अमृत मंथन (3) लोचन मंडी बडोरा: मंडी में टैक्स चोरी का साम्राज्य, बिचौलियों–व्यापारियों का बोलबाला, किसान बेहाल — भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की विधानसभा की मंडी में अव्यवस्थाओं का अंबार
By,वामन पोटे
अमृत मंथन (3)
लोचन मंडी बडोरा: मंडी में टैक्स चोरी का साम्राज्य, बिचौलियों–व्यापारियों का बोलबाला, किसान बेहाल — भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की विधानसभा की मंडी में अव्यवस्थाओं का अंबार
बैतूल2 दिसंबर ।।बैतूल जिले की लोचन कृषि उपज मंडी बडोरा इन दिनों किसानों के लिए बाजार कम और बिचौलियों–व्यापारियों की ‘साठगांठ मंडी’ ज्यादा बन चुकी है। मंडी का उद्देश्य किसानों को बेहतर दाम और सुरक्षित व्यापार उपलब्ध कराना है, लेकिन यहाँ हालात उलटे हैं—व्यापारी मालामाल हो रहे हैं, बिचौलिये फल-फूल रहे हैं, और किसान मुश्किलों में घिरा हुआ है। मंडी प्रशासन के संरक्षण में हो रहे खेल ने इस पूरी व्यवस्था को खोखला कर दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि रोजाना हजारों क्विंटल अनाज बिना मंडी टैक्स और बिना वैध दस्तावेजों के फैक्ट्रियों और निजी गोदामों में कैसे पहुँच रहा है? यह सीधा-सीधा मंडी राजस्व की चोरी है। न किसानों को सही भुगतान हो रहा है और न मंडी को टैक्स। यह पूरा कारनामा मंडी प्रबंधन, व्यापारियों और बिचौलियों की मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं है। कागजों में भले ही नीलामी होती दिखती हो, लेकिन कई ढेरों का माल व्यापारी ‘साइड में’ निजी खरीदी में उठा लेते हैं। न कोई पंजीयन, न कोई रसीद — सिर्फ कच्ची पर्ची पर भुगतान, जिससे किसान जोखिम में और व्यापारी पूरी तरह सुरक्षित।
गाँव–गाँव से आने वाले बिचौलिए इस खेल के सबसे बड़े सूत्रधार हैं। वे किसान से अनाज लेकर मंडी लाते हैं और फिर अपने पसंदीदा व्यापारी से मिलकर निजी खरीद करवाते हैं। इस प्रक्रिया में किसान को न सही बोली मिलती है, न मंडी के नियम लागू होते हैं। व्यापारी भी टैक्स बचा लेता है और बिचौलिये मोटा कमीशन कमा लेते हैं। इस मिलीभगत ने मंडी को टैक्स चोरी का अड्डा बना दिया है।
किसानों का आरोप है कि अगर वे सीधे व्यापारी के पास नहीं जाते या कच्ची पर्ची से भुगतान से इनकार करते हैं, तो उन्हें अलग-थलग खड़ा कर दिया जाता है। उनके माल को देर से तौला जाता है, बोली गिरा दी जाती है, या उन्हें घंटों लाइन में बिठाकर परेशान किया जाता है। कई किसान मजबूरी में बिचौलियों के दबाव में आकर गांव में ही अपना माल औने-पौने दाम में बेचने को मजबूर हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरा भ्रष्टाचार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की विधानसभा क्षेत्र की मंडी में हो रहा है। किसान लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सुनवाई कहीं नहीं। मंडी प्रशासन सिर्फ औपचारिकता निभा रहा है—ना जांच, ना कार्रवाई, ना व्यवस्था सुधारने का प्रयास। व्यापारी और बिचौलिए खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और अधिकारी खामोश बैठे हैं।
मंडी में नकली नीलामी, कच्ची पर्ची का चलन, टैक्स चोरी, अनाज की रातों-रात निकलने वाली गाड़ियाँ, और मंडी कर्मचारियों की चुप्पी—यह सब मिलकर एक बड़े भ्रष्ट तंत्र की ओर इशारा करता है। किसान मंडी में अपना हक पाने के लिए भटकता है, जबकि व्यापारी बिना टैक्स दिए लाखों की कमाई कर रहे हैं।
अगर स्थिति यही रही तो यह मंडी किसान हितों का केंद्र नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का मजबूत गढ़ बन जाएगी। अब किसानों को सुनने और मंडी व्यवस्था को सुधारने के लिए कठोर कार्रवाई की जरूरत है।
लोचन मंडी का यह सच बताता है—यहाँ प्रणाली टूट चुकी है, और इसका खामियाज़ा सिर्फ एक को मिल रहा है:वह है किसान।
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