते ही उसके नियंत्रण के लिए उपाय करने होते हैं, जिससे फसल नुकसान से बच जाती है.”

कहां-कहां है इसका प्रसार?

कृषि वैज्ञानिक बताते हैं, ” इस भूरा माहू के डिस्ट्रीब्यूशन की बात करें तो जहां-जहां पर धान की खेती होती है वहां इसका प्रसार प्रमुखता से देखने को मिलता है, अपने भारत की बात करें तो उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में इसका प्रसार देखने को मिलता है.”

कितना नुकसान पहुंचा सकता भूरा माहू?

कृषि वैज्ञानिक डॉ. बी के प्रजापति बताते हैं कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. भूरा माहू अगर किसी फसल पर लग गया है तो एक हफ्ते के बाद पूरी तरह से फसल को सुखा देता है और खेत में पैचेस के रूप में फसल सूखने लगती है. जब आप खेत में भ्रमण करेंगे तो ये देखने को भी मिलेगा. अगर इसका सही समय पर नियंत्रण नहीं किया तो ये 80 से 90% तक फसल को पूर्ण रूप से नुकसान पहुंचा सकता है. क्योंकि ये पौधे के रस को पूरी तरह से चूस लेगा और पौधा सूख जाएगा, इसलिए इस मौसम में धान की खेतों में सावधानी पूर्वक निगरानी करें.

भूरा माहू को कैसे करें कंट्रोल?

अगर आपके खेत में धान की फसल में भूरा माहू है तो इसे कंट्रोल करने के लिए तुरंत ही उपाय करें. कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि सबसे पहले जब धान की रोपाई करते हैं तो कोशिश करें कि 10 से 15 लाइन के बाद धान के बीच में एक फिट की जगह छोड़ें. इसके अलावा जब भूरा माहू का प्रकोप हो तो खेत में नाइट्रोजन व यूरिया का छिड़काव तेजी से करते हैं. साथ ही खेत से पानी को वेट एंड ड्राई सिस्टम में रखें, मतलब खेत में पानी भरें, निकाले और तीन-चार दिन के बाद फिर से इसमें पानी भरें.

Comments are closed.