“30 लाख गबन के 10 साल पुराने केस में कंपनी डायरेक्टर बरी: 66 गवाहों के बावजूद अभियोजन असफल”
By,वामन पोटे
“30 लाख गबन के 10 साल पुराने केस में कंपनी डायरेक्टर बरी: 66 गवाहों के बावजूद अभियोजन असफल”
बैतूल 22अक्टूबर ।। बैतूल के आमला में एडीजे कोर्ट ने आर.बी.एन. इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर रामनिवास को 30 लाख रुपए के गबन के आरोप से बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अपराध साबित करने में असफल रहा। यह मामला लगभग 10 साल पुराना है।
कंपनी ने 25 सितंबर 2010 से 30 अक्टूबर 2015 के बीच छोटे व्यापारियों और निवेशकों से धनराशि जमा की थी। बाद में कंपनी ने अचानक अपना कार्यालय बंद कर दिया और फरार हो गई।
इस संबंध में श्याम कुमार पाटोदिया ने 25 जुलाई 2017 को आमला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कंपनी के डायरेक्टर रामनिवास और अन्य निदेशकों ने लगभग 30 लाख रुपए का गबन किया और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की।
कंपनी स्वयं को लाइफ इंश्योरेंस कंपनी की कॉर्पोरेट एजेंट बताती थी। यह पॉलिसी बॉन्ड बेचने और रियल एस्टेट में निवेश कराने का काम करती थी। शिकायतकर्ता पाटोदिया भी कंपनी में एक निवेशक थे।
मामला मध्यप्रदेश निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2000 के तहत भी दर्ज किया गया था। विवेचना अधिकारी विजय राव माहोरे ने जांच के दौरान सेबी और कॉर्पोरेट मंत्रालय से कंपनी की जानकारी मांगी थी। विवेचना में कुल 66 गवाह और 85 दस्तावेज पेश किए गए।
सेबी की महाप्रबंधक निर्मल कुमार मेहरोत्रा और डिप्टी रजिस्ट्रार अंजनी सुजानिया ने अदालत में गवाही दी कि रामनिवास कंपनी का डायरेक्टर था। हालांकि, गवाहों ने यह भी कहा कि घटना के समय वह कंपनी के सीएमडी थे या नहीं, यह बताना संभव नहीं है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय ने दलील दी कि विवेचना के दौरान यह प्रमाणित नहीं हुआ कि आरोपी अपराध के समय डायरेक्टर था।
अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि विवेचक ने एसपी बैतूल से आवश्यक अनुमति लिए बिना ‘मध्यप्रदेश निक्षेपकों के संरक्षण अधिनियम’ के तहत अग्रिम विवेचना की, जिससे प्रक्रिया दोषपूर्ण हो गई। लंबी सुनवाई के बाद न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष अपराध को संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा, इसलिए आरोपी को बरी किया जाता है। हालांकि, रामनिवास की जेल से रिहाई नहीं हो सकी, क्योंकि उनके विरुद्ध अन्य जिलों में भी अन्य प्रकरण लंबित हैं।
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