3 मार्च को आसमान में दिखेगा ‘रेड मून’ का अद्भुत नजारा, भारत में पूर्ण चंद्र ग्रहण
उज्जैन, 1 मार्च। इस वर्ष का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण 3 मार्च को खगोलीय घटना के रूप में घटित होगा। यह ग्रहण भारत सहित विश्व के कई हिस्सों में दिखाई देगा और इस दौरान चंद्रमा ताम्रवर्ण यानी ‘रेड मून’ के रूप में नजर आएगा।
शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि चंद्र ग्रहण तब होता है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच सीधी रेखा में आ जाती है। इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है और सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता। पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में ढक जाता है और उसका रंग लाल दिखाई देता है, जिसे वैज्ञानिक रूप से अत्यंत आकर्षक और महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है।
उन्होंने बताया कि ग्रहण का प्रारंभ दोपहर 3 बजकर 19 मिनट 7 सेकंड पर होगा। ग्रहण का मध्यकाल शाम 5 बजकर 03 मिनट 7 सेकंड पर रहेगा और इसका मोक्ष यानी समाप्ति समय शाम 6 बजकर 47 मिनट 6 सेकंड होगा। इस प्रकार ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट रहेगी। ग्रहण का प्रतिशत 155.5 होने के कारण यह पूर्ण ग्रहण की श्रेणी में आएगा।
यह ग्रहण भारत के पूर्वी भागों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा, जहां सूर्यास्त जल्दी होता है। इसके अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में भी यह घटना दिखाई देगी।
उज्जैन के संदर्भ में उन्होंने बताया कि यहां सूर्यास्त शाम 6 बजकर 31 मिनट पर होगा। सूर्यास्त के समय चंद्रमा आंशिक ग्रहण की स्थिति में उदित होगा, लेकिन क्षितिज से ऊपर आने तक ग्रहण समाप्त हो जाएगा। इस कारण उज्जैन में यह ग्रहण सैद्धांतिक रूप से तो दृश्य होगा, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से देख पाना संभव नहीं होगा। टेलिस्कोप से भी इसे देखना कठिन रहेगा, क्योंकि चंद्रमा दृश्य होने से पहले ही ग्रहण समाप्त हो जाएगा।
खगोल विज्ञान के अनुसार पूर्ण चंद्र ग्रहण एक दुर्लभ और आकर्षक घटना है, जिसे देखने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक और खगोल प्रेमी उत्साहित रहते हैं।
2. निजी अस्पताल में जोरदार धमाका: गैस गीजर फटने से इमारत का हिस्सा ढहा, बड़ा हादसा टला
आगरमालवा, 1 मार्च। जिले के कानड़ कस्बे में रविवार दोपहर एक निजी अस्पताल में हुए जोरदार विस्फोट से अफरा-तफरी मच गई। धमाका इतना तेज था कि आसपास के लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
यह हादसा माता मंदिर के पास पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में स्थित एक निजी अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर हुआ। विस्फोट के कारण भवन का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया। अस्पताल की खिड़कियां और दरवाजे टूट गए तथा मलबा नीचे गली और क्लीनिक परिसर में फैल गया।
धमाके की सूचना मिलते ही पुलिस और राजस्व विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया। राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किया गया और आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
थाना प्रभारी राजेश दांगी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में गैस गीजर के फटने की पुष्टि हुई है। हालांकि विस्फोट के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। विशेषज्ञ टीम यह भी जांच कर रही है कि गैस गीजर में तकनीकी खराबी थी या अन्य कोई कारण इस विस्फोट के पीछे जिम्मेदार है।
घटना के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्रित हो गए। लोगों में घटना को लेकर भय और चिंता का माहौल बना रहा। गनीमत यह रही कि विस्फोट के समय अस्पताल में अधिक लोग मौजूद नहीं थे, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
प्रशासन ने भवन की स्थिति का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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सिंहस्थ 2028 की तैयारियां तेज: लालपुर ब्रिज सहित कई परियोजनाओं पर तेजी से काम जारी
उज्जैन, 1 मार्च। सिंहस्थ 2028 को लेकर उज्जैन में विकास और निर्माण कार्य तेज गति से किए जा रहे हैं। संभागायुक्त एवं मेला अधिकारी आशीष सिंह के निर्देश पर विभिन्न परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार लालपुर ब्रिज में पाइलिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। इस परियोजना में कुल 87 पाइल में से 51 पाइल का कार्य पूरा हो चुका है। यह पुल सिंहस्थ के दौरान यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इसके अलावा कर्कराज पार्किंग, भूखी माता मंदिर और शिप्रा ब्रिज से संबंधित पाइलिंग कार्य 14 फरवरी को पूर्ण हो चुका है। अब इन परियोजनाओं में पाइल कैप्स लगाने और सब-स्ट्रक्चर निर्माण का कार्य प्रगति पर है।
प्रशासन ने सिंहस्थ के विशाल आयोजन को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान दिया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी परियोजनाएं तय समय सीमा में पूरी हों ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सिंहस्थ देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। ऐसे में बेहतर सड़क, पुल और पार्किंग जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
प्रशासन का कहना है कि सभी निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए तेजी से कार्य पूर्ण करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि सिंहस्थ 2028 को सफल और व्यवस्थित बनाया जा सके।
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