गुणवत्ता पर सख्ती का संदेश: विधायक हेमंत खंडेलवाल ने विकास कार्यों की जांच के दिए निर्देश
By,वामन पोटे
गुणवत्ता पर सख्ती का संदेश: विधायक हेमंत खंडेलवाल ने विकास कार्यों की जांच के दिए निर्देश
बैतूल।।
राजनीति में अक्सर विकास कार्यों की घोषणाएं और उनके लोकार्पण चर्चा में रहते हैं, लेकिन उन्हीं कार्यों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने की पहल कम ही देखने को मिलती है। बैतूल विधायक और मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अपनी विधानसभा क्षेत्र में चल रहे और पूर्ण हो चुके निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश देकर एक अलग उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनके इस कदम को जनप्रतिनिधि की जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
खंडेलवाल ने बैतूल कलेक्टर को लिखे पत्र में वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 (दिसंबर 2025 तक) में विधायक निधि, विशेष निधि, जिला खनिज मद और बस्ती विकास योजना के तहत स्वीकृत विकास कार्यों की विस्तृत जांच कराने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इन योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की गुणवत्ता, निर्धारित तकनीकी मापदंडों और उपयोगिता की जांच आवश्यक है, क्योंकि क्षेत्र के नागरिकों से लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि कुछ निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता किया गया है।
पत्र में उन्होंने निर्देश दिए हैं कि जिला योजना अधिकारी की अध्यक्षता में एक जांच दल गठित किया जाए, जिसमें संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हों। यह दल नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर निर्माण स्थलों का निरीक्षण करेगा, कार्यों की गुणवत्ता का तकनीकी मूल्यांकन करेगा और वित्तीय तथा भौतिक प्रगति की समीक्षा करेगा। साथ ही, जांच प्रतिवेदन में प्रत्येक कार्य के फोटोग्राफ भी शामिल किए जाएं, ताकि स्थिति का स्पष्ट आकलन किया जा सके।
खंडेलवाल ने यह भी कहा है कि निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्माण स्थल पर शासन की गाइडलाइन के अनुसार सूचना बोर्ड लगाए गए हैं या नहीं। उन्होंने जोर दिया कि जनहित से जुड़े विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उनकी इस पहल के बाद निर्माण कार्यों से जुड़े विभागों और ठेकेदारों में हलचल देखी जा रही है। माना जा रहा है कि इस जांच के बाद जहां गुणवत्तापूर्ण कार्यों को प्रोत्साहन मिलेगा, वहीं मानकों के अनुरूप कार्य नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी संभव हो सकती है। बैतूल बाजार के सुभाष वार्ड में बनी सड़क का गुणवत्ता परीक्षण में असफल होना और उसके पुनर्निर्माण का निर्णय इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन चुका है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कदम को सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है। आमतौर पर जनप्रतिनिधि विकास कार्यों के लिए निधि स्वीकृत कराने और उनका लोकार्पण करने तक सीमित रहते हैं, लेकिन स्वयं गुणवत्ता की जांच कराने की पहल कम ही देखने को मिलती है। इससे यह संदेश जाता है कि विकास केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता और स्थायित्व भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
हेमंत खंडेलवाल की कार्यशैली पहले भी सादगी और अनुशासन के लिए जानी जाती रही है। सरकारी सुविधाओं का सीमित उपयोग, टोल टैक्स का स्वयं भुगतान और आम नागरिकों से सीधे संवाद उनकी पहचान का हिस्सा रहे हैं। अब विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया यह कदम उनकी जवाबदेही की भावना को और मजबूत करता है।
क्षेत्र के नागरिकों का मानना है कि इस प्रकार की पहल से विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। साथ ही, संबंधित विभागों और ठेकेदारों में भी जिम्मेदारी और गुणवत्ता के प्रति गंभीरता बढ़ेगी।
फिलहाल इस जांच प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू होने की उम्मीद है। जांच प्रतिवेदन आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि विकास कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुए हैं या नहीं। लेकिन इतना तय है कि इस पहल ने बैतूल विधानसभा में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर नई बहस और जागरूकता को जन्म दिया है।
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