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बैतूल में कचरा घोटाले पर गिरी गाज: सीएमओ-उपयंत्री सस्पेंड, 3 करोड़ के लीगेसी वेस्ट प्रोजेक्ट में अनियमित भुगतान उजागर

By,वामन पोटे

बैतूल में कचरा घोटाले पर गिरी गाज: सीएमओ-उपयंत्री सस्पेंड, 3 करोड़ के लीगेसी वेस्ट प्रोजेक्ट में अनियमित भुगतान उजागर
बैतूल 26 फरवरी।। बैतूल नगर पालिका में लंबे समय से विवादों में चल रहे लीगेसी वेस्ट प्रोजेक्ट में आखिरकार बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। किदवई वार्ड, गौठाना स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड में कचरा निष्पादन कार्य में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के बाद मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सतीश मटसेनिया और उपयंत्री जतिन पाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे द्वारा जांच रिपोर्ट के आधार पर  बुधवार शाम की गई है।
जांच में खुला अनियमित भुगतान का खेल
कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि लीगेसी वेस्ट डंप साइट के रेमेडिएशन कार्य में निर्धारित शर्तों और तकनीकी मापदंडों का पालन नहीं किया गया। इसके बावजूद संबंधित ठेकेदार को नियमों के विपरीत भुगतान कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से ट्रेचिंग ग्राउंड से वर्षों पुराने कचरे को हटाने और वैज्ञानिक तरीके से उसका निष्पादन करने का ठेका दिया गया था। लेकिन जमीनी स्तर पर काम अधूरा और मानकों से कम पाया गया। इससे न केवल सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका गहराई, बल्कि पर्यावरणीय खतरे भी बढ़ गए।
प्रदूषण और दुर्गंध से परेशान रहे स्थानीय लोग
गौठाना स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड लंबे समय से आसपास के रहवासियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ था। कचरे के ढेर से उठने वाली दुर्गंध, भूजल और वायु प्रदूषण की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। स्थानीय लोगों का आरोप था कि कचरा हटाने के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि वास्तविक समस्या जस की तस बनी हुई है।
जांच में यह भी पाया गया कि ठेकेदार द्वारा कार्य की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में गंभीर कमी रही, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
आयुक्त ने जारी किया निलंबन आदेश
मामले को गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने सीएमओ और उपयंत्री को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान दोनों अधिकारियों का मुख्यालय संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, नर्मदापुरम संभाग निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि शासन अब नगरीय निकायों में वित्तीय अनियमितताओं और लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपना रहा है।
विधायक हेमंत खंडेलवाल की सख्ती के बाद बढ़ी कार्रवाई
इस पूरे मामले को बैतूल विधायक और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने ट्रेचिंग ग्राउंड की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए पहले कलेक्टर से जांच कराने को कहा था। जब कार्रवाई में अपेक्षित तेजी नहीं दिखी, तो उन्होंने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
इसके बाद नगरीय प्रशासन आयुक्त स्वयं बैतूल पहुंचे और मौके का निरीक्षण किया। उनकी रिपोर्ट के आधार पर यह बड़ी कार्रवाई सामने आई। इस निलंबन ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि बैतूल जिले में अब काम में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नगर निकायों में मचा हड़कंप, जवाबदेही तय होने की उम्मीद
सीएमओ और उपयंत्री के निलंबन के बाद जिले की अन्य नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में हड़कंप की स्थिति है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच यह संदेश गया है कि विकास कार्यों में अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आने पर सख्त कार्रवाई तय है।
यह कार्रवाई आम नागरिकों के लिए भी राहत का संकेत मानी जा रही है, क्योंकि लंबे समय से लोग ट्रेचिंग ग्राउंड की समस्या और प्रशासनिक लापरवाही से परेशान थे। अब उम्मीद जताई जा रही है कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और शहर को कचरा संकट से राहत मिलेगी।

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