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नोडल मंत्रालय वाले जिले में ही वनाधिकार पट्टे लंबित, भीमपुर में आदिवासियों का प्रदर्शन तेज

By,वामन पोटे

नोडल मंत्रालय वाले जिले में ही वनाधिकार पट्टे लंबित, भीमपुर में आदिवासियों का प्रदर्शन तेज

बैतूल 27 फरवरी ।। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में वनाधिकार पट्टों के लंबित मामलों को लेकर आदिवासी संगठनों और किसानों ने भीमपुर में जोरदार आंदोलन किया और प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिस जिले का प्रतिनिधित्व केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके करते हैं, उसी जिले में व्यक्तिगत और सामुदायिक वनाधिकार दावे वर्षों से लंबित पड़े हैं।

जयस, समस्त आदिवासी संगठन और सर्व समाज संगठन के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वनाधिकार अधिनियम के तहत मिलने वाले सामुदायिक पट्टों के मामले ग्राम पंचायत स्तर पर लंबित हैं, जिनमें मुठवा देवस्थान, पेनकड़ा, खंडराई, श्मशान, गौठान और चरनोई भूमि से जुड़े दावे शामिल हैं।

जयस के प्रदेश संयोजक जामवन्त सिंह कुमरे ने कहा कि केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय वनाधिकार दावों की निगरानी के लिए नोडल एजेंसी है और इसकी नियमित समीक्षा भी होती है। उन्होंने दावा किया कि संसद में 5 फरवरी 2026 को दिए गए जवाब में देशभर में 44 लाख से अधिक व्यक्तिगत और सामुदायिक वनाधिकार दावे लंबित होने की जानकारी दी गई थी, जो सरकार की प्राथमिकता पर सवाल खड़े करता है।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि ताप्ती मेघा रिचार्ज, ताप्ती कंजरवेशन रिजर्व, फायरिंग रेंज, अभयारण्य और खनिज उत्खनन जैसी परियोजनाओं के नाम पर आदिवासी भूमि पर दबाव बनाया जा रहा है। ढेंगना जलाशय परियोजना को लेकर भी संभावित विस्थापन की आशंका जताई गई।

आंदोलन में किसानों ने भीमपुर क्षेत्र में लगातार बिजली कटौती से सिंचाई प्रभावित होने और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होने का मुद्दा भी उठाया। इसके अलावा ट्रांसफॉर्मर लगाने के नाम पर निजी ठेकेदारों द्वारा कथित अवैध वसूली के आरोप लगाते हुए मामले में एफआईआर दर्ज करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि वनाधिकार पट्टों के लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया और अन्य मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को जिलेभर में व्यापक स्तर पर तेज किया जाएगा।

इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।

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