सरकार पर अखिलेश-खरगे उठा रहे सवाल, पर क्या उन्हें नहीं पता ईरान ने इंदिरा गांधी के साथ क्या किया था?
By, वामन पोटे
सरकार पर अखिलेश-खरगे उठा रहे सवाल, पर क्या उन्हें नहीं पता ईरान ने इंदिरा गांधी के साथ क्या किया था?
विपक्ष का नैरेटिव यह है कि भारत को ईरान के साथ अपनी पुरानी दोस्ती निभानी चाहिए. लेकिन, विदेश नीति वोट-बैंक या भावुकता से नहीं, बल्कि इतिहास के कड़वे सच और नेशनल इंट्रेस्ट से चलती है. अखिलेश और खरगे आज जिस ईरान की तरफदारी में सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, क्या वे भूल गए हैं कि उसी ईरान ने कांग्रेस इंदिरा गांधी को सबसे बड़े कूटनीतिक धोखे दिए थे?
बात साल 1971 की है. भारत और पाकिस्तान के बीच खौफनाक जंग चल रही थी. इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत अपने अस्तित्व और बांग्लादेश की मुक्ति की लड़ाई लड़ रहा था. उस वक्त ईरान का शासक शाह मोहम्मद रजा पहलवी था. लेकिन जब साथ देने की बारी आई तो ईरान भी आंख मूंदकर पाकिस्तान के खेमे में जा खड़ा हुआ. ईरान ने भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए पाकिस्तान को भारी मात्रा में गोला-बारूद, सैन्य उपकरण और फाइटर जेट्स (F-5s) सप्लाई किए. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, 1971 में ईरान ने पाकिस्तान को लगभग एक दर्जन हेलीकॉप्टर और अन्य सैन्य उपकरण उधार दिए, ताकि तत्कालीन पश्चिमी पाकिस्तान को सुरक्षित रखा जा सके.
पाकिस्तानी वायुसेना को दी पनाह
जब भारतीय वायुसेना पाकिस्तानी एयरबेस को तबाह कर रही थी, तब ईरान ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और उनके पायलटों को बचाने के लिए अपने यहां सुरक्षित पनाह दी थी. यानी, जो विमान भारतीयों पर बम गिरा रहे थे, उन्हें ईरान बचा रहा था. क्या खरगे जी भूल गए कि उस समय इंदिरा गांधी को ईरान की इस हरकत से कितना गहरा आघात लगा था?
1965 की जंग में भी किया था वही धोखा
1971 से पहले, 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भी ईरान ने भारत के खिलाफ जाकर पाकिस्तान का ही साथ दिया था. ईरान ने न सिर्फ पाकिस्तान को मुफ्त में कच्चा तेल मुहैया कराया, बल्कि मेडिकल सप्लाई और हथियारों की खेप भी भेजी. इंदिरा गांधी जब 1966 में सत्ता में आईं, तो उन्हें विरासत में ईरान का यह पाकिस्तान-परस्त कड़वा रवैया ही मिला था.
‘इस्लामिक क्रांति’ के बाद कश्मीर पर उगला जहर
1979 में ईरान में तख्तापलट हुआ और वहां अयातुल्ला खुमैनी के नेतृत्व में ‘इस्लामिक क्रांति’ आई. 1980 में इंदिरा गांधी दोबारा प्रधानमंत्री बनीं. यह उम्मीद थी कि नया ईरानी नेतृत्व भारत के साथ दोस्ताना व्यवहार रखेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. खुमैनी और उनके बाद खामेनेई ने भी बार-बार कश्मीर के मुद्दे पर भारत के खिलाफ बयानबाजी की.
ईरान ने कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों और OIC (इस्लामिक सहयोग संगठन) में कश्मीर के मुसलमानों का मुद्दा उठाकर उसे फिलिस्तीन के साथ जोड़ने की कोशिश की. इंदिरा गांधी के लिए यह भारत की संप्रभुता पर सीधा हमला था, जिसका उन्होंने हमेशा कड़ा विरोध किया.
ओआईसी (OIC) में भारत का विरोध
इंदिरा गांधी के पूरे कार्यकाल के दौरान, जब भी इस्लामिक देशों के संगठन (OIC) में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कोई प्रस्ताव पेश किया, ईरान ने हमेशा धार्मिक आधार पर पाकिस्तान का ही समर्थन किया. ईरान ने कभी भी 1970 और 80 के दशक में भारत की कूटनीतिक चिंताओं को अहमियत नहीं दी.
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