जंगल बना कक्षा, प्रकृति बनी गुरु: अम्बा देवी पाट में ‘अनुभूति कार्यक्रम’ के जरिए बच्चों ने सीखा वन और वन्यजीवों को समझने का हुनर
By,वामन पोटे
जंगल बना कक्षा, प्रकृति बनी गुरु:
अम्बा देवी पाट में ‘अनुभूति कार्यक्रम’ के जरिए बच्चों ने सीखा वन और वन्यजीवों को समझने का हुनर
बैतूल 25 दिसंबर।।दक्षिण वनमंडल बैतूल के अंतर्गत वनपरिक्षेत्र आठनेर (सा.) स्थित अम्बा देवी पाट में 23 एवं 24 दिसंबर को आयोजित दो दिवसीय अनुभूति कार्यक्रम ने बच्चों के लिए जंगल को जीवंत पाठशाला में बदल दिया। इस विशेष कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं ने जंगल के बीच रहकर प्रकृति, वन संपदा और वन्यजीवों को नजदीक से देखने, समझने और महसूस करने का अवसर प्राप्त किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और वन्यप्राणियों के प्रति जागरूकता एवं संवेदनशीलता विकसित करना रहा। आयोजन वनमण्डलाधिकारी दक्षिण बैतूल श्री एल.के. वासनिक के निर्देशन में तथा उपवनमण्डलाधिकारी मुलताई (सा.) श्री संजय साल्वे एवं परिक्षेत्र अधिकारी आठनेर (सा.) श्री अतुल भोयर के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
नेचर ट्रेल पर मिला जंगल का जीवंत अनुभव
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को नेचर ट्रेल पर ले जाया गया, जहां उन्हें पेड़-पौधों की प्रजातियों, उनके उपयोग, औषधीय महत्व एवं संरक्षण के उपायों की जानकारी दी गई। बच्चों को बताया गया कि जंगल केवल ऑक्सीजन ही नहीं देता, बल्कि मानव जीवन, जलवायु संतुलन और जैव विविधता का आधार भी है।
पगमार्क से पहचाने वन्यजीव
वन अधिकारियों ने विद्यार्थियों को वन्यजीवों के पगचिन्हों के माध्यम से उनकी पहचान करने का प्रशिक्षण दिया। बच्चों ने जाना कि जंगल में दिखने वाले पगमार्क से जानवरों की मौजूदगी, दिशा और गतिविधियों का अनुमान कैसे लगाया जाता है। साथ ही डेन्ड्रोक्रोनोलॉजी विषय पर जानकारी देकर वृक्षों की आयु जानने की वैज्ञानिक विधि भी समझाई गई।
प्रश्नोत्तरी और चित्रकला में दिखी रचनात्मकता
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण विषय पर प्रश्नोत्तरी और चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी छात्र-छात्राओं ने प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण की शपथ ली। सामूहिक फोटोग्राफी के साथ दो दिवसीय अनुभूति कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन को सफल बनाने में वन विभाग के समस्त स्टाफ का सराहनीय योगदान रहा।
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