मुख्य सचिव का सख्त संदेश: “किसके यहां क्या पक रहा, सब पता है”
भोपाल 21 जनवरी।।
मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टरों और वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि कोई यह न समझे कि सब कुछ छिपा रहता है। “किसके यहां क्या पक रहा है, इसकी पूरी जानकारी रहती है।” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुछ जिलों को लेकर शिकायतें सीधे उनके और मुख्यमंत्री तक पहुंची हैं, इसलिए समय रहते सुधार कर लें। कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की समीक्षा बैठक में सीएस जैन ने अफसरों को करप्शन से दूर रहकर सरकार की प्राथमिकताओं और जनता के हित में काम करने की सख्त हिदायत दी।

मुख्य सचिव ने 7 और 8 अक्टूबर को हुई कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के 85 बिंदुओं की जिलावार समीक्षा की। इस दौरान टॉप थ्री और बॉटम थ्री जिलों की स्थिति साझा की गई और कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। महिला सुरक्षा और नाबालिग बालिकाओं की तलाश से जुड़े ‘मुस्कान अभियान’ की समीक्षा में बताया गया कि 1900 से अधिक बालिकाओं की बरामदगी हुई है। जन-जागरूकता के मामले में टीकमगढ़, धार और सिंगरौली टॉप रहे, जबकि पन्ना, मुरैना और भिंड बॉटम जिलों में शामिल रहे।
राजस्व विभाग की कार्यशैली पर असंतोष जताते हुए सीएस जैन ने कहा कि आरसीएमएस (Revenue Case Management System) के मामलों में निराकरण में अनावश्यक देरी हो रही है और कलेक्टरों का कंट्रोल नजर नहीं आता। कई मामलों में निराकरण के बाद केस दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे सिस्टम की समीक्षा का उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाता है। बैठक में यह भी सामने आया कि एक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अपनी आईटी कंपनी को काम देने के लिए फाइलें रोके बैठे हैं, जबकि सॉफ्टवेयर तैयार है। मुख्य सचिव पहले ही तीन बार नया सिस्टम लागू करने के निर्देश दे चुके हैं।
बैठक के दौरान उस समय भी असहज स्थिति बनी जब बैतूल कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते नजर आए। इस पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताई। इसके साथ ही मनरेगा की प्रगति पर भी असंतोष व्यक्त किया गया। समीक्षा में सामने आया कि जहां मनरेगा की प्रगति शून्य है, वहां कई जगह सीईओ के पद रिक्त हैं, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन पर सीधा असर पड़ रहा है।
कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की समीक्षा बैठक की तारीखें चार बार बदली गईं। पहले 31 दिसंबर, फिर 5 जनवरी और उसके बाद 15 जनवरी तय हुई, लेकिन प्रशासनिक कारणों से बैठक नहीं हो सकी। चौथी बार तय तारीख पर बुधवार को यह समीक्षा बैठक आयोजित की जा सकी, जिसमें कानून-व्यवस्था से लेकर विकास योजनाओं तक की विस्तृत समीक्षा हुई।
मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सड़क सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की समीक्षा करते हुए राहवीर योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुर्घटना पीड़ितों को गोल्डन ऑवर में सहायता मिले, इसके लिए 1600 अस्पतालों को इस योजना से जोड़ा गया है। व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाकर सड़क हादसों में मृतकों की संख्या में 45 से 50 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। गुना, डिंडौरी, मैहर, मुरैना और श्योपुर जैसे जिलों को इस दिशा में और बेहतर काम करने के निर्देश दिए गए। प्रदेश में 481 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें सुधारने के प्रयास जारी हैं।
अवैध खनिज कारोबार पर सख्ती बरतने के निर्देश देते हुए मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों से कहा कि वे समाज विरोधी गतिविधियों को हर हाल में रोकें। विशेष रूप से भिंड, मुरैना, शहडोल, जबलपुर और नरसिंहपुर जिलों में अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। वहीं, एससी-एसटी मामलों में कार्रवाई नहीं होने और प्रकरणों के लंबित रहने पर सागर सहित कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों पर नाराजगी जताते हुए संवेदनशीलता के साथ समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए गए। इसके लिए एसओपी जारी करने को भी कहा गया।
मुख्य सचिव ने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को यह भी निर्देश दिए कि वे हर माह कम से कम दो दिन संयुक्त रूप से बैठक और क्षेत्र भ्रमण करें ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में बेहतर समन्वय हो सके। शासन की उच्च प्राथमिकता की योजनाओं की हर माह समीक्षा करने, विकासखंड और ग्राम स्तर तक गतिविधियों की निगरानी करने, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अन्य राजस्व प्रकरण तय समय सीमा में निपटाने के निर्देश दिए गए। सीएम हेल्पलाइन में सौ दिन से अधिक समय से लंबित सभी प्रकरणों का एक सप्ताह में निराकरण करने को भी कहा गया। साथ ही ग्रामीण विकास कार्यों की मासिक समीक्षा और 15 वर्ष से अधिक पुराने सभी शासकीय वाहनों को स्क्रैप करने के निर्देश भी जारी किए गए।
कुल मिलाकर बैठक में मुख्य सचिव का रुख सख्त और स्पष्ट रहा। उन्होंने अफसरों को यह संदेश दे दिया कि लापरवाही, भ्रष्टाचार और ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप जनता को बेहतर सेवाएं देना ही प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है।
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