ट्रेन में गाकर पेट भरने वाला गायक बना स्टार: बागेश्वरधाम ने बदली ज़िंदगी, अब कनाडा से आया ऑफर, टी-सीरीज़ ने भी बुलाया
By, वामन पोटे
ट्रेन में गाकर पेट भरने वाला गायक बना स्टार: बागेश्वरधाम ने बदली ज़िंदगी, अब कनाडा से आया ऑफर, टी-सीरीज़ ने भी बुलाया
छतरपुर।।
कटनी की झोपड़ी से लेकर कनाडा के मंच तक—ये किसी फ़िल्म की कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है अमित धुर्वे की। कभी रेलवे स्टेशन पर पत्थर बजाकर गाना गाकर पेट भरने वाला ये आदिवासी गायक आज सोशल मीडिया पर छा चुका है। बागेश्वरधाम सरकार पंडित धीरेंद्र शास्त्री के एक फ़ोन कॉल ने उसकी किस्मत रातोंरात बदल दी।

रात ढाई बजे आया ज़िंदगी बदलने वाला कॉल
नवरात्रि से ठीक पहले महेश्वर के नर्मदा तट पर अपनी झोपड़ी में सो रहे अमित के फोन की घंटी बजी। आधी नींद में फोन उठाया तो दूसरी तरफ़ से आवाज़ आई— “बागेश्वरधाम से बोल रहे हैं, गुरुजी बात करेंगे।”
कुछ सेकेंड की खामोशी… फिर आई जानी-पहचानी गूंज— “अमित, कहां हो?”
ये आवाज़ थी पंडित धीरेंद्र शास्त्री की। आदेश मिला— “नवरात्रि में बागेश्वरधाम आओ, अपने भजन सुनाओ।” यही पल उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट बन गया।
बचपन का दर्द: मां का साया छिना, स्कूल का मुंह तक नहीं देखा
अमित का जन्म कटनी की टपरी में हुआ। दो माताओं में से छोटी मां का बेटा थे, पर सात–आठ साल की उम्र में मां का देहांत हो गया। बड़ी बहन ने पाला, मगर गरीबी इतनी कि स्कूल जाना नसीब नहीं हुआ।

ट्रेन में गाना, पत्थर बजाना और भीख से पेट भरना
10–11 साल की उम्र में घर छोड़ दिया। कटनी स्टेशन पर कुछ बच्चों से मुलाकात हुई, जो ट्रेन में पत्थर बजाकर गाते और भीख मांगकर खाते थे। अमित भी उनके साथ हो लिए। वहीं से सीखा गाना और पत्थर पर ताल बजाना।
पिता का हुनर, हारमोनियम का साथ
पिता गांव-गांव घूमकर हारमोनियम सुधारते थे। उनके साथ रहकर अमित ने भी ये हुनर सीखा। बाद में रामायण मंडलियों में भजन गाने लगे।
गाने से मिली दुल्हन, लकवे से टूटा मन
भजन गाते-गाते एक तबला वादक उनकी गायकी पर इतना मोहित हुआ कि अपनी बेटी का रिश्ता दे दिया। शादी हुई, पर कुछ साल बाद पारिवारिक तनाव से अमित को लकवे का अटैक आया। मुंह टेढ़ा हो गया, गाना लगभग छूट गया। डॉक्टरों ने गाने से मना किया, मगर दोस्तों ने हौसला बनाए रखा।
नर्मदा किनारे साधना और सोशल मीडिया का जादू
2016-17 में अमित महेश्वर आकर नर्मदा किनारे तंबू में बस गए। फिर से भजन मंडलियों में गाना शुरू किया। चार महीने पहले मंदसौर के फनी लाल ने उनका भजन गाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर डाला—और वही वीडियो उनकी पहचान बन गया।
बागेश्वरधाम का मंच और दुनिया भर से ऑफर
गुरुजी ने हजारों भक्तों के सामने उनका परिचय कराया और भजन गाने को कहा। धाम के ऑफिशियल पेज पर वीडियो अपलोड हुआ और देखते ही देखते अमित रातोंरात स्टार बन गए।
अब कनाडा से शो का न्योता है, टी-सीरीज़ और संस्कार टीवी ने भी ऑफर दिया है। वृंदावन, अयोध्या, प्रयागराज जैसे बड़े धार्मिक स्थलों से बुलावे आ रहे हैं। अभिनेता-सांसद मनोज तिवारी ने अपने एल्बम में गाने का मौका देने का वादा किया है।
बेटे के 5 रुपए के लिए गुरुजी ने दिया 50 हजार
26 सितंबर की सुबह अमित की पत्नी ने बताया कि छोटा बेटा रोज़ की तरह बिस्कुट के लिए 5 रुपए मांग रहा था, पर घर में पैसे नहीं थे। उसी दिन गुरुजी ने पूरी चढ़ोत्तरी—पूरे 50 हजार रुपए—अमित को दे दिए।
कटनी की झोपड़ी से कनाडा तक
आज अमित धुर्वे के पास विदेशों से ऑफर हैं, लाखों लोग उनके भजन सुनने को बेताब हैं। लेकिन वे कहते हैं—“मैं अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलूंगा।”
ट्रेन में गाकर पेट भरने वाला ये गायक अब हिंदुस्तान की भक्ति संगीत की नई आवाज़ बन चुका है।
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