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सात साल में मांगें ही मांगें, समाधान अब भी अधूरा: रेल मंत्री से फिर मिले केंद्रीय मंत्री डीडी उइके

By,वामन पोटे

सात साल में मांगें ही मांगें, समाधान अब भी अधूरा: रेल मंत्री से फिर मिले केंद्रीय मंत्री डीडी उइके
बैतूल 16 फरवरी बैतूल–हरदा–हरसूद संसदीय क्षेत्र के सांसद और केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास (डीडी) उइके ने 12 फरवरी को एक बार फिर नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर क्षेत्र की लंबित रेल समस्याओं को उठाया। बैठक में अंडर ब्रिज निर्माण, ट्रेनों के स्टॉपेज, बंद रेल सेवाओं की बहाली और नई रेल सेवाएं शुरू करने जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब केंद्रीय मंत्री उइके ने रेल मंत्री से क्षेत्र की मांगें रखी हों। पिछले सात वर्षों में वे कई बार रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन अब तक अधिकांश मांगें कागजों तक ही सीमित हैं।

सात वर्षों में दर्जनों ज्ञापन, लेकिन ठोस उपलब्धि नहीं
स्थानीय नागरिकों, व्यापारिक संगठनों और रेल संघर्ष समितियों का कहना है कि पिछले सात वर्षों में सांसद और केंद्रीय मंत्री उइके द्वारा दर्जनों बार मांग पत्र और प्रस्ताव रेल मंत्रालय को सौंपे गए। इन मांगों में बैतूल, मुलताई, आमला, घोड़ाडोंगरी और शाहपुर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव, बंद ट्रेनों की बहाली और नई सेवाएं शुरू करने जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं।
इसके बावजूद आज तक जिले के किसी भी प्रमुख स्टेशन को नई लंबी दूरी की ट्रेन का स्थायी स्टॉपेज नहीं मिल पाया है। कोविड-19 महामारी के दौरान बंद की गई कई ट्रेनें भी पूरी तरह बहाल नहीं हो सकीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रेल मंत्री से बैठक में रखी गईं प्रमुख मांगें
12 फरवरी को हुई बैठक में केंद्रीय मंत्री उइके ने बैतूल शहर की यातायात समस्या को प्रमुखता से उठाते हुए बैतूल–मरामझिरी रेल खंड पर प्रस्तावित रेलवे अंडर ब्रिज के शीघ्र निर्माण की मांग की। उन्होंने कहा कि अंडर ब्रिज नहीं होने से शहर में आए दिन जाम की स्थिति बनती है और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
इसके अलावा मुलताई रेलवे स्टेशन पर अमरावती–जबलपुर एक्सप्रेस, ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस और जयपुर–चेन्नई एक्सप्रेस के ठहराव की मांग रखी गई। बैतूल स्टेशन को क्षेत्रीय रेल हब के रूप में विकसित करने और पुरी हमसफर एक्सप्रेस, आंध्र प्रदेश एक्सप्रेस तथा भगत की कोठी एक्सप्रेस के ठहराव का प्रस्ताव भी दिया गया।
आमला, घोड़ाडोंगरी और बरबटपुर जैसे आदिवासी बहुल स्टेशनों पर भी प्रमुख ट्रेनों के ठहराव और रेल सुविधाओं के विस्तार की मांग की गई। इसके साथ ही नागपुर–भुसावल सुपरफास्ट इंटरसिटी (दादाधाम एक्सप्रेस) को पुनः शुरू करने और बैतूल से हरिद्वार तक सीधी रेल सेवा प्रारंभ करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
रेल मंत्री ने दिया आश्वासन, लेकिन जनता को इंतजार
बैठक में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सभी प्रस्तावों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के आश्वासन पहले भी कई बार मिल चुके हैं, लेकिन जमीन पर परिणाम दिखाई नहीं दिए।
रेल संघर्ष समिति के सदस्यों का कहना है कि मुलताई और बैतूल जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर वर्षों से आंदोलन और ज्ञापन दिए जा रहे हैं, लेकिन रेलवे की ओर से स्थायी समाधान नहीं मिला। उनका कहना है कि केवल बैठकें और पत्राचार से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि रेलवे बोर्ड से ठोस स्वीकृति और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।
अन्य क्षेत्रों से तुलना पर बढ़ रहा असंतोष
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नर्मदापुरम, खंडवा और छिंदवाड़ा जैसे अन्य संसदीय क्षेत्रों में पिछले वर्षों में कई ट्रेनों के नए स्टॉपेज स्वीकृत हुए हैं और रेल सुविधाओं का विस्तार हुआ है, जबकि बैतूल–हरदा क्षेत्र अब भी अपेक्षित सुविधाओं से वंचित है।
इससे क्षेत्र के लोगों में यह सवाल उठने लगा है कि केंद्रीय मंत्री का प्रतिनिधित्व होने के बावजूद रेलवे क्षेत्र में अपेक्षित विकास क्यों नहीं हो पाया।
समर्थकों का दावा – प्रयास जारी, जल्द मिलेंगे परिणाम
वहीं केंद्रीय मंत्री उइके के समर्थकों का कहना है कि रेलवे से जुड़े निर्णय तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत होते हैं, जिनमें समय लगता है। उनका कहना है कि सांसद लगातार रेल मंत्री और रेलवे अधिकारियों से संपर्क में हैं और क्षेत्र की मांगों को प्राथमिकता से उठा रहे हैं।
समर्थकों का यह भी दावा है कि बैतूल स्टेशन को रेल हब बनाने, अंडर ब्रिज निर्माण और नई रेल सेवाओं को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं और आने वाले समय में क्षेत्र को लाभ मिल सकता है।
जनता की नजर अब परिणाम पर
सात वर्षों में लगातार मांग पत्र, बैठकें और आश्वासन मिलने के बावजूद ठोस परिणाम सामने नहीं आने से क्षेत्र में असंतोष बना हुआ है। अब क्षेत्र के लोगों की नजर रेलवे की आगामी समय सारिणी और बजट पर टिकी है।
लोगों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि नई ट्रेनों के स्टॉपेज, बंद सेवाओं की बहाली और आधारभूत रेल सुविधाओं के विस्तार के रूप में वास्तविक परिणाम दिखाई देने चाहिए। तभी बैतूल–हरदा संसदीय क्षेत्र को रेलवे विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जा सकेगा।

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