आगामी ग्रीष्मकाल को लेकर अलर्ट मोड में प्रशासन, पेयजल आपूर्ति पर विशेष फोकस
बैतूल 3 मार्च। जिले में आगामी ग्रीष्मकाल के दौरान पेयजल संकट की संभावनाओं को देखते हुए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से व्यापक रणनीति तैयार की है। मंगलवार को संयुक्त तहसील कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उईके, विधायक एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, विधायक चंद्रशेखर देशमुख, विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे, विधायक गंगाबाई उईके, कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी तथा पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल निगम, जल संसाधन विभाग, लोक निर्माण विभाग, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के प्रगतिरत कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि गर्मी के मौसम में किसी भी गांव में पेयजल संकट की स्थिति नहीं बनने दी जाएगी।
विधायक श्री हेमंत खंडेलवाल ने निर्देश दिए कि पेयजल संबंधी शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए जिला पंचायत को नोडल एजेंसी बनाया जाए। जिन ग्रामों में हैंडपंप, बोरवेल या मोटर खराब हैं, वहां तत्काल मरम्मत कर जलापूर्ति बहाल की जाए। केंद्रीय मंत्री श्री दुर्गादास उईके ने भी अधिकारियों को निर्देशित किया कि चिन्हित जलसंकटग्रस्त गांवों में वैकल्पिक व्यवस्था पूर्व से ही सुनिश्चित की जाए, ताकि संकट की स्थिति उत्पन्न ही न हो।
विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे ने पहले से हैंडओवर हो चुकी नल-जल योजनाओं का पुनः सर्वे कराने का सुझाव दिया, जिससे बंद या आंशिक रूप से चालू योजनाओं को दुरुस्त किया जा सके। विधायक श्री चंद्रशेखर देशमुख ने प्रभावित ग्रामों में प्राथमिकता के आधार पर टैंकर व्यवस्था और अतिरिक्त बोरिंग कराने की आवश्यकता जताई।
बैठक में जल निगम अंतर्गत गढ़ा, मेढ़ा, वर्धा और घोघरी सिंचाई परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। जिले में सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर निर्माण स्तर तक के बैराज, केनाल और बिना केनाल वाले कार्यों के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए। सिरपुर जैसे आदर्श प्रोजेक्ट का अध्ययन कर 10 संभावित स्थलों का चयन करने की बात भी कही गई।
विधायक श्रीमती गंगाबाई उईके ने घोड़ाडोंगरी क्षेत्र के खर्राघाट में नए बैराज/डैम प्रस्तावित करने का सुझाव दिया। साथ ही जर्जर डैम और बैराज की प्राथमिकता से मरम्मत तथा बैतूल नगर में नए डैम निर्माण के लिए स्थल चयन के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में घोघरी डैम में पर्याप्त जल उपलब्ध है, जिससे नगर की जलापूर्ति सुचारू रूप से की जा सकती है।
बैठक में विधायक निधि और विशेष निधि के अंतर्गत प्रगतिरत निर्माण कार्यों की भी समीक्षा हुई। सामुदायिक भवन, पुलिया निर्माण और अन्य विकास कार्यों में विलंब पाए जाने पर संबंधित सरपंचों और सचिवों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। सख्त चेतावनी दी गई कि 31 मार्च तक सभी निर्माण कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण किए जाएं। 30 मार्च को पुनः समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
वन विभाग से संबंधित निर्माण कार्यों और जनजातीय पूजा स्थलों पर प्रस्तावित विकास कार्यों पर भी चर्चा हुई। चिरमा टोकरी सहित अन्य देवस्थलों पर हैंडपंप, शेड और मंच निर्माण की अनुमति का विषय रखा गया। भौरा ग्राम पंचायत में प्रगतिरत तालाब निर्माण कार्य में तेजी लाने तथा ट्राइबल सेंटर एवं बटरफ्लाई पार्क प्रस्तावित करने पर भी विचार किया गया।
3 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक सर्किट हाउस, ऐतिहासिक भवन रहेगा संरक्षित
बैठक के बाद विधायक श्री हेमंत खंडेलवाल ने कलेक्टर श्री नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी के साथ वर्तमान सर्किट हाउस परिसर का निरीक्षण किया। नेशनल हाईवे पर बढ़ते वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए बैतूल मुख्यालय पर 3 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सर्किट हाउस निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
नवीन सर्किट हाउस में अत्याधुनिक कॉन्फ्रेंस हॉल, उत्कृष्ट श्रेणी के कमरे और आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। विधायक श्री खंडेलवाल ने निर्देश दिए कि वर्तमान सर्किट हाउस भवन ऐतिहासिक धरोहर होने के कारण इसे रेस्ट हाउस के रूप में संरक्षित रखा जाए। साथ ही 80 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि से नए कमरे एवं डोरमेट्री निर्माण की भी योजना है।
उन्होंने नए सर्किट हाउस और रेस्ट हाउस के लिए संयुक्त आधुनिक किचन की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा, ताकि प्रशासनिक और वीआईपी व्यवस्थाएं बेहतर ढंग से संचालित हो सकें। अधिकारियों ने बताया कि निर्माण कार्य के लिए 3 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट प्रावधानित है।
निरीक्षण के दौरान विधायक चंद्रशेखर देशमुख, विधायक गंगाबाई उईके, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अक्षत जैन, एसडीएम अभिजीत सिंह तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
इस प्रकार जिले में जहां एक ओर ग्रीष्मकालीन पेयजल व्यवस्था को लेकर ठोस रणनीति बनाई गई है, वहीं दूसरी ओर आधारभूत संरचना के विकास कार्यों को भी गति देने की तैयारी की गई है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।
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