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बैतूल में “कोल्ड्रिफ सिरप” से मौतों की खबरों पर प्रशासन का बयान — कलेक्टर ने किया स्पष्टिकरण, कहा: जिले में सिरप का विक्रय नहीं, दोनों बच्चों का इलाज बैतूल में नहीं हुआ

By,वामन पोटे

बैतूल में “कोल्ड्रिफ सिरप” से मौतों की खबरों पर प्रशासन का बयान — कलेक्टर ने किया स्पष्टिकरण, कहा: जिले में सिरप का विक्रय नहीं, दोनों बच्चों का इलाज बैतूल में नहीं हुआ
बैतूल 6 अक्टूबर 25 ।।
हाल ही में मीडिया में वायरल हुई “कोल्ड्रिफ सिरप” से दो बच्चों की मौत की खबरों पर अब बैतूल प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने कहा कि “दोनों बच्चों का इलाज बैतूल जिले में कहीं भी नहीं हुआ है और जिले में कोल्ड्रिफ सिरप का विक्रय भी नहीं पाया गया है।”
उन्होंने बताया कि ग्राम कलमेश्वरा निवासी कबीर (4 वर्ष) पिता कैलाश और ग्राम जामुन बिछुआ निवासी गर्भित (2.5 वर्ष) पिता निखिलेश का इलाज जिले के बाहर हुआ था।

कबीर की मृत्यु 8 सितंबर को अन्य जिले में हुई।

गर्भित का इलाज छिंदवाड़ा जिले के परासिया में हुआ था और उसकी मृत्यु उपचार के बाद ग्राम लादी (आमला) में हुई।

कलेक्टर सूर्यवंशी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग, पुलिस या प्रशासन को “कोल्ड्रिफ सिरप” से किसी की मृत्यु की कोई आधिकारिक सूचना या शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। मेडिकल टीम की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि बैतूल जिले की किसी भी दवा दुकान पर कोल्ड्रिफ सिरप उपलब्ध नहीं है और इसका विक्रय नहीं हो रहा है।

चिरायु अस्पताल के डॉक्टर का बयान उठाता सवाल

इस बीच  बैतूल के चिरायु अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दीप साहू ने बताया कि 24 सितंबर को निहाल नामक बच्चे को उनके अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
“जांच में उसका क्रिएटिनिन स्तर बढ़ा हुआ पाया गया, जिससे किडनी प्रभावित थी। इसलिए 25 सितंबर की सुबह बच्चे को एम्स भोपाल रेफर किया गया,” — डॉ. साहू ने बैतूल से प्रकाशित एक संध्या दैनिक अखबार  को रविवार को बताया।
लेकिन इस पूरे प्रकरण में एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है —
जब बच्चे में गंभीर किडनी फेल्योर के लक्षण मिले, तब अस्पताल ने जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को तत्काल सूचना क्यों नहीं दी?
ऐसे मामलों में नियमानुसार चिकित्सक को संदिग्ध औषधि-प्रतिक्रिया या दवा से जुड़ी जटिलता की रिपोर्ट सीएमएचओ को देना आवश्यक है, ताकि समय रहते जांच और रोकथाम की जा सके।
निहाल के पिता निखिलेश ने बताया कि उन्होंने बच्चे का इलाज परासिया के डॉ. प्रवीण सोनी से कराया था।
“उन्होंने एक बॉटल दी थी पीने के लिए। बच्चा ठीक नहीं हुआ तो उसे आगे इलाज के लिए बैतूल ले गए। बच्चे की मौत के बाद दवाई और कागज बच्चे के साथ ही दफना दिए,” — पिता का कहना है।

जांच दल गठित — टीम करेगी तथ्य जुटाने का काम

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज हुरमाड़े ने इस मामले की विशेष जांच टीम गठित की है।
टीम में —

डीएचओ डॉ. राजेश परिहार,

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष सिंह ठाकुर,

प्रभारी जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. प्रांजल उपाध्याय,

औषधि निरीक्षक संदीप जादौन शामिल हैं।

यह टीम दोनों परिवारों से मुलाकात कर पूरी जानकारी एकत्र करेगी।
डॉ. हुरमाड़े ने कहा, “जरूरत पड़ने पर पोस्टमार्टम कराकर भी वास्तविक कारण की जांच की जाएगी।”

प्रशासन की अपील

कलेक्टर सूर्यवंशी ने कहा कि आमला क्षेत्र छिंदवाड़ा जिले के परासिया से सटा हुआ है, इसलिए कई लोग इलाज के लिए वहीं जाते हैं। “यह मामला प्रत्यक्ष रूप से बैतूल से जुड़ा नहीं है, फिर भी बच्चों की मौत को अत्यंत संवेदनशीलता से जांच की जा रही है।”
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि जिले में कफ सिरप के उपयोग पर निगरानी रखी जाए और आमजन में सुरक्षित दवा उपयोग को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाए।

बैतूल में “कोल्ड्रिफ” से मौत का सीधा संबंध न होने के बावजूद, यदि किसी बच्चे में संदिग्ध दवा के सेवन के बाद किडनी फेल्योर जैसे लक्षण पाए गए, तो क्या चिकित्सकों को तत्काल स्वास्थ्य विभाग को सूचना नहीं देनी चाहिए थी?
प्रशासनिक जांच से यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि क्या सूचना न देने में लापरवाही हुई — ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।

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