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ट्रेंचिंग ग्राउंड घोटाला: 2.41 करोड़ के भुगतान में ईई की भूमिका पर उठे सवाल, आधी कार्रवाई से बढ़ा विवाद

By,वामन पोटे

ट्रेंचिंग ग्राउंड घोटाला: 2.41 करोड़ के भुगतान में ईई की भूमिका पर उठे सवाल, आधी कार्रवाई से बढ़ा विवाद
बैतूल 27 फरवरी।। शहर के गौठाना स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड के लीगेसी वेस्ट रेमेडिएशन घोटाले में अब कार्यपालन यंत्री (ईई) सचिन कडू की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सतीश मटसेनिया और उपयंत्री जतिन पाल को निलंबित किए जाने के बाद भी ईई पर कोई कार्रवाई नहीं होने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जबकि उपलब्ध तथ्यों के अनुसार ठेकेदार को किए गए 2.41 करोड़ रुपए के भुगतान में कार्यपालन यंत्री का सत्यापन और अनुमोदन निर्णायक आधार बना था।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने जांच रिपोर्ट के आधार पर बुधवार को सीएमओ और उपयंत्री को निलंबित कर दिया था। यह कार्रवाई कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी द्वारा गठित जांच दल की रिपोर्ट के बाद की गई, जिसमें स्पष्ट पाया गया कि टेंडर शर्तों के अनुरूप कार्य पूर्ण नहीं होने के बावजूद ठेकेदार को अनियमित रूप से भुगतान किया गया।
7 करोड़ का ठेका, 2.41 करोड़ का भुगतान
नगर पालिका सूत्रों के अनुसार ट्रेंचिंग ग्राउंड पर लीगेसी वेस्ट डंप साइट रेमेडिएशन परियोजना का कुल ठेका लगभग 7 करोड़ रुपए का है। इस परियोजना के तहत ठेकेदार को अब तक 2.41 करोड़ रुपए का भुगतान तीन अलग-अलग किश्तों में किया जा चुका है। जांच दल ने भी माना है कि यह भुगतान कार्य की वास्तविक प्रगति के अनुरूप नहीं था।
सहायक यंत्री ने किया था साफ इंकार
भुगतान की प्रक्रिया के तहत ठेकेदार द्वारा बिल प्रस्तुत करने के बाद सबसे पहले उपयंत्री द्वारा स्थल निरीक्षण और सत्यापन किया जाता है। इसके बाद सहायक यंत्री को मौके पर जाकर कार्य का सत्यापन और अनुमोदन करना होता है। लेकिन नगर पालिका के सहायक यंत्री नीरज धुर्वे ने मौके पर कार्य की स्थिति संतोषजनक नहीं पाए जाने पर सत्यापन और अनुमोदन करने से साफ इंकार कर दिया था।
ईई ने संभाली जिम्मेदारी, तीन बार किया सत्यापन
सहायक यंत्री द्वारा इंकार किए जाने के बाद सीएमओ ने कार्यपालन यंत्री सचिन कडू को सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी। आरोप है कि कार्यपालन यंत्री ने तीन बार स्थल निरीक्षण कर कार्य को संतोषजनक बताते हुए भुगतान के लिए अनुमोदन कर दिया। उनके अनुमोदन के आधार पर ही सीएमओ ने बिना विलंब किए ठेकेदार को तीन किश्तों में 2.41 करोड़ रुपए का भुगतान जारी कर दिया।
ईई पर कार्रवाई नहीं होने से उठ रहे सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब भुगतान प्रक्रिया में कार्यपालन यंत्री की भूमिका केंद्रीय रही और उनके सत्यापन के आधार पर ही भुगतान हुआ, तो फिर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। जानकारों का कहना है कि यदि कार्यपालन यंत्री भी सहायक यंत्री की तरह सत्यापन से इंकार कर देते, तो भुगतान रुक सकता था और ठेकेदार को कार्य पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़ता।
आधी अधूरी कार्रवाई से बढ़ा विवाद
सीएमओ और उपयंत्री पर कार्रवाई के बावजूद कार्यपालन यंत्री पर कोई कदम नहीं उठाया जाना आधी अधूरी कार्रवाई माना जा रहा है। इससे प्रशासन की निष्पक्षता और जांच की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं। ट्रेंचिंग ग्राउंड घोटाला अब जिले में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है और लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या जिम्मेदार अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी या नहीं।

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