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मंडी बोर्ड को गिरवी रखकर ऋण लेने के प्रस्ताव का विरोध: संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सौंपा ज्ञापन
बैतूल, 24 अक्टूबर ।।
मध्यप्रदेश मंडी बोर्ड को गिरवी रखकर भावांतर भुगतान योजना के लिए 1500 करोड़ रुपये का ऋण लेने के प्रस्ताव का कर्मचारियों के संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने विरोध किया है। शुक्रवार को बैतूल में मंडी कर्मचारियों ने इस संबंध में एसडीएम अभिजीत सिंह को ज्ञापन सौंपा।
मोर्चा ने कहा कि शासन स्तर पर मंडी बोर्ड को गिरवी रखकर ऋण लेने की प्रक्रिया चल रही है, जबकि कृषि मंत्री पहले ही इस संबंध में मना कर चुके हैं। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि यह प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो कर्मचारी आंदोलन और हड़ताल के लिए बाध्य होंगे।
मोर्चा ने कहा कि कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 में मंडी बोर्ड द्वारा ऋण लेने का कोई प्रावधान नहीं है। प्रस्ताव स्वीकृत होने पर बोर्ड पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा और उसकी वित्तीय स्थिति अन्य बंद हुए बोर्डों जैसी हो सकती है।
कर्मचारियों ने बताया कि मंडी बोर्ड पहले से ही वेतन और पेंशन जैसी व्यवस्थाओं के लिए शासन के अनुदान पर निर्भर है। ऐसे में 1500 करोड़ रुपये के ऋण का बोझ उसकी वित्तीय स्थिति को और कमजोर करेगा।
संगठन ने सुझाव दिया कि शासन को भावांतर योजना की राशि अपने बजट से उपलब्ध करानी चाहिए। वैकल्पिक रूप से, एक वर्ष के लिए मंडी शुल्क में एक प्रतिशत अस्थायी वृद्धि कर आवश्यक राशि जुटाई जा सकती है।
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